PNB के बाद अब कानपुर में 5,000 करोड़ का घोटाला

Publisher NEWSWING DatePublished Sat, 02/17/2018 - 20:56

Kanpur : पीएनबी के लगभग 11300 करोड़ के घोटाले से बैंकिंग सेक्टर उबर भी नहीं पाया कि कानपुर में लगभग 5000 करोड़ का एक और बैंकिंग घोटाला सामने आ गया है. इस बैंकिंग घोटाले के तार कानपुर के उद्योगपति विक्रम कोठारी से जुड़े हैं. रोटोमैक ग्लोबल कंपनी के मालिक विक्रम कोठरी इस समय कहां हैं, किसी को इसकी जानकारी नहीं है. नियमों को ताक पर रखकर कोठारी की कंपनियों को लोन देने वाली राष्ट्रीयकृत बैंकों में हड़कंप मच गया है.

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रोटोमैक कंपनी के मालिक विक्रम कोठारी ने बैंक को लगाया चूना

राष्ट्रीयकृत बैंकों द्वारा देश की जनता की गाढ़ी कमाई घोटालेबाज पूजीपतियों पर लुटाने की करतूतें एक एक करके सामने आने लगी हैं. ताजा खुलासा कानपुर के एक प्रतिष्ठित उद्योगपति परिवार का हिस्सा रहे विक्रम कोठारी से जुड़ा है. पान पराग समूह में पारिवारिक बंटवारे के बाद विक्रम कोठारी के हिस्से में रोटोमैक कम्पनी आई थी और इसके विस्तार के लिए उसने सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकों से 5 हजार करोड़ से अधिक के ऋण लिए. विक्रम के रसूख के चलते बैंकों ने उसे खैरात की तरह लोन बांटे.

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कंपनी पर लग चुका है ताला

कागजों में विक्रम की संपत्तियों का अधिमूल्यन किया गया. सर्वे में दिवगंत पिता मनसुख भाई कोठारी की साख को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी गयी. देश के बड़े राजनेताओं के साथ रिश्तों और बॉलीवुड की मशहूर हस्तियों के ब्रांड एम्बेसडर होने से बैंक प्रबंधन ने भी आंखें मूंद ली और कंपनी के घाटे को नजरअन्दाज करके ऋण की रकम को हजारों करोड़ में पहुंचने दिया. अब विक्रम की कंपनी में ताला लग चुका है और उनका कहीं कोई अता-पता नहीं है.

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5 बैंकों से करोड़ों का घोटाला

अब तक विक्रम कोठारी को ऋण देने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के 5 बैंकों के नाम सामने आ चुके हैं. इंडियन ओवरसीज बैंक ने 1400 करोड़, बैंक ऑफ इंडिया ने 1395 करोड़, बैंक ऑफ बड़ौदा ने 600 करोड़, यूनियन बैंक ने 485 करोड़ और इलाहाबाद बैंक ने 352 करोड़ का लोन दिया था.

कौन है विक्रम कोठारी?

बैंकिंग सेक्टर का नंगा सच सामने लाने वाले इस महाघोटाले पर आगे बढ़ने से पहले बता दें कि कौन है ये विक्रम कोठारी और क्या है उसका रसूख. विक्रम कोठारी का नाता पान पराग समूह से रहा है. पान मसालों का सरताज रहा यह ब्रांड गुजराती परिवार से ताल्लुक रखने वाले मनसुख भाई कोठरी ने 18 अगस्त 1973 को शुरू किया था. सन् 1983 से 1987 के बीच ‘‘पान पराग’’ विज्ञापन देने वाली सबसे बड़ी कंपनी बन गयी. मनसुख भाई के निधन के बाद उनके बेटों दीपक और विक्रम ने बिजनेस को आपस में बांट लिया गया. विक्रम के हिस्से में पेन बनाने वाली कंपनी रोटोमैक आयी. एक समय ऐसा भी था जब कंपनी अपना सुनहरा समय बिता रही थी.

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