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लड़कियों के लिए कौन सा घर अपना..?

Manjusha Bhardwaj

लड़कियां परायी होती है... यह बात बचपन से ही सुनने को मिलती है. जब से एक लड़की होश संभालती है तब से उसे यह बताया जाता है कि वह परायी है, जिस घर में उसने जन्म लिया है, जिस घर में वह बड़ी हुई है, जिस घर को वह बचपन से अपना समझती आ रही है वह घर उसका है ही नहीं, वह घर तो उसके लिए एक दिन पराया हो जाएगा.

जब एक लड़की जन्म लेती है तब उसे यह अंदाज़ा भी नहीं रहता है कि उसकी आगे की आने वाली जिंदगी किसी और घर में गुजरेगी. वो घर जिसे वह जानती तक नहीं. जिसके बारे में वह दूर-दूर तक अनुमान भी नहीं लगा सकती. एक ऐसा घर जो उसके लिए पूरी तरह से अंजान होगा. वहीं जिस घर में वह जन्मी और जिन्हें जानने समझने में उसकी जिंदगी के 20 से 25 साल लग गए, वो लोग तो असल में पराये निकले... यही नियम है, और समाज का भी शायद यही कहना है ना...??

शादी हो जाती है, मायके में यह बताया जाता है कि जिस घर में जा रही हो वही घर अब से उसका है, लेकिन क्या सच में वह घर उसका होता है. लाखों का घर हो के भी मानो ऐसा लगता है जैसे कि कोई अपना घर है ही नहीं.

यह बात एक लड़की के लिए कितनी अजीब होती होगी जब वह सुबह सो कर उठती है तो सब कुछ नया होता है. एक दिन में सारे रिश्ते बदल से जाते है. सारे नए चेहरे, नए रिश्ते, सबकुछ नया होता है. क्या आपने कभी इस बात की कल्पना भी की है कि कभी आपके साथ ऐसा हो तो कैसा महसूस होगा.

अक्सर यह कहा जाता है कि घर जैसा सुकून कहीं नहीं मिलता है. जब आप थक जाते हैं तो घर में जाकर सुकून से रहना चाहते हैं. लेकिन जब बात लड़कियों की आती है तो सबसे पहले जो मन में बात उठती है वह है कि कौन सा घर..?? वो घर जिसे वह अपना समझी लेकिन वह पराया निकला. जिस घर में उसे बचपन में सुकून मिलता था वहां तो अब उसे महीने में एक बार या फिर साल में एक बार जाने का मौका मिलता है. वहीं दूसरी ओर वह घर जिसे अभी जानना शुरु ही किया है उसे इतनी जल्दी कैसे अपना कह दूं. फिर अपना क्या और पराया क्या यह बात बेहद ही परेशान करने वाली है.

मायके में यह सिखाया जाता है कि ससुराल ही बेटी का अपना घर होता है, लेकिन ससुराल आने पर लोगों ने बताया कि बहुएं कभी बेटियां नहीं बन सकती, क्योंकि वो पराये घर से आयी है. अगर ऐसा है तो फिर कहां हैं हम, कौन सा घर हमारा है ? पेचिदा करने वाला सवाल है ना..

दरअसल अगर गौर किया जाए तो बेटियां कभी परायी हो ही नहीं सकती. अगर हम समाज की बातों में ना आकर अपने अधिकार को समझें तो सारी बाते साफ हो जाएगी. तो क्या हुआ अगर आपकी शादी हो गयी है, आपने जीवन बिताने के लिए एक जीवन साथी को ही तो चुना है, एक नया घर ही तो पाया है. इसका मतलब यह तो नहीं कि आपने अपना जन्म घर खो दिया है. शादी के बाद रहने की जगह और जिम्मेदारियां ही तो बदलती है, हां साथ में कुछ नए रिश्ते जुड़ जाते है. लेकिन अगर रहने की जगह और जिम्मेदारियों के बदलने से अगर कोई पराया हो जाता है तो फिर लड़के तो सबसे ज्यादा पराया हो जाएंगे. लेकिन ऐसा तो नहीं होता है. जब लड़के घर से दूर कहीं बाहर रहते हैं तो क्या उन्हें पराया कहा जाता है...? नहीं ना.. तो फिर एक लड़की क्यों परायी हो जाती है. क्या नयी जिम्मेदारियों को उठाना पराया करना होता है...

 

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