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जमशेदपुर के युवा कास्टिंग डायरेक्टर अंशुमन लेखन की दुनिया में भी, जल्द आएगी 'योर ओन थॉट' किताब

News Wing

Ranchi, 06 November : जमशेदपुर के 21 साल के अंशुमन भगत कास्टिंग निर्देशक और लेखक के रूप में अपनी पहचान बना रहे हैं. अंशुमन भगत झारखंड के जमशेदपुर रहने वाले हैं. युवा उम्र में ही कुछ नया और अलग करने की चाहत में वे मुंबई चले गए. मुम्बई में उन्होंने टीवी कास्टिंग फील्ड से जुड़कर कास्टिंग एजेंसी खोली. और मुंबई के बहुत सारे कलाकारों को बड़े-बड़े टीवी चैनल्स के लिए कास्ट किया. इससे पहले केएसएमएस जमशेदपुर से अंशुमन ने पढ़ाई पूरी की. 

वेब सीरिज़ शॉर्ट फिल्मों के डायरेक्टर के रूप में काम कर चुके हैं अंशुमन भगत 

अंशुमन ने कास्टिंग के साथसाथ अपना कैरियर वेब डिजाईन में भी शूरू किया. अंशुमन को बॉलीवुड और टीवी इंस्टीट्यूट का भी काफी अनुभव है. उन्होंने बहुत से टीवी शो में फ्रीलान्स काम भी किया है. जैसे सावधान इंडिया, क्राइम पेट्रोल, डेली शो ब्रह्मराक्षस, ये हैं मोहब्बतें, परमअवतार श्री कृष्णा, और जल्द ही आने बाल कलर्स का शो डिटेक्टिव देवानंद बारमैन. इसके अलावा इन्होंने बहुत से एल्बम, वेब सीरिज़ शॉर्ट फिल्मों में डायरेक्शन भी किया है. अंशुमन भगत का पसंदीदा खेल शतरंज है और वीडियो गेम खेलना, न्यूज़ पेपर पढ़ना उन्हें काफी पसंद है.

मुकेश छाबरा से प्रेरित होकर अपने करियर की शुरुआत की अंशुमन ने

मुकेश छाबरा से प्रेरित होकर उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की और अभी अंशुमन मुंबई में कास्टिंग डायरेक्टर के रूप में काम कर रहे हैं. कास्टिंग करियर में आगे और भी अच्छा करने के साथसाथ उन्होंने एक किताब लिखनी शुरू की है. इसका शीर्षक "योर ओन थॉट" है. इस किताब में समाज और समाज से जुड़ी वास्तविकता के बारे में लिखा गया है. इस किताब को बहुत जल्द प्रकाशित किया जाएगा.

अंशुमन भगत के पिता रिफ्यूजी कॉलोनी (साक्ची) जमशेदपुर में रहने वाले एक ट्रांसपोर्टर हैं. उनकी मां एक गृहिणी हैं. दो भाई विजय और अरुण हैं जो जमशेदपुर में ही अपनी पढ़ाई कर रहे हैं.

योर ओन थॉट पुस्तक में समाज, दुनिया और हमारी दैनिक सोच-व्यवहार से जुड़ी कई बातें को समाहित किया जा रहा है. उनमें से कुछ मुद्दों को अंशुमन ने शेयर किया है;

1. "वास्तविकता"

इस संसार में मानव एकमात्र प्राणी है जिसकी वास्तविकता समझना मुश्किल है. यह समझना उचित नहीं है कि दुनिया में मौजूद सभी घटक एक-दूसरे की वास्तविकता को प्रतिबिंबित करते हैं. किसी इंसान की वास्तविकता हमारे जीवन में होने वाली घटनाओं से होती है या भविष्य पर निर्भर करती है. आम तौर पर देखा जाए तो इसे पूरी तरह समझा नहीं जा सकता क्योंकि यह समय-समय पर बदल रहा है.

2. "सफलता"

सफलता का अर्थ केवल बड़े नाम बनाने और बड़ा पैसा बनाने से नहीं होता है, अपितु खुद के प्रति लोगों में विश्वास और सम्मान होने से होता है. आज के इस युग में सफल उन्हें नहीं माना जा सकता जो सिर्फ अपने नाम और काम के लिए जाने जाते हैं. वो भले ही देश के प्रधानमंत्री हों या एक बहुत बड़ा उद्योगपति, जब तक उनके लिए समाज में विश्वास और सम्मान न हो तब तक उनके लिए ऐसी पहचान बनाना व्यर्थ है. इसके माध्यम से वे समाज में जाने जाते हैं.

3. "भेदभाव"

भेदभाव की शुरुआत जाति और धर्म के निर्माण से ही होती है. देशों में सरकार द्वारा बनाए गए नियम केवल नाम मात्र के लिए रह गये हैं. जातपात से संबंधित कई ऐसे नियम-कानून आज भी हैं जो सिर्फ भारत देश में ही नहीं बल्कि कई देशों के लोगों में भेदभाव के विचार उत्पन्न करती हैं. इसके कारण आज भी लोग एक-दूसरे के बीच जात-पात को लेकर आपस में दंगे फसाद करते हैं.

4. "समय की महत्ता"

किसी भी जीव-जंतु के समय की शुरुआत उसके जन्म से ही हो जाती है. हमारे जीवन में समय की महत्ता काफी है क्योंकि जीवन में किसी भी प्राणी के जन्म के साथ-साथ उसकी मृत्यु भी निश्चित होती है. यह किसी को ज्ञात नहीं होता. इसी वजह से हमें अपनी चाह और आवश्यकताओं को जीवनकाल के अंदर ही पूरी कर लेनी चाहिए. अन्यथा समय किसी के लिए नहीं रुकता और ना ही किसी का मोहताज होता है. इसलिए कहा जाता है कि समय की बर्बादी मतलब पैसे और जीवन दोनों की बर्बादी.

5. "भगवान का अर्थ"

मनुष्य ने अपने अपने धर्म और जात से संबंधित कई भगवान का निर्माण किया है. इसके कारण आज समाज में पूजा पाठ से संबंधित अंधविश्वास फैले हुए हैं. जब किसी के घर में कोई बच्चा बीमार पड़ता है तो उसे डॉक्टर या अस्पताल ले जाने के बजाए उसे मंदिरों में ले जाया जाता है. जहां मनुष्य के द्वारा बनाई गई काल्पनिक मूर्तियों अथवा प्रतिमाओं की पूजा की जाती है. अगर वास्तविकता देखी जाये तो भगवान शब्द एक ऐसी सकारात्मक शक्ति है जिससे लोगों के मन में डर पैदा होता है. इसी शक्ति ने संसार में उत्पात मचाई है. इसलिए हमें भगवान की आराधना केवल शांति प्राप्त करने और सच्चाई को समझने के लिए करनी चाहिए ना कि लोगों में अंधविश्वास फैलाने के लिए.

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