अत्याधुनिक मशीनों के आने से चिकित्सकों और मरीजों को हुआ फायदा : डॉ अजीत सिंह मुंडा

Publisher NEWSWING DatePublished Wed, 05/16/2018 - 21:38

Ranchi : डॉ अजीत सिंह मुंडा रांची के जानेमाने चिकित्सक हैं. इन्होंने एमबीबीएस और पीजीएमडी की पढ़ाई रांची के आरएमसीएच से पूरा किया. चार साल तक रिम्स के डिपार्टमेंट ऑफ रेडियोलॉजी में सीनियर रेजीडेंट के पद पर अपना योगदान दिया. डॉ अजीत सिंह मुंडा से न्यूज विंग संवादादत सौरभ शुक्ला ने की खास बातचीत.

सवाल: अपना परिचय दें.

 जवाब : मेरा नाम डॉ अजीत सिंह मुंडा है. मैंने एमबीबीएस की पढ़ाई 2006 में राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड हॉस्पिटल से किया. उसके बाद एमडी इन रेडियो डायग्नोसिस की पढ़ाई भी रांची के आरएमसीएच से 2007 में पूरा किया. 2008 से 2012 तक बतौर सीनियर रेजीडेंट के पद पर रिम्स के डिपार्टमेंट ऑफ रेडियोलोजी में अपना योगदान दिया. अभी मैं मेदांतासेंटेविटा और संत बरनवास अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं.

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 सवाल: रेडियोलॉजी किसे कहते हैं

 जवाब: रेडियोलॉजी एक्स-रे,  अल्ट्रासाउंड,  सीटी स्कैनएमआरआई को कह सकते हैं. इसके अलावा न्यूक्लियर मेडिसिन को भी शामिल कर सकते हैं. वर्तमान में इंटरवेंशन रेडियोलॉजीएफएनएससी, बएप्सी भी रेडियोलॉजी का ही हिस्सा है.

सवाल : मेडिकल साइंस में अत्याधुनिक मशीनों के आ जाने से लोगों को कितना फायदा हुआ.

जवाब : अत्याधुनिक मशीनों के आ जाने से चिकित्सकों और मरीज दोनों को फायदा हुआ है. पहले क्लीनिकल बेस्ड ट्रीटमेंट किया जाता था. जैसे पेट में दर्द है तो स्टेथेस्कोप के द्वारा पता लगाया जाता थालेकिन वर्तमान समय में इतने अत्याधुनिक मशीनें आ गई है कि आप पूरी तरह से बीमारी का पता कर सकते हैं. इससे मरीजों को फायदा हो रहा है.

सवाल : एमआरआई की क्या विशेषता है. इससे कौन-कौन सी बीमारियों का पता लगाया जा सकता है.

 जवाब : एमआरआई नॉन आयोनाइज्ड पार्ट है. जैसे एक्स-रे और सीटी स्कैन में रेडिएशन होता है. एमआरआई में मैग्नेटिक फील्ड के अंदर शरीर का आयन है. इसमें साउंड वेव फ्रीक्वेंसी के माध्यम से इमेज कैलकुलेट होता है. उससे डायग्नोसिस करते हैं. इसका फायदा है कि मरीज आयोनाइज्ड होने से बच जाते हैं. शरीर के अंदर किस प्रकार का रेडिएशन नहीं जाता है. इसमें सॉफ्ट टिश्यू बहुत अच्छे से दिखता है.

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सवाल : रेडियोलॉजी के विशेषज्ञ होने के नाते अब तक का अत्याधुनिक मशीन आप किसे मानते हैं.

जवाब : पिछले 20-30 साल में बहुत से बदलाव देखने को मिले हैं. पहले एक्स-रे होता था, अब विज्ञान एक्स-रे से न्यूक्लियर इमेजिन तक पहुंच गया है. वैसे तो अत्याधुनिक मशीनों की सूची में सीटी स्कैनएमआरआई के बहुत से वेरिएशन है. सिंगल स्लाइस से लेकर 500 स्लाइस तक है. न्यूक्लियर इमेजिंन जैसी मशीनों का भी इजाद मेडिकल साइंस की दुनिया में हुआ है.

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सवाल : बतौर चिकित्सक आपके द्वारा किया गया इलाज जो आपके जहन में अब तक है.

जवाब : मैंने अपने कार्यकाल के दौरान कई लोगों का इलाज किया है. एक 13 साल की लड़की रिम्स में आई हुई थी. उसके शरीर में डायग्नोसिस नहीं हो पा रहा था, क्योंकि उसके एब्डोमेन में छोटे-छोटे सिस्ट बने हुए थे. ये किस कारण से हुआ पता नहीं चल पा रहा था. शुरुआत में बच्ची का अल्ट्रासाउंड किया तो शरीर में छोटा-छोटा पानी की थैली दिखाई दे रही थी. जब हम लोगों ने सीटी स्कैन किया तो सिर्फ किडनी छोड़कर बाकी ऑरगन में सिस्ट बने हुए थे. उस बच्ची का हमलोगों ने इलाज किया और बच्ची ने बहुत जल्द रिकवर किया. यह हमारे लिए एक यादगार पल है.

सवाल : समाज के लोगों को क्या संदेश देंगे.

जवाब : रेडियोलॉजी का टेस्ट काफी महंगा होता है. मैं यही कहना चाहूंगा कि सरकार या कंपनी के माध्यम से ऐसे जांच का शुल्क कम हो ताकि गरीब तबके के लोगों को फायदा मिल सके.

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