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धर्मनिरपेक्षता आजादी के बाद सबसे बड़ा झूठ : योगी आदित्यनाथ

News Wing

Raipur, 14 November : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने धर्मनिरपेक्षता को आजादी के बाद सबसे बड़ा झूठ करार दिया है. कहा कि इस शब्द का ईजाद करने वालों और बार बार इसका इस्तेमाल करने वालों को जनता से माफी मांगने को कहा है. योगी ने सोमवार को राजधानी रायपुर में समाचार पत्र नई दुनिया के एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि उनका यह मानना है कि भारत के अंदर आजादी के बाद का सबसे बड़ा झूठ धर्मनिरपेक्षता है. इसने भारत की अपूरणीय क्षति की है.

धर्म हमारे कर्तव्य, सदाचार और नैतिक मूल्यों का पर्याय

योगी ने कहा, ‘‘इस शब्द को जन्म देने वाले और बार बार इसका इस्तेमाल करने वाले लोगों को भारत की जनता से माफी मांगनी चाहिए.’’ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा कि धर्मनिरपेक्ष कोई शब्द नहीं है. धर्म हमारे यहां कर्तव्य, सदाचार और नैतिक मूल्यों का पर्याय है. जिसमें व्यक्ति और समाज का जीवन निर्भर करता है.

उन्होंने कहा, ’’ सोचिए अगर हम किसी भी व्यवस्था को धर्म से निरपेक्ष कर देंगे. इसका मतलब उसे कर्तव्य से निरपेक्ष कर देना. कर्तव्य से निरपेक्ष का मतलब अकर्मण्य होना. सदाचार से निरपेक्ष होने का मतलब दुराचारी हो जाना. यदि नैतिक मूल्यों से निरपेक्ष किसी व्यक्ति, किसी समाज को आप कर देंगे तब पतन की पराकाष्ठा होगी. ’’ योगी ने एक बार फिर दोहराया कि धर्मनिरपेक्ष शब्द आजादी के बाद का सबसे बड़ा झूठा और सबसे बड़ा पाखंड है. कोई व्यवस्था धर्मनिरपेक्ष नहीं हो सकती है.

मुझे 22 करोड़ लोगों को देखना है

योगी ने कहा, ‘‘राजनीतिक व्यवस्था पंथ निरपेक्ष होगी, हम किसी एक पंथ के प्रति आग्रही नहीं होंगे. कोई हमें कहेगा कि शासन की व्यवस्था इस उपासना विधि के अनुसार चलनी चाहिए, नहीं चल सकती है. क्योंकि शासन की व्यवस्था, उत्तर प्रदेश के अंदर मैं देखूंगा तो मुझे 22 करोड़ लोगों को देखना होगा. मै उन लोगों की सुरक्षा के प्रति जवाबदेह हूं. उनकी भावनाओं का सम्मान करने के प्रति भी जवाबदेह हूं. लेकिन मै किसी एक समुदाय, एक जाति की तुष्टिकरण के लिए भी नहीं बैठा रहूंगा.’’उन्होंने कहा, ‘‘ यह मेरा दायित्व है, केवल राजनैतिक नहीं बल्कि नैतिक दायित्व भी है. यह मेरे साथ हर सांसद का दायित्व बनता है कि पंथ निरपेक्ष हों लेकिन धर्मनिरपेक्ष नहीं. धर्मनिरपेक्ष होने का मतलब कर्तव्य से निरपेक्ष होना और इस पाखंड को जितनी जल्दी हम दूर कर सकें उतना अच्छा होगा.’’ योगी ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि अतीत से भटका हुआ समाज त्रिशंकु की तरह हो जाता है. अतीत सबको अपने इतिहास की गलतियों का परिमार्जन करने का अवसर प्रदान करता है. अतीत गौरव से भी आगे बढ़ने की प्रेरणा प्रदान करता है. इसलिए अतीत को विस्मृत नहीं कर सकते हैं.

उन्होंने कहा कि हम सबका मानना है कि इतिहास को सही परिप्रेक्ष्य में रखा जाना चाहिए. इतिहास केवल एक परीक्षा की वस्तु या केवल पढ़ने का अक्षर ज्ञान मात्र नहीं है. यह हम सबके लिए प्रेरणादायी अवसर होता है. इसलिए इतिहास के तथ्यों को तोड़ मरोड़कर प्रस्तुत करना राष्ट्रद्रोह से कम नहीं है.

अतीत हमें नई प्रेरणा देता रहता है

योगी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि जो जाति अपने महापुरूषों पर गौरव की अनुभूति नहीं कर सकती उसका कोई भविष्य नहीं हो सकता है. और मुझे लगता है कि अतीत हम सबको एक नई प्रेरणा देने के लिए हमेशा तत्पर रहता है. वह हमारे वर्तमान को झकझोरता है और हमारे भविष्य की दिशा भी तय करता है.

योगी आदित्यनाथ ने इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की और कहा कि भारत ने आजादी के बाद अपने 70 वर्षों के इस कालखंड में अनेक उतार चढ़ाव देखे हैं. इसमें तीन वर्ष का एक कार्यकाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत तय कर रहा है.

उन्होंने कहा कि भारत को दुनिया की सबसे बड़ी अर्थ व्यवस्था के रूप में प्रस्तुत करने, भारत की परंपरा और भारत की संस्कृति को और मजबूत करने तथा भारत को दुनिया में एक महाशक्ति के रूप में स्थापित करने का अवसर पूरे भारत वर्ष के सामने है.

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