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रांचीः पुलिस कस्टडी से मोहिउद्दीन अंसारी लापता, दस दिनों के बाद भी नहीं मिला कोई सुराग

Md. Asghar Khan

Ranchi, 15 November: दस दिनों से पुलिस कस्टडी से लापता मोहिउद्दनी अंसारी का अबतक कोई पता नहीं चल पाया है. मामला मांडर के नरकोपी थाना स्थित इटा गांव की है, जहां के 25 वर्षीय मोहिउद्दीन अंसारी को पुलिस चार नवंबर की शाम अपनी गाड़ी में बैठाकर थाने लेकर गयी थी. लेकिन उसी शाम से मोहिउद्दीन लापता है, और पुलिस भी उसे ढूंढ रही है. तब से लेकर अब तक मोहिउद्दीन ना ही पुलिस को मिल पाया है और ना घर वालों को. परिवार वालों का कहना है कि पुलिस मोहिउद्दीन को जिंदा थाने लेकर गयी थी, इसलिए उसे उन्हें जिंदा सौंपे. वहीं स्थानीय लोगों को लगता है कि अब मोहिद्दीन अंसारी जिंदा ही नहीं है. मोहिउद्दीन के चाचा जुलू, इस्लाम अंसारी, भाई मजीद, मुस्ताकीम और मनेश्वर चौबे, पुनीत कहते हैं कि घर का एक ही बच्चा कमाने वाला था. पुलिस कुछ न कुछ छुपा रही है. इस मामले में पुलिस लगातार अपने बयान बदल रही है. मोहिउद्दीन के लापता होने के बाद थाना प्रभारी राकेश कुमार सिंह को निलांबित करना इस शक और गहरा करता है. उधर पुलिस मोहिउद्दीन को जल्द ही ढूंढ लेने की बात कह रही है.  

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क्या है पूरा मामला

पेशे से राज मिस्त्री मोहिद्दनी हर रोज की तरह काम से घर वापस लौटने के दौरान अपनी बाइक से नीचे गिर गया. उसे तड़पता देख खाने-पीने की दुकान चलाने वाले अब्दुल शमशुल वहां पुहंचे. जिसके बाद उन्होंने और उनके दोस्त महावीर व तबरेज ने मोहिउद्दीन से उसका नाम-पता पूछा, लेकिन वह कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं था. यह देख कर उन लोगों को लगा कि मोहिउद्दीन को मिर्गी का दौरा उठा है. लेकिन उसे दौरे की दिक्कत भी नहीं थी. अंत में उनलोगों ने पुलिस को बुलाया. पुलिस मौके पर पहुंची और मोहिउद्दीन को लेकर थाने गयी, साथ में महावीर और तबरेज को भी लेकर गयी. लेकिन कुछ देर के बाद ही तबरेज और महवीर को पुलिस पदाधिकारी ने थाने से वापस भेज दिया.

पुलिस ने किया इनकार

वहीं परिवार के लोग मोहिउद्दीन को ढूंढते-ढूंढते छह नवंबर की शाम नरकोपी थाने पहुंचकर गुमशुदगी की खबर दी. मोहिद्दीन के भाई मोबारक ने बताया कि हमलोगों ने पुलिस को तस्वीर दिखाई, उसके बारे में विस्तृत जानकारी दी. लेकिन हैरान करने वाली बात है कि पुलिस ने पूरे मामले के बारे में जानते हुए भी उसे पहचानने से इनकार कर दिया. पुलिस ने कहा कि मिलेगा तो बताएंगे. लेकिन जब थाने में मोहिद्दीन की बाइक देखी तो हमलोगों ने हंगामा किया, तब जाकर पुलिस ने यह बात मानी की चार नवंबर को मोहिउद्दीन को थाने लाया गया था. उसकी हालत बहुत गंभीर थी. लेकिन उसे नौ बजे रात में छोड़ दिया गया था. अब सवाल उठता है कि जब मोहिउद्दीन की हालत गंभीर थी तो पुलिस ने उसके घर वालों को खबर क्यों नहीं दी, और उसे अकेले रात में क्यों छोड़ दिया?

