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जजों को रिश्वत देने का मामला : SIT जांच की मांग खारिज

News Wing

Jaipur, 14 November : सुप्रीम कोर्ट ने जजों के नाम पर रिश्वत मांगने के मामले में एसआईटी जांच की मांग वाली याचिका आज खारिज कर दी. अदालत ने कहा कि इस तरह की याचिका ने न्यायाधीशों की ईमानदारी पर अनावश्यक संदेह पैदा किया है.



उच्चतम न्यायालय ने वकील कामिनी जायसवाल की याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया कि सीबीआई की प्राथमिकी किसी न्यायाधीश के खिलाफ नहीं है और किसी न्यायाधीश के खिलाफ इस तरह की शिकायत दर्ज करना भी संभव नहीं है. बहरहाल, इसने जायसवाल के खिलाफ मानहानि नोटिस जारी नहीं किया.

ईमानदारी पर अनावश्यक संदेह पैदा किया गया

न्यायमूर्ति आर के अग्रवाल, न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा और न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर की पीठ ने मामले में एक न्यायाधीश को सुनवाई से हटाने के लिए प्रयास करने पर भी प्रतिकूल टिप्पणी की. कहा कि यह उचित नहीं है. जायसवाल ने वरिष्ठ वकील शांति भूषण और प्रशांत भूषण के माध्यम से मामले में न्यायमूर्ति खानविलकर के हटने की मांग की थी. खानविलकर ने खुद को मामले से हटाने से इंकार कर दिया था.

पीठ ने कहा कि ‘‘इस तरह की याचिका दायर कर संस्थान को नुकसान पहुंचाया गया है और इसकी ईमानदारी पर अनावश्यक संदेह पैदा किया गया है.’’ याचिका में दावा किया गया था कि मेडिकल कॉलेजों से जुड़े मामलों के निपटारे के लिए कथित तौर पर रिश्वत लेने के आरोप लगाए गए थे. इसमें ओडिशा उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश इशरत मसरूर कुदुशी भी आरोपी हैं.

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