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आरुषि हत्याकांडः इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राजेश-नूपुर तलवार किया बरी

News Wing

Allahabad, 12October: नोएडा के बहुचर्चित आरुषि-हेमराज हत्याकांड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को अपना अहम फैसला सुनाते हुए राजेश और नूपुर तलवार को मामले में बरी कर दिया है. इस मामले में न्यायमूर्ति बीके नारायण और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार मिश्र की खंडपीठ ने दोपहर करीब तीन बजे अपना फैसला सुनाते हुए दोनों को दोषी नहीं माना. दोनों फिलहाल डासना जेल में बंद हैं, जहां से उन्‍हें रिहा किया जाएगा.

तलवार दंपति ने सीबीआई कोर्ट फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी

उन्होंने गाजियाबाद सीबीआई कोर्ट के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. तलवार दंपति की याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में सितंबर 2016 से सुनवाई चल रही थी. 11 जनवरी 2017 को इस इस मामले में सुनवाई पूरी हो चुकी है. हाईकोर्ट ने केस में 12 अक्तूबर 2017 को फैसला सुनाने की तिथि निर्धारित की थी.

15 मई 2008 को हुई थी हत्या

बता दें कि आरुषि व हेमराज की हत्या 15 मई 2008 की रात सेक्टर-25 जलवायु विहार स्थित घर में हुई थी. 16 मई की सुबह आरुषि का खून से लथपथ शव उसके कमरे में बिस्तर पर पड़ा मिला था. वहीं नौकर हेमराज का शव मकान की छत से अगले दिन बरामद हुआ था.

2008 में हुए आरुषि-हेमराज हत्याकांड का घटनाक्रम इस प्रकार रहा

16 मई 2008 : आरुषि तलवार अपने बेडरूम में मृत पाई गई। हत्या का शक घरेलू सहायक हेमराज पर 17

मई 2008 : हेमराज का शव उस इमारत की छत पर पाया गया जिसमें तलवार का फ्लैट है.

19 मई 2008 : तलवार के पूर्व घरेलू सहायक विष्णु शर्मा को संदिग्ध माना गया.

23 मई : आरुषि के पिता राजेश तलवार को मुख्य आरोपी बताकर गिरफ्तार किया गया.

01 जून : मामले की जांच सीबीआई ने अपने हाथों में ली.

13 जून : सीबीआई ने तलवार के घरेलू सहायक कृष्णा को गिरफ्तार किया.

26 जून : सीबीआई ने मामले को सुराग विहीन बताया. गाजियाबाद के विशेष मेजिस्ट्रेट ने राजेश तलवार को जमानत देने से इनकार कर दिया.

12 जुलाई : राजेश तलवार को जमानत दी गई.

29 दिसंबर: सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट जमा की, जिसमें घरेलू सहायकों को क्लीन चीट दिया गया लेकिन माता-पिता की तरफ ऊंगली उठाई.

9 फरवरी, 2011: अदालत ने सीबीआई रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए कहा कि वह आरुषि के माता-पिता पर लगाए गए हत्या और सबूत मिटाने के अभियोजन के आरोप को लेकर मामला जारी रखें.

21 फरवरी: तलवार दंपत्ति ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय से निचली अदालत द्वारा जारी किए गए सम्मन को खारिज करने के लिए संपर्क किया.

18 मार्च: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी.

नवंबर, 2013: राजेश और नुपूर तलवार को दोहरी हत्या का दोषी करार देते हुए सीबीआई की एक विशेष अदालत ने गाजियाबाद में उन दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई.

सात सितंबर, 2017: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की पीठ ने माता-पिता की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा और 12 अक्तूबर को फैसले की तारीख दी.

12 अक्तूबर, 2017: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आरुषि के माता-पिता को बरी किया.

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