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सोशल मीडिया पर हो रही यह खबर वायरल- 1030 करोड़ की ठगी, अमित शाह, जेटली व केतन पारीख

- 1030 करोड़ के घोटाले में अमित शाह की संलिप्तता को लेकर एडीजी ने की थी CBI जांच की अनुशंसा, सरकार ने नहीं की कोई कार्रवाई

गुजरात में मोदी सरकार ने अमित शाह के खिलाफ सीबीआई जांच की अनुशंसा को सालों तक दबाये रखा. मामले का खुलासा द हिन्दू ने 08 नवम्बर 2016 को किया था. यह खबर सोशल मीडिया पर अभी खूब वायरल हो रही है. बेटे जय शाह के कारोबार में 16 हजार गुना वृद्धि के बाद अमित शाह लगातर घिरते जा रहे हैं.

क्या था मामला

1 अगस्त, 2005 को, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, सीआईडी ​​कुलदीप शर्मा ने गुजरात सरकार के मुख्य सचिव सुधीर मंकड़ को 3 पृष्ठ की रिपोर्ट भेजी  थी. उसमें शाह की घोटाले में संलिप्ता को लेकर सीबीआई जांच की सिफारिश की गई थी. रिपोर्ट पर तो कोई कार्रवाई नहीं हुई थी, मगर शर्मा को सीआईडी ​​से बहुत जल्द हटा दिया गया. आज  वे गुजरात भेड़ एवं ऊन विकास निगम (जीएसडब्ल्यूडीसी) के प्रबंध निदेशक के रूप में सेवारत हैं.

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अमित शाह को 2.5 करोड़ रुपये रिश्वत दी

CID ने मामले में जांच की शुरुआत तब की जब अहमदाबाद के हसमुख शाह ने लिखित शिकायत दर्ज करायी. उसमें कहा गया कि पारीख ने जेल से निकलने के किये अमित शाह को 2.5 करोड़ रुपये रिश्वत दी.

2001 में गांधीनगर के माधवपुरा बैंक में 1,030 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी मामले में सीबीआई ने पारीख को अभियुक्त बनाया था. और वे इस शर्त पर रिहा हुए थे कि तीन साल के भीतर 380 करोड़ रुपये वापस बैंक में जमा कर देंगे. 2003 में बैंक ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अर्जी दाखिल की कि पारीख का बेल रद्द किया जाये.

सीआईडी की रिपोर्ट में शाह की मिलीभगत का जिक्र

अपनी रिपोर्ट में सीआईडी ने बताया कि बैंक के निदेशक अमित शाह ने 31 अगस्त 2004 को डीजीपी और बैंक अधिकारियों के साथ बैठक की. उसमें उन्होंने कहा था कि केतन पारीख ने रुपये (380 करोड़) वापस नहीं चुकाये. इसलिए उनकी जमानत रद्द की जानी चाहिए. 

अक्टूबर 2004 के पहले सप्ताह में  सीआईडी ​​ने बताया कि गिरीश दाणी नामक एक राजनीतिक दलाल ने शाह और पारीख की मीटिंग फिक्स कराई है.

इसके तुरंत बाद  सुप्रीम कोर्ट से पारीख की जमानत रद्द करने संबंधी अर्जी बैंक द्वारा वापस ले ली गयी. इसके बाद पारीख जेल से बेखौफ होकर बाहर ही रहे.

CID को था शक,  शाह करा सकते हैं जांच प्रक्रिया प्रभावित 

अपनी रिपोर्ट में सीआईडी ​​ने कहा कि इस घटना के बाद दानी, पारीख और शाह लगातार संपर्क में रहे. फोन कॉल डिटेल्स इसकी पुष्टि करते हैं. रिपोर्ट में कहा गया कि चूंकि अमित शाह सरकार में एक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं इसलिए उनकी भूमिका की पड़ताल के लिए केन्द्रीय जांच एजेंसी सीबीआई से जांच की अनुशंसा की गई.

 CID के एडीजी ने CBI जांच की अनुशंसा की थी. मगर इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गयी. इस तरह हजार करोड़ के घोटाले में अमित शाह की संलिप्ता की फाइल कई सालों तक दबी रह गयी.

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