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पुलिस ने 48 घंटों में ढूंढ लेने की बात कही थी

इस मामले में परिवार और गांव वालों ने थाना प्रभारी और अन्य पुलिस पदाधिकारियों के खिलाफ धरना-प्रदर्शन कर थाना प्रभारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है. इधर मामले को बढ़ता देख थाना प्रभारी राकेश कुमार सिंह और आरपी यादव को निलांबित कर दिया गया है और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने की बात कही गयी है. मोहिउद्दीन के पिता शफरुउद्दीन अंसारी ने कहा कि ग्रामीण एसपी राजकुमार लकड़ा ने 48 घंटे में मेरे लड़के को ढूंढ़ने का वादा किया था. आज दस दिन हो गये हैं, लेकिन अभी तक मोहिउद्दीन का कुछ पता नहीं चल पाया है. पुलिस बार-बार खोजने की बात को लेकर हमें बहलाने का काम कर रही है.

पुलिस जिंदा ले गई थी मेरे शौहर को इसलिए मुझे उन्हें जिंदा सौंपे

मोहिउद्दीन अपने अब्बू, अम्मी, दिव्यांग बहन, पत्नी और दो छोटे बच्चों के साथ रहता था. घर के भरन-पोषण की जिम्मेदारी मोहिउद्दनी पर ही थी. पत्नी हसीना खातून कहती हैं कि मेरे शौहर(पति) ना पीते-खाते थे, ना ही उनका किसी से कोई झगड़ा था. कई बार वह अपने साथी के यहां रात में सो जाते थें. इसलिए घटना वाले दिन भी हमलोगों को यही लगा कि वो अपने किसी साथी के घर में ठहर गये होगें. हमें क्या पता था कि पुलिस उन्हें उठाकर ले गयी है, और वो वहां से गायब हो गये हैं. मेरे शौहर को पुलिस जिंदा ले गई थी, इसलिए अब जिंदा दें. भाई मुबारक कहते हैं कि पुलिस हर बार अपना बयान बदलकर बहलावा दे रही है. पुलिस के मुताबिक अगर मेरे भाई की दिमागी हालत गंभीर थी तो उसे उसी दिन थाने से रात नौ बजे क्यों छोड़ा गया. उन्होंने कहा कि पुलिस कुछ ना कुछ छुपा रही है. या तो मेरे भाई को मार दिया गया है या थाना प्रभारी ने उसे गायब करवा दिया है.

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थाने से  खुद ही निकल गया था मोहिउद्दीन

12 नवंबर को नए थाना प्रभारी का चार्ज लेने वाले मिन्हाज आलम का कहना है कि मोहिउद्दीन अंसारी को जल्द ही ढूंढ लिया जायेगा. इसके लिए सीमावर्ती इलाकों में छानबीन चल रही है. पुलिस उसकी खोज में लगी हुई है जल्द ही उसका पता लगा लिया जाएगा. मोहिद्दीन के थाने से गायब होने के प्रश्न पर कहा कि मोहिउद्दीन को छोड़ा नहीं गया था, वह यहां से खुद ही निकल गया था. इसमें पुलिस से थोड़ी चुक हुई है. जबकि परिवार वालों का कहना है कि पुलिस ने कई बार अपना बयान बदला है. पहले इंकार किया, इसके बाद कहा कि उसे उसी रात को छोड़ दिया गया था. अब नए थाना प्रभारी कह रहे हैं कि मोहिउद्दीन खुद ही थाने से निकल गया.

सीबीआई जांच हो नहीं तो रांची बंद करेंगेः आजम अहमद

आदिवासी मूलवासी अधिकार मंच के संयोजक आजम अहमद ने मोहिउद्दीन अंसारी की गुमशुदगी पर पुलिस को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि इसमें पुलिस की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा होता है. पुलिस हिरासत से कोई कैसे गायब हो सकता है. इसमें पुलिस की मिलीभगत है. थाना प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की जाए. उन्होंने ने कहा कि मुस्लिम नौजवानों की हत्या या गुमशुदगी पर सरकार चुप हो जाती हैं. इस घटना की सीबीआई जांच कराई जाए, नहीं तो रांची बंद बुलाया जायेगा.

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