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राफेल सौदे से जुड़े आरोप शर्मनाक : रक्षा मंत्री सीतारमण

News Wing

New Delhi, 17 November : रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज कहा कि 36 राफेल लड़ाकू विमान की खरीद संबंधी सौदे से जुड़े आरोप ‘‘शर्मनाक’’ हैं. ऐसी कलह सशस्त्र बलों के लिए नुकसानदायक है. रक्षा मंत्री की टिप्पणी कांग्रेस के कल के आरोप के बाद आई है. कांग्रेस ने कल आरोप लगाया था कि एक कारोबारी को फायदा पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री ने ‘‘समूचा सौदा’’ ही बदल दिया. सीतारमण ने संवाददाताओं को बताया, ‘‘यह आरोप शर्मनाक हैं. इस सौदे को पारदर्शी प्रक्रिया का पालन करते हुए अंतिम रूप दिया गया.’’

कलह सशस्त्र बलों के लिए नुकसानदायक

रक्षा मंत्री ने कहा कि इस सौदे को लेकर कलह सशस्त्र बलों के लिए नुकसानदायक होगी. उन्होंने कहा कि वायुसेना की फौरी जरूरत ही इस करार को करने की अहम वजह थी. उन्होंने कहा कि 36 राफेल विमानों के लिये अंतिम करार पर सितंबर 2016 में दस्तखत किये गये. इससे पहले भारत और फ्रांस के बीच पांच दौर की लंबी चर्चा हुई और इसे सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने भी मंजूरी दी थी.  रक्षा मंत्री ने कहा कि संप्रग सरकार विमान खरीदने के प्रस्ताव पर 10 साल तक चुप्पी साधे बैठी रही.

बहुत अच्छा मोलभाव’’ किया : एयर चीफ मार्शल

इस मामले में कल वायुसेना ने कहा था कि राफेल खरीद सौदे में ‘‘ज्यादा कीमत नहीं’’ दी गई और सरकार ने फ्रांस के लड़ाकू विमान के सौदे के लिए ‘‘बहुत अच्छा मोलभाव’’ किया.

वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बी एस धनोआ ने कहा था कि ‘इसके लिए ज्यादा कीमत नहीं दी गई है. हमने अनुबंध से भी कम दाम पर 36 फ्रेंच लड़ाकू विमान राफेल के लिए मोलभाव किया.

सौदे को लेकर कांग्रेस-भाजपा आमने सामने

राफेल लड़ाकू विमान को लेकर कांग्रेस एवं भाजपा के बीच नोकझोंक पिछले कई दिनों से जारी है. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने सौदे को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर हमला बोल रखा है. आरोप लगाया है कि एक व्यवसायी को लाभ पहुंचाने के लिए ‘‘पूरे सौदे’’ में कथित बदलाव किया गया. जबकि सत्तारूढ़ भाजपा ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर रही है.भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए दावा करती है कि यह ध्यान बंटाने का प्रयास है क्योंकि कांग्रेस के बड़े नेताओं को अगस्तावेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकाप्टर घोटाले में पूछताछ करने की आशंका सता रही है.

रिलायंस डिफेंस लि. भी रक्षात्मक मुद्रा में

रिलायंस डिफेंस लि. ने एक बयान में कांग्रेस के बयान को ‘‘निराधार एवं असत्य’’ करार दिया.  कंपनी ने कहा है कि उसकी सहायक कंपनी दसाल्ट रिलायंस एयरोस्पेस एक संयुक्त उद्यम है. यह दोनों निजी कंपनी के द्विपक्षीय समझौते के बाद गठित हुई. इसमें भारत सरकार की कोई भूमिका नहीं है. कंपनी ने कहा कि सरकार की 24 जून 2016 की नीति के तहत रक्षा क्षेत्र में स्वचालित मार्ग के तहत 49 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को बिना पूर्व अनुमति के मंजूरी दी जाएगी.

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