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Newswing probe-02: पहले शर्त थी तीन यूनिट चालू रख कर उत्पादन खर्च पर 325 मेगावाट बिजली मिलेगी, बाद में सभी यूनिट बंद कर व चार रुपये की दर से बिजली खरीदने का फैसला

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Ranchi, 22 November: पतरातू थर्मल पावर स्टेशन (पीटीपीएस) को नेशनल पावर थर्मल कारपोरेशन (एनटीपीसी) और झारखंड उर्जा विकास निगम लिमिटेड (जेयूवीएनएल) की ज्वाइंट वेंचर कंपनी पतरातू विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (पीवीयूएनएल) को सौंपने के लिए बने एग्रीमेंट में कुल 24 शर्तें रखी गयी थी. जिसमें एक शर्त यह थी कि जब तक पीटीपीएस की चिन्हित इकाइयों का नवीनिकरण कर उससे उत्पादन शुरु नहीं किया जाता, तब तक चालू इकाइयों को मेंटेन कर उससे 325 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जायेगा. 03 मई 2015 को किए गए इस एग्रीमेंट के इस शर्त से बाद में पीवीयूएनएल मुकर गयी. एग्रीमेंट के 19 माह बाद 10 दिसंबर 2016 को मुख्यमंत्री रघुवर के आवास पर हुई बैठक में पीवीयूएनएल ने स्पष्ट कह दिया कि वह किसी भी यूनिट को नहीं चला सकता. यह बात एग्रीमेंट की शर्तों के विरुद्ध होने के बाद भी मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इस पर सहमति दे दी. इस बैठक में सरकार की तरफ से मुख्यमंत्री के आलावा मुख्य सचिव राजबाला वर्मा, उर्जा विभाग के तत्कालीन अपर मुख्य आरके श्रीवास्त्व, योजना एवं वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित खरे, मुख्यमंत्री के सचिव सुनील कुमार वर्णवाल, झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड व उर्जा उत्पादन निगम लिमिटेड के मैनेजिंग डाइरेक्टर राहुल पुरवार और  मेकॉन के प्रतिनिधि, एनटीपीसी की तरफ से एनटीपीसी के सीएमडी गुरदीप सिंह, पीवीयूएनएल के सीईओ बीबी त्रिपाठी, नॉर्थ कर्णपुरा के सीजीएम आरके सिंह और जीएम सीसी कॉमर्शियल केके सिन्हा उपस्थित थे. इसी बैठक में यह भी फैसला लिया गया कि नया यूनिट बनने तक 150 से 325 मेगावाट बिजली एनटीपीसी मुहैया करायेगा. मुख्यमंत्री रघुवर दास ने बिजली की दर प्रति यूनिट 4.00 रुपया तय कर दिया. जबकि एग्रीमेंट में यह शर्त थी कि नयी यूनिट बनने तक तीन यूनिट को चालू रखा जायेगा और उत्पादन लागत खर्च पर 325 मेगावाट बिजली सरकार को मिलेगी. इस बैठक में उत्पादन लागत खर्च का जिक्र ही नहीं किया गया. 

दस्तावेज के मुताबिक मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में पीटीपीएस की सभी यूनिटों को बंद करने के लिए पीवीयूएनएल ने जो तर्क दिया, वह दिलचस्प है. पीवीयूएनएल ने तर्क दिया कि सभी यूनिटें 30 से 47 वर्ष पुरानी है. और अपनी जीवन सीमा पूरी कर चुकी हैं. सवाल यह उठता है कि क्या एग्रीमेंट के समय सरकार के अफसरों और एनटीपीसी को इस बात की जानकारी नहीं थी कि पीटीपीएस की यूनिटें 30 से 47 साल पुरानी है. एग्रीमेंट के समय ही यह तय हो गया था कि कौन-कौन यूनिट बंद है, कौन-कौन यूनिट चालू हालत में है और किस-किस को कब फेज आउट करना है. फिर दुबारा इस तरह के तर्क देकर यूनिटों को बंद करना कई संदेह को जन्म देता है.

