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राज्य का आदर्श विद्यालय बना बड़ाजामदा का राजकीय मध्य विद्यालय (देखें वीडियो)

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Ranchi, 10 October: सरकारी स्कूल में जब बच्चों को साफ-सफाई के साथ आधुनिक तकनीक के माध्यम से बेहतर शिक्षा मिल रही हो, तो हर किसी का ध्यान ऐसे स्कूल पर जायेगा. जी हां सुनने में थोड़ा अजीब लेगेगा लेकिन झारखंड का यह स्कूल इन दिनों काफी चर्चा में है.

लोकप्रिय हो रहा राजकीय मध्य विद्यालय, बड़ाजामदा

पश्चिमी सिंहभूम के नोवामुण्डी प्रखंड में स्थित राजकीय मध्य विद्यालय, बड़ाजामदा अपने बेहतर शिक्षा और अधुनिक आधाभूत संरचना के कारण लोकप्रिय हो रहा है. इस स्कूल में वैसी तमात सुविधाएं बच्चों को मिल रहीं जैसा कि राजधानी के निजी स्कूलों में बच्चों को दिया जाता है. यह विद्यालय शिक्षा की गुणवक्ता को बरकरार रखे हुये है. यहां की शिक्षा प्रणाली इतनी बेहतर है कि दूर-दूर के बच्चे यहां पढ़ने के लिए आते हैं. जिले के उपायुक्त से लेकर झारखंड सरकार के शिक्षा अधिकारियों के बीच यह आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.

14 सौ छात्रों को पढ़ाते हैं 14 शिक्षक

वर्तमान में यहां कुल 14 सौ छात्र पढ़ते हैं और शिक्षकों की संख्या 14 है. विद्यालय का रिजल्ट सत प्रतिशत होता है. विद्यालय में प्रवेश लेने के लिए बच्चों को प्रवेश परीक्षा से गुजरना पड़ता है. इसकी इसी खासियत के कारण स्कूल को झारखंड का आदर्श स्कूल घोषित किया जा रहा है.

आधुनिक उपकरणों से लैस है स्कूल

बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूल के हर कोने में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं. आधुनिक उपकरण जिसमें प्रोजेक्टर, स्मार्ट क्लासेस की पूरी व्यवस्था कक्षा में की गयी है. साफ-सफाई का पूरा ख्याल विद्यालय प्रबंधन समिति के माध्यम से नियमित रूप से किया जाता है. वहीं शौचालय  की बेहतर व्यवस्था के साथ ही पीने के लिए आरो का पानी उपलब्ध है. पांच हजार बच्चों के बैठने के लिए समुदायिक हॉल और पुस्तकालय भी स्कूल में हैं.

पांच हजार बच्चों की क्षमता वाला समुदायिक हॉल और बेहतर पुस्तकालय

बच्चों के लिए समय-समय पर यहां सांस्कृतिक कार्यक्रम भी कराया जाता है. सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए पांच हजार बच्चों की क्षमता वाला समुदायिक हॉल भी स्कूल में है. वहीं पुस्तकालय में छात्रों को बैठने से लेकर उनके अनुरूप किताबों की व्यवस्था की गयी है. प्रयोगशाला के लिए प्रयाप्त संख्या में आधुनिक प्रायोग समग्रियां भी बच्चों के लिए स्कूल में प्रदान की जाती हैं.

सामाजिक सभागिता से स्कूल का किया गया कायाकल्प

स्कूल के बच्चों की पढ़ाई और शिक्षकों की लगन देखने के बाद, आस-पास के व्यपारियों और कंपनियों ने इस स्कूल में अपनी रूचि दिखायी. सीएसआर योजना के तहत इस स्कूल को जरुरत का हर समान विभिन्न लोगों के माध्यम से उपलब्ध कराया गया. पानी की टंकी से लेकर स्मार्ट क्लास तक, सब कुछ लोगों के सहयोग से उपलब्ध कराया गया है. अब इस स्कूल का विकास देखकर यहां के स्थानिय लोग इस स्कूल को छोड़ अन्य किसी स्कूल में बच्चों को नहीं भेजचा चाहते. इस स्कूल में सबसे अधिक छात्रों की संख्या है. साथ ही उनको पढ़ाने के लिए बेहतर शिक्षक भी इस स्कूल में हैं.

क्या कहते हैं प्राचार्य राजकुमार श्रीवास्तव

शुरूआत में स्कूल की स्थिति अन्य सरकारी स्कूलों जैसी ही थी, लेकिन यहां के शिक्षकों और अभिभावकों की पहल से इस स्कूल का कायाकल्प संभव हुआ. वर्तमान में जिस तरह से शिक्षा प्राप्त करना महंगा होता जा रहा है, ऐसे में समान्य लोगों के बच्चों के लिए केवल सरकारी स्कूल ही विकल्प हैं. शिक्षकों और अभिभावकों को जागरूक होकर इस दिशा में प्रयास करने की जरूरत है, तभी सरकारी स्कूलों का कयाकल्प संभव है.

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