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मंत्रियों को नहीं थी जानकारी, कैबिनेट में मुख्य सचिव और सीएम के सचिव ने एक रुपये में एनजीओ को दे दी 62.26 एकड़ जमीन

Akshay kumar Jha

Ranchi, 24 November: 21 नवंबर को हुए झारखंड सरकार की कैबिनेट की बैठक में जो हुआ वो सरकार, मंत्री और ब्यूरोक्रेसी के बीच के ताल-मेल की पोल खोल रहा है. बैठक में कई फैसले लिए गए. उन फैसलों के बीच एक फैसला ऐसा था जिसे लेकर मंत्री, ब्यूरोक्रेसी और सीएम आमने-सामने हैं. साथ ही सरकार के कार्य संस्कृति का नमूना भी सामने आ गया. मामला रांची के बुंडु प्रखंड में 62.26 एकड़ जमीन एनजीओ को देने का है. यह जमीन एनजीओ को एक रुपए में दी गयी है. जबकि मंत्रीपरिषद को मिले प्रस्ताव में यह साफ था कि जमीन 30 साल के लिए लीज पर दी जाएगी और इसकी कीमत 9.44 करोड़ होगी. और हर साल एक तय राशि एनजीओ से लेनी थी. लेकिन, कैबिनेट में मुख्य सचिव राजबाला वर्मा और सीएम के सचिव सुनिल बर्णवाल ने आश्चर्यजनक तरीके से एनजीओ को जमीन एक रुपए के टोकन मनी पर दे दी. इस बात को लेकर कैबिनेट में बहस भी हुई. लेकिन, उसका कोई फायदा नहीं हुआ. हुआ वही जो मुख्य सचिव राजबाला वर्मा और सीएम के सचिव सुनिल बर्णवाल चाह रहे थे. कैबिनेट की बैठक से पहले मंत्रीपरिषद के किसी सदस्य मंत्री को इस बात की जानकारी नहीं थी कि जमीन एक रुपए लेकर देने का प्रस्ताव लाया गया है.

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मंत्री सरयू राय ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर कहा, फैसला रद्द करें

वैसे तो कैबिनेट की बैठक के वक्त ही खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय और नगर विकास मंत्री सीपी सिंह ने मामले को लेकर आपत्ति जतायी थी. मंत्री सरयू राय ने फाइल पर ही लिखित रूप से आपत्ति जतायी और सीपी सिंह ने मौखिक रूप से. एक दिन बाद सरयू राय ने मुख्यमंत्री समेत मंत्रीपरिषद के सभी सदस्यों को एक तीन पन्ने का पत्र लिखा और सीएम से कहा है कि इस फैसले को रद्द किया जाए. अगर रद्द नहीं किया जाता तो फैसले पर मेरी असहमति दर्ज की जाए. 

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एनजीओ के बारे में मंत्रीपरिषद के सदस्यों को नहीं थी जानकारी

मुख्यमंत्री रघुवर दास और मंत्रीपरिषद के सदस्यों को लिखे गए पत्र में सरयू राय ने लिखा है कि जिस एनजीओ को सरकार जमीन देना चाह रही है, उस एनजीओ के बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं थी. एनजीओ की प्रशासनिक, वित्तीय और सांगठनिक साख तक का पता किसी मंत्री को नहीं था. सरयू राय ने लिखा कि फैसला लेते वक्त वहां मौजूद किसी सदस्य से ना तो सहमति ली गयी ना ही असहमति. लिखा कि मुख्य सचिव और सीएम के सचिव ने बड़े ही आश्चर्यजनक तरीके से एनजीओ को 62.26 एकड़ जमीन  एक रुपये के टोकन मनी पर दे दी. 

प्रस्ताव था 9.44 करोड़ लेकर देने का , फैसला हुआ फ्री में देने का

मंत्री सरयू राय ने अपने पत्र में लिखा है कि इससे पहले 09 नवंबर के कैबिनेट की बैठक में जमीन देने का प्रस्ताव लाया गया था. जमीन 9.44 करोड़ रुपए में एनजीओ को देनी थी. प्रस्ताव पर राजस्व विभाग से मुहर लगने के बाद वित्त विभाग भेजा गया था. वित्त विभाग से प्रस्ताव विधि विभाग होते हुए सीएस के पास पहुंचा. इन सभी जगहों पर प्रस्ताव पर शुल्क के साथ जमीन देने की बात संचिका में दर्ज की गयी. मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भी मुख्य सचिव के यहां से भेजे गये उसी प्रस्ताव को संपुष्ट किया. लेकिन, कैबिनेट में मुख्य सचिव राजबाला वर्मा और मुख्यमंत्री के सचिव सुनील बर्णवाल के द्वारा कहा जाने लगा कि जमीन एक रुपए के टोकन मनी पर दे देनी है. 

सीएस और सीएम के सचिव की कैबिनेट में भूमिका पर सवाल 

मंत्री सरयू ने आरोप लगाया है कि बैठक में सीएस राजबाला वर्मा और सीएम के सचिव सुनिल बर्णवाल ने एनजीओ के बारे में अपुष्ट जानकारी देने की कोशिश की. ऐसी जानकारी दी जाने लगी जो तथ्य से परे थे. उन्होंने अपने पत्र में सीएम को संबोधित करते हुए साफ तौर पर लिखा हैः "सीएस और सीएम के सचिव का कैबिनेट में औचित्य क्या है? उनकी भूमिका क्या है और उपस्थिति की सीमा और मर्यादा क्या होनी चाहिए ? आप मुझसे बेहतर जानते हैं.” साथ ही उन्होंने लिखा है कि जब सीएस राजबाला वर्मा कैबिनेट की बैठक में एनजीओ के बारे में जानकारी दे सकती हैं. नफा और नुकसान मंत्रीपरिषद के सदस्यों को समझा सकती हैं, तो प्रस्ताव पर यह बात क्यों नहीं लिख सकती. मंत्री ने लिखा है कि फैसले को कैबिनेट के मत्थे मढ़ने की क्या जरूरत है. अधिकारियों या सीएम ने प्रस्ताव लाने से पहले क्यों नहीं फाइल पर किसी तरह की कोई टिप्पणी की.       

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मंत्री अमर बाउरी पर भी उठाए सवाल

मंत्री सरयू राय ने अपने पत्र में लिखा है कि मामले को लेकर उन्होंने राजस्व विभाग के मंत्री अमर बाउरी को भी पत्र लिखा था. लेकिन राजस्व मंत्री प्रस्ताव में किसी तरह का कोई परिवर्तन नहीं चाहते थे. नौ नवंबर की कैबिनेट बैठक में जब प्रस्ताव वापस हुआ तो मंत्री की तरफ से कोई तथ्य या तर्क नहीं दिया गया. लिखा कि 21 नवंबर की बैठक में क्या होने वाला था, इसकी जानकारी सीएम और मंत्री अमर बाउरी को अच्छी तरह से थी. मंत्री सरयू राय ने आखिर में लिखा है कि भारत में काफी जमाने से गुरू, मंत्री और वैद्य की उचित सलाह ली जाती रही है और उसे माना भी जाता रहा है. इसलिए फैसले पर दोबारा से विचार हो. नहीं तो फैसले पर उनकी असहमति मानी जाए.

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