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ना बिल्डिंग, ना कार्यालय, दे दी विश्वविद्यालय की मान्यता, रघुवर दास ने प्रोस्पेक्टस भी जारी कर दी

NEWS WING

Ranchi, 21 September :
शायद अाप नहीं जानते हैं कि झारखंड में प्रज्ञान इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी खुला हुअा है. मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इस यूनिवर्सिटी के सिलेबस का प्रोस्पेक्टस जारी किया था. शिक्षा मंत्री ने पिछले साल इस यूनिवर्सिटी को शुभकामना संदेश दिया था. जिसमें कहा था कि झारखंड सरकार ने इस यूनिवर्सिटी की स्थापना की गयी है. अब इस यूनिवर्सिटी का सच जानिए. तीन दिन पहले कोलाकाता सीअाइडी की टीम रांची अायी थी. टीम ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से भेंट कर जानना चाहा था कि क्या झारखंड में इस तरह का कोई यूनिवर्सिटी है. दरअसल, कोलकाता पुलिस ने इस यूनिवर्सिटी के चंदन अग्रवाल व सुरेश अग्रवाल खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है. अारोप है कि इस दोनों ने पश्चिम बंगाल में एमबीबीएस की फरजी डिग्रियां बांटी है. कोलकाता सीअाइडी की टीम ने इस संबंध में कई गिरफ्तारियां भी की है. 

ना कॉलेज भवन ना कार्यालय, दो दी मान्यता

न्यूज विंग ने जब इस यूनिवर्सिटी के बारे में पता लगाया तो पता चला कि झारखंड में इस यूनिवर्सिटी का कॉलेज तो क्या कार्यालय भी नहीं है. इस यूनिवर्सिटी का झारखंड कनेक्शन सीधे मुख्यमंत्री रघुवर दास व शिक्षा मंत्री नीरा यादव से जुड़ता नजर अा रहा है. वर्ष 2016 में मुख्यमंत्री रघुवर दास कोलकाता गए थे. वहां के होटल अोबरॉय में रोड शो का अायोजन किया. तब दैनिक जागरण में यह खबर छपी " कोलकाता में छाए सीएम रघुवर, झारखंड अाएंगे 20 बड़े निवेशक". खबर में जिन 20 निवेशकों का लिस्ट है, उसमें प्राज्ञान इंटरनेशनल विश्व विद्यालय का भी नाम है. जो शिक्षा के क्षेत्र में निवेश करने वाला है. मुख्यमंत्री ने वहां कहा कि झारखंड अगले दस सालों में देश ही नहीं दुनिया का समृद्धतम प्रदेश बनेगा. प्राज्ञान यूनिवर्सिटी के बारे में जो तथ्य सामने अा रहें हैं, उससे तो झारखंड की देश स्तर पर बदनामी होना तय माना जा रहा है.

कैबिनेट की स्वीकृति के बगैर विधानसभा से पास करा दिया

19 मार्च 2016 को अंग्रेजी दैनिक टेलिग्राफ में एक खबर छपी थी. जिसमें कहा गया है कि विधानसभा ने बजट सत्र में पांच शैक्षणिक विधेयक को पास कर किया है. इसमें एक विधेयक प्रज्ञान इंटरनेशनल विश्वविद्यालय विधेयक-2016 भी था. खबर के मुताबिक पांचों शैक्षणिक विधेयक ध्वनि मत से पास कराया गया. सूत्रों के मुताबिक प्रज्ञान इंटरनेशन विश्वविद्यालय विधेयक-2016 को केबिनेट की मंजूरी के बिना ही पास करा दिया गया. इतना ही नहीं विश्वविद्यालय विधेयक पास करने के लिए जरुरी जांच भी नहीं की गयी. सवाल यह उठता है कि प्रज्ञान विश्वविद्यालय के मामले में सरकार ने इतनी जल्दबाजी क्यों दिखायी. 

मुख्यमंत्री ने जारी किया था प्रोस्पेक्टस

विधानसभा से विधेयक पास कराने के कुछ दिन बाद मुख्यमंत्री ने प्रज्ञान यूनिवर्सिटी (यूजीसी मान्यता प्राप्त) प्रोस्पेक्टस जारी कर दिया. मुख्यमंत्री द्वारा प्रोस्पैक्टस जारी करने की तसवीर के साथ खबर सभी अखबारों में छपी. जिसमें मुख्यमंत्री के साथ विश्वविद्यालय के चांसलर डॉ सुरेश कुमार अग्रवाल, सीईअो सीए चंदन अग्रवाल अौर रजिस्ट्रार सुशील कुमार अग्रवाल नजर अा रहे हैं. सवाल यह उठता है कि झारखंड की खुफिया एजेंसी करती क्या है. क्या कोई जालसाज भी मुख्यमंत्री से कुछ भी जारी करवा सकता है. अौर उसकी खबर मीडिया में छपवा सकता है. क्या एेसे कार्यक्रमों से पहले सरकार की एजेंसियां संबंधि संस्था के बारे में पड़ताल करने का काम बंद कर चुकी है.  