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एग्रीमेंट में कई महत्वपूर्ण जानकारियां छिपायी गयी

जिन कारणों को आधार बनाकर ज्वाइंट वेंचेर बनाकर पतरातू थर्मल पावर प्लांट को पीवीयूएनएल को देने की बात कही गयी, उनमें इस पावर प्लांट के विभिन्न यूनिटों के चालू या बंद रहने,संतोषजनक अथवा असंतोसजनक होने,कम उत्पादन के कारणों और उसकी स्थिति सुधराने के किये गए प्रयासों आदि के साथ उत्पादन के स्पष्ट आंकड़े जानबूझकर उल्लेखित नहीं किये गए. इसके एवज में प्लांट लोड फैक्टर अंकित किया गया. जाहिर है कि पुराने उपेक्षित यूनिटों से राष्ट्रिय स्तर का उत्पादन सम्भव नहीं होता है. इसके आधार पर एनटीपीसी के पक्ष में निर्णय लेने में आसानी हुई. जिन कारणों को आधार बनाया गया उनमें पूर्व में जारी टेंडर की बात छुपा ली गयी. यह भी बात साफ नहीं की गयी कि पुरानी सभी अथवा चिन्हित यूनिटों के मरम्मती या देखरेख में कितना खर्च करके अधिकतम कितनी बिजली का उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है. ऐसा करके अफसरों ने एनटीपीसी को यह छूट दे दी कि वह सिर्फ नयी यूनिटों को निर्माण करे. इस स्थानान्तरण योजना (JVC) के तहत पतरातू थर्मल पावर प्लांट की संपत्ति और मानव संसाधन के स्थानान्तरण की व्यवस्था की गयी. लेकिन नए यूनिटों के बनाने के काम में किसी को नहीं स्थानांतरित किया गया और वह काम पूरे के पूरे एनटीपीसी के जिम्मे छोड़ दिया गया. सम्पत्ति जो यदि स्थानानतरित होते तो उन्हें नए यूनिटों के निर्माण कार्य करने और सीखने का मौका मिलता और उनका कौशल विकास होता और राज्य के तकनिकी पदाधिकारियों की कार्य दक्षता बढती. 

 

क्या था एग्रीमेंट की मुख्य शर्तें

- पतरातू थर्मल पावर प्लांट में कुल 10 यूनिटें हैं. 

- यूनिट संख्या 01,02,03,05 व 08 फेज आउट होने की प्रक्रिया में है. 

- यूनिट संख्या 04 से 40 मेगावाट,06 से 45 मेगावाट  एवं 10 से 110 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है. 

- यूनिट संख्या 04 एवं 06 को 2017 तक फेज आउट होना है. 

- यूनिट संख्या 09 को बीएचइएल द्वारा नवीकृत किया जा रहा है, जिससे 105 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा.  

- यूनिट संख्या 07, 09 एवं 10 का ही रिवाइवल और संचालन किया जायेगा. 

- यूनिट संख्या 04,06 एवं 10 का मेंटेनेंस तब तक किया जाएगा, जब तक यूनिट संख्या 07 एवं 09 का रिवाईबल नहीं हो जाता है. 

- उसके बाद यूनिट संख्या 04 एवं 06 को फेज आउट किया जायेगा.  

इस प्रकार तीन यूनिटों 07, 09 एवं 10 को कार्यरत रहना था. जिससे 325 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता. ज्वाइंट वेंचर एग्रीमेंट के मुताबिक यूनिट संख्या 04,06 एवं 10 से 115 से 120 मेगावाट बिजली उत्पादन लेवल को सुनिश्चित करना था.  और यूनिट संख्या 07,09 एवं 10 से 325 मेगावाट की क्षमता को प्राप्त किया जाना था. अधिग्रहण के समय मात्र यूनिट संख्या 10 ही कार्यरत था, जिससे प्राप्त बिजली बिक्री की दर भी सेंट्रल इलेक्ट्रीसीटी रेगुलेटरी कमीशन द्वारा तय होना  था. यूनिट संख्या 04, 06 व 07 बंद थे और यूनिट संख्या 09 मेंटेनेंस के लिए होल्ड पर था. 

    

 

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