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सात सौ साल पहले मुहम्मद बिन तुगलक ने की थी नोटबंदी – यशवंत सिन्हा

NEWS WING

Ahmedabad, 15 November : देश के पूर्व वित्त मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ ने यशवंत सिन्हा इन दिनों खासे तेवर में हैं.नोटबंदी पर लगभग हर दिन यशवंत सिन्हा अपनी ही पार्टी की सरकार को आड़े हाथों लेते रहते हैं. हाल ही में नोटबंदी को लेकर जेटली पर भी प्रतिक्रिया दी और कहा कि नोटबंदी लागू करते हुए उन्होंने दिमाग नहीं लगाया. साथ ही जेटली के इस्तीफे तक की मांग कर डाली थी. अब एक बार फिर से यशवंत सिन्हा ने नोटबंदी को लेकर पीएम मोदी को निशाने पर लिया है. उन्होंने कहा है कि 14वीं सदी में  दिल्ली के सुल्तान मोहम्मद बिन तुगलक ने भी 700 साल पहले नोटबंदी की थी. सालभर पहले नोटबंदी करने को लेकर मोदी की आलोचना करते हुए सिन्हा ने कहा कि नोटबंदी ने देश की अर्थ व्यवस्था को 3.75 लाख करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया है.

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समाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक,  यशवंत सिन्हा ने एक कार्यक्रम में कहा, ' बहुत सारे ऐसे शंहशाह (राजा) हुए हैं, जो अपनी मुद्रा लेकर आए. कुछ ने नई मुद्रा को चलन में लाने के साथ-साथ पहले वाली मुद्रा का भी चलन जारी रखा. लेकिन 700 साल पहले एक शंहशाह मोहम्मद बिन तुगलक था, जो नई मुद्रा लेकर आया और पुरानी मुद्रा के चलन को समाप्त कर दिया. यहां बता दें कि मुहम्मद बिन तुगलक की पहचान उसकी बादशाहत और लंबे- चौड़े साम्राज्य के लिए होती थी. इसके अलावा इतिहासकार बताते हैं कि रातों - रात सख्ती से एक तरफा फैसले को लागू करने के लिए भी तुगलक को जाना जाता है, चाहे उसका फैसला गलत ही क्यों ना हो. इसलिए मुहावरों में भी तुगलकी फरमान की संज्ञा दी जाती है.     

कौन था मुहम्मद बिन तुगलक

14वीं सदी में दिल्ली के तख्त पर 26 वर्ष तक शासन करने वाले मोहम्मद बिन तुगलक का नाम न सिर्फ उसकी बादशाहत और लम्बे-चौड़े साम्राज्य के लिए जाना-पहचाना है, बल्कि रातोंरात बेहद सख्ती से लागू करवाए गए फैसलों के लिए भी उसे अक्सर याद किया जाता है, और आधुनिक युग के नेताओं की भी किसी फैसले को अचानक 'एकतरफा ढंग से' लागू करने पर 'तुगलकी फरमान' कहकर ही आलोचना की जाती है. दरअसल, 1320 ईस्वी से 1413 तक दिल्ली सल्तनत पर राज करते रहे तुगलक वंश के दूसरे शासक के रूप में मोहम्मद बिन तुगलक 1325 ईस्वी में तख्त पर बैठा, और 26 साल तक सत्तासीन रहा. उपलब्ध इतिहास के अनुसार, उसके शासनकाल में सल्तनत-ए-दिल्ली का भौगोलिक क्षेत्रफल सर्वाधिक रहा, जिसमें लगभग पूरा भारतीय उपमहाद्वीप शामिल था. इतिहासकारों के मुताबिक बेहद विद्वान शासकों में शुमार किया जाने वाला मोहम्मद बिन तुगलक वज़ीरों और रिश्तेदारों पर भी हमेशा संदेह करता था, और किसी भी शत्रु को कमतर समझना उसकी फितरत में शामिल नहीं था. मोहम्मद बिन तुगलक ने अचानक अपनी राजधानी को दिल्ली से महाराष्ट्र के देवगिरी ले जाने का फैसला किया, जिसका नाम उसने दौलताबाद रखा.

चांदी की जगह चलेंगे तांबे के सिक्के

इसके अलावा मोहम्मद बिन तुगलक का एक और बेहद चर्चित फैसला था. रातोंरात चांदी के सिक्कों की जगह तांबे के सिक्के चलवाना. उसने तांबे के जो सिक्के ढलवाए, वे अच्छे स्तर के नहीं थे, और लोगों ने उनकी नकल करते हुए उन्हें घरों में ही ढालना शुरू कर दिया, तथा उन्हीं से जज़िया (टैक्स) अदा करने लगे. इसलिए  कुल मिलाकर उसका यह फैसला भी गलत साबित हुआ, और इससे राजस्व की भारी क्षति हुई, और फिर उस क्षति को पूरा करने के लिए उसने करों में भारी वृद्धि भी की.

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