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ठेका में भ्रष्टाचार पर नगर विकास मंत्री सीपी सिंह व सांसद निशिकांत आमने-सामने

Anant kumar Jha

Deoghar, 13 November :
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नारा दिया था- न खाउंगा, ना खाने दूंगा. इसी की तर्ज  पर रघुवर दास ने मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद कहा था- जीरो टॉलरेंस. केंद्र की बात फिर कभी. झारखंड की बात करें, तो हालात इतने खराब हो गए हैं कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर नगर विकास मंत्री सीपी सिंह और गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे एक-दूसरे के आमने-सामने आ गए हैं. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भ्रष्टाचार के इस मामले में अपनी ही पार्टी के मंत्री पर आरोप लगाकर सांसद ने पार्टी को मुश्किल में डाल दिया है उससे पार्टी कैसे निपटती है.

पहले काम, फिर टेंडर मामले में मंत्री ने दिया था प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश

नगर विकास मंत्री सीपी सिंह गोड्डा जिला के प्रभारी मंत्री भी हैं. सात नवंबर को वह गोड्डा में थे. शिकायत मिली कि वहां के डीडीसी के आवास की मरम्मती का काम पूरा किए जाने के बाद टेंडर निकाला गया है. 14 लाख रुपये की निकासी पहले ही कर ली गयी है. इस पर मंत्री ने भवन प्रमंडल के अभियंता राजेंद्र प्रसाद मंडल से जवाब मांगा. उन्होंने जवाब नहीं दिया. तब मंत्री श्री सिंह डीडीसी के आवास चले गए. जाकर देखा तो शिकायत सही पाया. उन्होंने निर्देश दिया कि संबंधित अभियंता पर प्राथमिकी दर्ज की जाये. छह दिन बीतने के बाद भी प्राथमिकी दर्ज किए जाने की सार्वजनिक सूचना नहीं है. हालांकि मंत्री श्री सिंह के इस निर्देश पर भी कई सवाल उठे कि क्या किसी सरकारी आवास में कोई अभियंता अपनी मरजी से मरम्मती का काम करा सकता है. ऐसा संभव नहीं है. संबंधित अधिकारी की सहमति के बिना एेसा होना संभव नहीं है. फिर मंत्री ने अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की बात क्यों नहीं की. 

हाईजैक थी 20 सूत्री की बैठकः निशिकांत दुबे

सीपी सिंह कार्रवाई का निर्देश देकर रांची लौट गए. इसके बाद 11 नवंबर को गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे ने प्रेस कांफ्रेंस कर मंत्री श्री सिंह को निशाने पर लिया. मंत्री की जांच पर सवाल उठाया. सांसद ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा बतौर सांसद-मंत्री को किसी भी सरकारी अधिकारी के आवास की जांच करने का अधिकार नहीं है. सांसद ने 20 सूत्री की बैठक की तिथि बदलने पर भी सवाल उठाया. बैठक छह नवंबर को निर्धारित थी. लेकिन उसे सात तारीख को किया गया. जिसमें जिला के सांसद व दो-दो विधायक मौजूद नहीं थे. बैठक हाईजैक थी.  उन्होंने मंत्री सीपी सिंह के विभाग नगर विकास विभाग की भी जम कर आलोचना की. और कहा कि विधायक मद से कराए गए कामों की भी जांच होनी चाहिए. भ्रष्टाचार केवल किसी विभाग ने नहीं, बल्कि नेताओं व जन प्रतिनिधियों के कारण भी बढ़ रहा है. विधायक निधि से 15 लाख तक के काम के टेंडर की जांच क्यों नहीं की जाती है. मैं (निशिकांत दुबे) तो सांसद निधि भी बंद कर देने का पक्षधर हूं. आज भी एक जन प्रतिनिधि टेंडर मैनेज का दवाब दे रहे हैं और किसी अकेला नामक व्यक्ति का नाम आ रहा है. वर्तमान से लेकर पूर्व विधायक तक मैनेज करने में लगे हैं. इसी मैनेजमेंट के कारण जिले में योजनाओं का बुरा हश्र है. 

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