शिक्षा मंत्री ने अांख बंद कर दे दी शुभकामना

28 जून 2016 को शिक्षा मंत्री नीरा यादव ने प्रज्ञान यूनिवर्सिटी को एक शुभकामना संदेश दिया है. जिसमें उन्होंने लिखा है : मुझे यह जानकार हर्ष हो रहा है कि प्रज्ञान इंटरनेशनल विश्वविद्यालय, रांची की स्थापना झारखंड सरकार के द्वारा की गयी है. अाशा है कि झारखंड के छात्रों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा मिलेगा तथा शिक्षा के क्षेत्र में उच्च शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता को अौर भी बेहतर करने में मदद होगा. निश्चित रुप से प्रज्ञान फाउंडेशन के द्वारा स्थापित विश्वविद्यालय से झारखंड राज्य को उच्च शिक्षा की दशा एवं दिशा का अभिनिर्धारण करने में सहायता मिलेगी. 

जानिए प्रज्ञान यूनिवर्सिटी के कारनामों को

पश्चिम बंगाल के विधाननगर थाना में इंडियन बोर्ड अॉफ अल्टरनेटिव मेडिसिन के खिलाफ 25 मई 2017 को प्राथमिकी दर्ज की गयी है. इस संस्था के सचिव चंदन अग्रवाल अौर अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल हैं. संस्था के दोनों पदाधिकारी पिता-पुत्र हैं.  संस्था बड़े पैमाने पर पैसा लेकर एमबीबीएस अौर एमडी की फरजी डिग्रियाां बांटी है. संस्था द्वारा दी गयी फरजी डिग्री लेकर कोलकाता के विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे छोटे-छोटे नर्सिंग होम में काम कर रहे हैं. इस संस्था ने नन मैट्रीक युवकों को भी एमबीबीएस की डिग्री दी है. इंडियन बोर्ड अॉफ अल्टरनेटिव मेडिसिन के अध्यक्ष डॉ सुरेश अग्रवाल झारखंड में प्रज्ञान यूनिवर्सिटी के चांसलर हैं. कोलकाता पुलिस ने छह सितंबर को दोनों को गिरफ्तार किया है. 

12वीं फेल को भी डिग्री

कोलकाता से मिली जानकारी के मुताबिक वहां के एक प्रशिद्ध अस्पताल में अस्थमा स्पेशलिस्ट के रुप में पदस्थापित डॉ नरेन पांडेय को भी बोर्ड अॉफ अल्टरनेटिव मेडिसन ने ही फरजी डिग्री दी है. असल में वह 12वीं फेल व्यक्ति है. इसी तरह अरदीप चटर्जी जो कि होम्योपैथी कॉलेज में दो बार फेल कर गया था, उसे भी डिग्री दे दी गयी. पुलिस ने कोलकाता के कई चिकित्सकों की क्लीनिक को सील कर दिया है. कई चिकित्सक फरार बताये जा रहें हैं. पुलिस जांच में कोलकाता की रूबी जेनरल हॉस्पीटल के डॉ खुशीराम हल्धर अौर कैजर अालम की डिग्री भी फरजी पाया है. 

देश-विदेश में बेची फरजी डिग्रियां

कोलकाता से मिल रही खबर के मुताबिक चंदन अग्रवाल अौर सुरेश अग्रवाल ने सिर्फ कोलकाता में फऱजी डिग्रियां नहीं बेची है. बल्कि दिल्ली, मुंबई, पटना, रांची अौर भुवनेश्वर में भी कई चिकित्सकों को फरजी डिग्रियां बांटी है, जो अभी प्रैक्टिस कर रहें हैं. पुलिस ने जिन संस्थाअों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है, उसमें बारासात के अल्टरनेटिव मेडिकल काउंसिल कोलकाता (एएमसीसी), भवानीपुर के इंडियान बोर्ड अॉफ अल्टरनेटिव मेडिसिन (अाइबीएएम), बेहाला के काउंसिल अॉफ अल्टरनेटिव सिस्टम अॉफ मेडिसिन्स (सीएएसएम अौर बाउबाजार के इंडियान काउंसिल अॉफ अल्टरनेटिव मेडिसिन (अाइसीएएम) शामिल है. पुलिस के मुताबिक इन संस्थाअों के पास कहीं से मान्यता प्राप्त नहीं है. इन संस्थाअों ने देश के विभिन्न राज्यों के अलावा यूएस, इटली, रुस, श्रीलंका, नेपाल अौर बंग्लादेश में भी फरजी डिग्रियां बेची है. ना कहीं कोई क्लास होता है, न क्लास रुम है. बस पत्राचार के माध्यम से पढ़ाई की बात कह कर डिग्रियां बेची गयी. 

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