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राजभवनों में मूल्यों और आदर्शों के स्थापित होने से समाज के लोग लेंगे प्रेरणा: राष्ट्रपति

News Wing

New Delhi, 12 October: राष्ट्रपति भवन में आयोजित राज्यपालों के 48वें सम्मेलन को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आज कहा कि सहकारी संघवाद के परिप्रेक्ष्य में राज्यपालों का संवैधानिक दायित्व है जो केंद्र एवं राज्यों के बीच सेतु की महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, ऐसे में राजभवनों में मूल्यों एवं आदर्शो के स्थापित होने से समाज के लोग प्रेरणा लेंगे.

भ्रष्टाचार, गरीबी, अशिक्षा और अस्वच्छता के लिए नहीं होगा स्थान

उन्होंने कहा कि साल 2022 में आज़ादी के 75 वर्ष पूरे होने के संदर्भ में कुछ महत्वपूर्ण संकल्प इस सम्मेलन में तय किये जा रहे हैं. 2017 से 2022 की अवधि 'न्यू इंडिया' के निर्माण के लिए हैं, जहां भ्रष्टाचार, गरीबी, अशिक्षा और अस्वच्छता के लिए स्थान नहीं होना चाहिए.

एक दिशा में बढ़े भारत

राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे में राष्ट्रीय लक्ष्यों को निश्चित समय सीमा में प्राप्त करने के लिए 'टीम इंडिया' एक ही दिशा में आगे बढ़े.  कोविंद ने कहा कि सहकारी संघवाद के परिप्रेक्ष्य में राज्यपालों का संवैधानिक दायित्व है जो केंद्र एवं राज्यों के बीच सेतु की महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, ऐसे में जनता की निगाहें राजभवन पर टिकी रहती हैं. राजभवनों में मूल्यों और आदर्शों के स्थापित होने से समाज के लोग प्रेरणा लेंगे.

हर राज्य का विकसित होना जरुरी

राष्ट्रपति ने कहा कि वे आशा करते हैं कि इस सम्मेलन में केंद्र-राज्य मिल कर देशवासियों के हित में, विशेषकर युवाओं के हित में एकमत होकर दिशा तय करने का काम करेंगे. उन्होंने कहा कि जब प्रत्येक राज्य विकसित होगा तभी भारत को एक विकसित राष्ट्र के रूप में देखने की कल्पना साकार होगी. ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते हुए उपयोग के संदर्भ में हमें युवाओं के लिए नए अवसर तलाशने होंगे.

आदिवासी क्षेत्रों पर ध्यान देने की जरुरत

उन्होंने कहा कि संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूचियों में शामिल आदिवासी क्षेत्रों के विकास पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है.

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