कोर्ट में गवाही देने आए थे एडीजी एमवी राव, सरकार ने आदेश जारी कर कहा- अनुमति लेकर झारखंड आएं

Publisher NEWSWING DatePublished Tue, 02/13/2018 - 21:00

Ranchi : झारखंड का ब्यूरोक्रेसी इन दिनों नए-नए कीर्तिमान स्थापित करने में जुटा है. ताजा मामला एडीजी एमवी राव से जुड़ा हुआ है. गृह विभाग ने मंगलवार को एक आदेश जारी किया है, जिसमें एमवी राव से कहा गया है कि वह झारखंड आने से पहले अनुमति लें, फिर झारखंड आएं. इस आदेश ने ब्यूरोक्रेसी और सरकार के कामकाज को लेकर नई बहस छेड़ दी है.

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गुमला कोर्ट में गवाही देने आये थे एमवी राव

दरअसल, पलामू के बकोरिया में हुई कथित मुठभेड़ की जांच तेज करने के बाद दिसंबर माह में सरकार ने उनका तबादला दिल्ली स्थित झारखंड भवन में कर दिया था, जिसके बाद से वह दिल्ली में ही रह रहे हैं. एमवी राव झारखंड में कई जिलों में एसपी रह चुके हैं. गुमला में दर्ज एक नक्सली मामले में 12 फरवरी को उनकी गवाही दर्ज होनी थी. जानकारी के मुताबिक कोर्ट के निर्देश पर श्री राव ने झारखंड पुलिस मुख्यालय को रांची आने, फिर गवाही देने गुमला जाने की जानकारी दी. साथ ही रहने व वाहन की व्यवस्था करने का आग्रह किया था. पुलिस मुख्यालय ने यह व्यवस्था की भी, लेकिन इसी बीच आज उन्हें एक पत्र दिया गया, जिसमें झारखंड आने से पहले अनुमति लेने की बात कही गयी है.

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आदेश की जरूरत क्यों पड़ी ?

एडीजी एमवी राव को लेकर गृह विभाग को इस तरह का आदेश निकालने की जरूरत क्यों पड़ी ? जब भी कोई सरकारी सेवक अपने पदस्थापन स्थान से दूसरे शहर या राज्य में जाते हैं, तो इसकी सूचना अपने मुख्यालय को देना पड़ती है. ऐसा नहीं करना नियम के विरूद्ध है. एमवी राव भी सूचना देकर ही दिल्ली से रांची आये थे. फिर इस तरह का आदेश निकालने की वजह लोगों को समझ में नहीं आ रहा है. जब नियम पहले से ही बना हुआ है, तो एमवी राव के  लिए अलग से आदेश निकालने का मतलब लोग समझ नहीं पा रहे हैं.  एक तथ्य यह भी है कि अगर कोई सरकारी सेवक अवकाश में है, तब वह आम आदमी की हैसियत से देश में कहीं भी आ-जा सकता है. क्या सरकार एक आदेश मात्र निकाल कर किसी को भी कहीं जाने आने से रोक सकती है. क्या संविधान इसकी इजाजत देता है ?  इन सबसे परे एक सवाल यह भी उठता है कि आखिर एडीजी एमवी राव के झारखंड में होने से परेशानी किसको है ? किसको खतरा है ? कौन डरता है ? और क्यों ? इन सवालों का जवाब लोग भी जानना चाहते हैं. उल्लखनीय है कि तबादले के बाद एमवी राव ने सरकार को एक पत्र लिखा था, जिसमें कहा था कि डीजीपी डीके पांडेय ने बकोरिया कांड मकी जांच धीमी करने के लिए दबाव डाला था. साथ ही यह भी लिखा था कि कैसे इस मामले में सही तरीके से जांच नहीं की गयी और जब उन्होंने जांच तेज की, तब उनका तबादला करा दिया गया. 

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