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बिरसा की 150 फीट उंची प्रतिमा के प्रारुप का लोकार्पण कार्यक्रम में राज्यपाल ने कहा, जल, जंगल व जमीन की रक्षा जरुरी

राज्यपाल ने भगवान बिरसा मुंडा की 150 फीट उंची प्रतिमा के प्रारुप का अनावरण किया

NEWS WING

Ranchi, 13 November:  सरकार को अपने मॉडल ग्राम बनाने की योजना की शुरुआत धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा के गांव करनी चाहिए. सबसे पहले राज्य के वीर सपूत के गांव को ही संवारने की जरुरत है. यब बात राज्यपाल द्रोपदी मुर्म ने भगवान बिरसा मुंडा की 150 फीट उंची प्रतिमा के प्रारुप का अनावरण करते हुए कही. उलगुलान फाउंडेशन के द्वारा आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि लोगों को संबोधित कर रहीं थीं. उन्होंने कहा कि यहां स्टेशन, सड़क, विवि समेत अन्य कई स्थानों का नाम भगवान बिरसा मुंडा के नाम पर रखा गया है. लेकिन उन्हीं के गांव और उन्हीं के वंशज आज सुरक्षित नहीं है. हम सभी को भगवान बिरसा मुंडा के जीवन से प्रेरणा लेते हुए अपनी जल, जंगल, जमीन, परंपरा एवं संस्कृति की रक्षा करनी चाहिए. राज्यपाल का यह बयान एेसे वक्त में आया है, जब आदिवासी संगठनों के द्वारा सरकार पर यह आरोप लगाये जा रहें हैं कि वह आदिवासियों की परंपरा व संस्कृति को खत्म करना चाहती है.
कार्यक्रम में राज्यपाल ने आगे कहा कि भगवान बिरसा ने किस प्रकार अपनी विरता दिखाते हुए अपने हक की लड़ाई लड़ी और वीरगती को प्राप्त हुए. यह हमारे लिए प्रेरणा का श्रोत है. राज्यपाल श्रीमती मुर्मू ने बताया कि एक पुस्तक पढ़ने के बाद उन्हें बिरसा मुंडा के बारे में और अधिक जानने की इच्छा हुई. तब वह भगवान बिरसा मुंडा के गांव गयी. जहां जाकर यह सोचने पर विवश हो गई, क्या यहीं वीर सपूत ने जन्म लिया था और क्या वहां रह रहे लोग ही उनके वंशज हैं. श्रीमती मुर्मू ने कहा कि वर्तमान समय में लोगों को शिक्षित होने क आवश्यकता है. कई लोग ऐसे है जिन्हें उनका मौलिक अधिकार भी नहीं पता है और जिस वजह से लगातार वे  शोषण का शिकार हो रहे है. उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को अपना इतिहास जानने में यह प्रतिमा सहायता करेगी. गौरतलब हो कि 15 नवंबर 2016 को आजसू प्रमुख सुदेश महतो ने धरती आबा की 150 फिट उंची प्रतिमा लगाने की घोषणा की थी. इसका निर्माण बुंडू स्थित सूर्य मंदिर के समीप प्रधान नगर में कराया जायेगा. कार्यक्रम में धरती आबा के वंशज सुखराम मुंडा, पद्मश्री सिमोन उरांव, पद्मश्री मुकुंद नायक, विधायक विकास मुंडा, रामचंद्र सईस, डॉ. देवशरण भगत समेत फांउडेशन के अन्य सदस्य मौजूद थे.

अस्मिता को सुरक्षित रखने में स्वंय को समर्पित किया : सुदेश

आजसू प्रमुख सुदेश महतो ने कार्यक्रम में कहा कि भगवान बिरसा मुंडा का जीवन प्रेरणा से ओत-प्रोत है. बाल्यवस्था से लेकर अंतिम सांस तक धरती आबा ने दूसरों के लिए जीया. लोगों को संगठित कर एक उलगुलान की नींव डाली.  जिससे हमारी जल, जंगल और जमीन की रक्षा हो सका. आज इस राज्य के लोगों में वैचारिक अंतर नजर आ रहा है. असहज वातावरण में लोग खुद को असुरक्षित महसुस कर रहे हैं. इन्हीं सब समस्याओं को दूर करने एवं राज्य को लोगों को अपना इतिहास बताने के उद्देश्य से इसकी परिकल्पना की गई. 21वीं सदीं के युवा पीढ़ी को जोड़ कर रखने के लिए उन्हें अपने इतिहास को जानना बेहद जरुरी है.  

भगवान बिरसा मुंडा का इतिहास जानना जरुरीः सुखराम मुंडा

भगवान बिरसा मुंडा के वंशज सुखराम मुंडा ने कहा कि लोग उस वक्त त्राही-त्राही कर रहे थे. इसी वजह से भगवान बिरसा मुंडा ने उलगुलान खड़ा किया. उन्होंने सभी क्षेत्रों को भ्रमण कर लोगों को संगठित किया. उनके इतिहास कोे संरक्षित करने की जरुरत है. ताकि युवा पीढ़ी अपने इतिहास से परिचित हो सके.

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