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बैंकिंग क्षेत्र की क्षमता के पुनर्निर्माण पर काम कर रही सरकार: जेटली

News Wing

Washington, 12 October:  वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कहा है कि भारत सरकार बैंकिंग क्षेत्र की क्षमता के पुनर्निर्माण की योजना पर काम कर रही है ताकि यह विकास में योगदान दे सके.

जेटली अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक की सालाना बैठकों में शामिल होने के लिए हफ्तेभर के अमेरिकी दौरे पर हैं. उन्होंने यह भी कहा कि बैंकिंग प्रणाली में सुधार सरकार का शीर्ष एजेंडा है.

निजी क्षेत्र का विस्तार नहीं होने की धारणा को किया खारिज

बोस्टन में हार्वर्ड विश्वविद्यालय के छात्रों से जेटली ने कहा कि आज वैश्विक विकास की दिशा बदल गई है, ऐसे में हम बैंकिंग से संबंधित हालात से निबटने के लिए वास्तविक योजना को अमल में लाने पर काम कर रहे हैं. हमें बैंकिंग क्षेत्र की क्षमता का पुनर्निर्माण करना होगा. एक सवाल के जवाब में जेटली ने निजी क्षेत्र का विस्तार नहीं होने संबंधी धारणा को खारिज किया.

रियल एस्टेट को जीएसटी के दायरे में लाने पर दो मत

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि अगली जीएसटी परिषद की बैठक में हम इस समस्या पर कम से कम चर्चा तो करेंगे ही. कुछ राज्य रियल एस्टेट को जीएसटी के दायरे में लाना चाहते हैं और कुछ नहीं. यह दो मत हैं और चर्चा करने के बाद हमारी कोशिश होगी कि एक मत पर सहमति बनायी जाए. उन्होंने कहा कि इसका लाभ उपभोक्ताओं को होगा जिन्हें पूरे उत्पाद पर केवल अंतिम कर देना होगा और जीएसटी के तहत यह अंतिम कर लगभग नगण्य होगा. उन्होंने कहा कि कर दायरे के तहत लोगों को लाने के लिए दी जाने वाली छूट और अंतिम व्यय में कमी किए जाने से कालेधन से चलने वाली ‘छद्म अर्थव्यवस्था’ का आकार घटाने में भी मदद होगी.

12 प्रतिशत लगाया गया जीएसटी

किसी परिसर, इमारत और सामुदायिक ढांचे के निर्माण पर या किसी एक खरीदार को इसे पूरा या हिस्से में बेचने पर 12% जीएसटी लगाया गया है. हालांकि भूमि एवं अन्य अचल संपत्तियों को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है.

नोटबंदी एक बुनियादी सुधार

नोटबंदी पर जेटली ने कहा कि यह एक ‘बुनियादी सुधार’ है जो भारत को एक और अधिक कर चुकाने वाले समाज के तौर पर बदलने के लिए जरुरी था. उन्होंने कहा कि यदि आप इसके दीर्घकालिक प्रभाव को देखें तो नोटबंदी से डिजिटल लेनदेन बढ़ा और यह मुद्दा विमर्श के केंद्र में आया. इसने व्यक्तिगत कर आधार को बढ़ाया है. इसने नकद मुद्रा को तीन प्रतिशत तक कम किया जो बाजार में चलन में थी. जेटली ने कहा, जिन कदमों के दीर्घावधि लक्ष्य होते हैं, इस बात में कोई शक नहीं कि उसमें लघु अवधि की चुनौतियां होंगी ही, लेकिन यह भारत को एक गैर-कर चुकाने वाले देश से अधिक कर अनुपालक समाज बनाने के लिए आवश्यक था.

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