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मोमेंटम झारखंड का सच-अंतिम : बिना टेंडर के सरकार ने तीन कंपनियों को दिया आयोजन का जिम्मा

Akshay Kumar Jha

Ranchi, 12 October:
बदलता भारत, बदलता झारखंड. तीन लाख करोड़ का निवेश. हजारों नौकरियां. उद्योग के लिए सिंगल विंडो सिस्टम और ना जाने कितने ही तरह की बातें कही गयी, मोमेंटम झारखंड से पहले. लेकिन, सच तो ये है कि सरकार ने मोमेंटम झारखंड कराने का आयोजन ही बिना टेंडर के तीन कंपनियों को दे दिया था. इन तीनों कंपनियों पर किसी तरह की कोई पाबंदी नहीं थी. किसी भी प्लान को बनाने से लेकर उसे जमीन पर उतारने तक का सारा जिम्मा इन तीनों कंपनियों की थी. खर्च के बारे में इन्हें किसी से पूछने तक की जरूरत नहीं थी. 

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सीआईआई+अर्न्स्ट एंड यंग+एड फैक्टर= मोमेंटम झारखंड  

मोमेटम झारखंड कराने का पूरा जिम्मा तीन कंपनियों को दिया गया. इवेंट पार्टनर बना सीआईआई. नॉलेज पार्टनर बना अर्न्स्ट एंड यंग और पीआर का सारा काम संभाल रही है थी एड फैक्टर. बताते चलें कि इन तीनों कंपनियों को काम देने से पहले किसी तरह का कोई टेंडर सरकार की तरफ से नहीं निकाला गया. अधिकारियों ने इन तीनों कंपनियों का चयन खुद ही कर लिया. ना ही उस वक्त यह सार्वजनिक किया गया कि तीनों को काम के एवज में कितना भुगतान किया जाएगा. 

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सीआईआई का रेट चार्टः अाठ से 15 प्रतिशत तक कमीशन

सीआईआई एक गैर सरकारी. नॉन प्रॉफिटेबल कंपनी है. इसका पूरा नाम Confederation of Indian Industry है. Confederation का काम देश भर में उद्योगों को बढ़ावा देना है. मोमेंटम झारखंड के लिए जितने भी इवेंट हुए, उसका आयोजन भी सीआईआई ने ही किया. चाहे वो आयोजन देश में हुए हों या फिर विदेश में. सीआईआई के पास झारखंड की राजधानी रांची में हुए 16-17 फरवरी को ग्लोबल इंवेस्टर समिट का भी जिम्मा था. सीआईआई ने झारखंड में हुए आयोजनों के लिए पूरे खर्च पर अपना कमीशन आठ फीसदी रखा. राज्य से बाहर देश के दूसरे हिस्से में हुए आयोजनों के खर्च पर अपना कमीशन 10 फीसदी रखा है. वहीं विदेशों में हुए आयोजनों के लिए सीआईआई ने 15 फीसदी कमीशन रखा है. इसमें गौर करने वाली बात यह है कि खर्च कितना और कैसे करना है यह भी सीआईआई ही तय कर रहा था. 

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नेपाल हाउस के सरकारी भवन में है अर्न्स्ट एंड यंग कंपनी का कार्यालय

अर्न्स्ट एंड यंग एक ऐसी कंपनी है, जो झारखंड सरकार की नॉलेज पार्टनर है. दुनिया के 100 से ज्यादा देशों में कंपनी अपना कारोबार कर रही है. कंपनी के पास ना ही पूंजी की कमी है और ना ही झारखंड सरकार इसे कम पैसे दे रही है. बावजूद इसके कंपनी का कार्यालय नेपाल हाउस के उद्योग भवन में ही है. सिंगल विंडो सिस्टम के कार्यालय में इसी कंपनी का कब्जा है. कंपनी का दावा है कि वो अभी भी सरकार के लिए निवेश लाने का और ऑनलाइन से जुड़े सारा काम कर रही है.

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