Skip to content Skip to navigation

न्यूज विंग के जागरूक पाठक अपनी समस्या, अपने आस-पास हो रही अनियमितता की तस्वीर या कोई अन्य खबर फोटो के साथ वाहट्सएप नंबर - 8709221039 पर भेजे. हम उसे यहां प्रकाशित करेंगे.

Diwali 2017: जानिये इस दिवाली क्या करने से आपके घर आयेगी लक्ष्मी

News Wing Ranchi, 18 October: देशभर में दिवाली को लेकर उत्साह है. हर घर, हर मुहल्ला, हर गांव और शहर दीपों से रौशन है. बाजार दीवाली के पटाखों, मिठाईयों और गिफ्टों से सजे हैं. दिवाली मां लक्ष्मी के आगमन का त्योहार माना जाता है. इस दिन मां लक्ष्मी हर घर में आती हैं. कार्तिक अमावस्या की काली रात में दीपोत्सव का पर्व हर घर में मनाया जाता है. दीपों की रोशनी में अंधेरी रात चांदनी रात की आभा देती है. कहते हैं दिवाली के दिन-रात बहुत खास होते हैं, क्योंकि लक्ष्मी को घर बुलाने के लिए विशेष पूजन किए जाते हैं. कुछ  मुहूर्त मां लक्ष्मी को घर बुलाने के लिए सबसे शुभ होते हैं. शास्‍त्रों में कहा गया है महालक्ष्मी का पूजन प्रदोष काल में करने से वो बहुत प्रसन्न होती हैं और अपनी कृपा बनाए रखती हैं. जब दिन और रात का मिलन होता है, उस घड़ी के संयोग को प्रदोष काल कहते हैं. दिवाली की रात को महानिशा की रात्रि भी कहा जाता है. इस दिन मां लक्ष्मी धरती पर आती हैं. इसलिए ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए जिससे वे रूठ जायें. आइये जानते हैं दिवाली में कैसे करें मां लक्ष्मी का प्रसन्न-

दिवाली में कैसे करें पूजन

प्रात:काल देवपूजन- दिवाली के दिन प्रात:काल सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें. स्नान के पश्चात् मुख्य द्वार पर आम के पत्तों का तोरण बांधे, द्वार के दोनों ओर केले पत्ते लगाएं, इसके बाद देवताओं का आह्वान कर धूप, दीप, नैवेद्य आदि पंचोपचार-विधि से पूजन करें. पूजन में सर्वप्रथम गणेश जी का पूजन करें क्योंकि गणेश जी मां लक्ष्मी के दत्तक-पुत्र हैं.

स्थिर लग्न में करें लक्ष्मी-पूजन- देवताओं के आवाहन-पूजन के बाद स्थिर लग्न में या किसी शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी का षोडषोपचार-विधि से पूजन करें. मां लक्ष्मी स्वभाव से चंचल हैं इसलिए स्थिर लग्न में उनका पूजन किए जाने से विशेष लाभ होकर स्थाई लक्ष्मी की प्राप्ति होती है.वृष, सिंह, वृश्चिक व कुंभ स्थिर लग्न हैं. इन लग्नों में लक्ष्मी पूजन करना श्रेयस्कर होता है.

श्रीयन्त्र स्थापना- षोडषोपचार पूजन के बाद श्रीयन्त्र का पूजन व स्थापना करें. श्रीयन्त्र का केसरयुक्त गौदुग्ध से अभिषेक करें. अभिषेक करते समय श्रीमन्त्र का जाप (श्रीं) करते रहें. श्रीयन्त्र दस महाविद्याओं में से एक मां त्रिपुरसुन्दरी का यन्त्र है. मां त्रिपुरसुन्दरी जिन्हें ललिता देवी भी कहा जाता है ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री देवी हैं. दीपावली के दिन स्फ़टिक या पारद श्रीयन्त्र का पूजन व स्थापना करना विशेष लाभकारी रहता है. जिस घर या प्रतिष्ठान में श्रीयन्त्र की स्थापना व नित्य पूजन होती है वहां कभी धन का अभाव नहीं रहता.

श्रीसूक्त का पाठ- श्रीयन्त्र की पूजा के बाद श्रीसूक्त के यथासामर्थ्य पाठ करें. कम से कम ग्यारह पाठ करें तो अति उत्तम है.

सरस्वती पूजन- लक्ष्मी-पूजन के बाद विद्या की देवी मां सरस्वती का षोडषोपचार-विधि से पूजन करें. व्यापारी अपने बही-खातों पर हल्दी व केसर से स्वास्तिक अंकित करें.

कुबेर यन्त्र व लक्ष्मीकारक वस्तुओं का पूजन करें- सरस्वती-पूजन के बाद कुबेर-यन्त्र व लक्ष्मीकारक वस्तुओं जैसे हत्थाजोड़ी, एकाक्षी नारियल, काली हल्दी, नागकेसर, आदि की पूजन कर इन्हें अपनी तिजोरी में स्थापित करें.

दीपमाला प्रज्जवलन- सूर्यास्त के बाद मां लक्ष्मी के समक्ष दीपमाला का प्रज्जवलन करें. घर के मुख्य द्वार पर दीपमाला लगाएं. दीपमाला प्रज्जवलन के समय इस मंत्र का जाप करें.

 "शुभं करोतु कल्याणं आरोग्यं सुख सम्पदाम।

शत्रुबुद्धि विनाशाय दीपज्योति नमोस्तुते॥"

जानिये दियों का क्या है महत्व

दिवाली पर दीपक हम सब जलाते हैं, लेकिन कुछ विशेष प्रकार के दीपक विशेष संख्या में जलाने पर जीवन की हर बाधा का निवारण होता है और हर तरह का ऐश्वर्य और सौभाग्य प्राप्त होता है. जानिये दीयों का क्या है महत्व

पीतल का दीया- इस दीपक की दिशा पूर्व का होना चाहिए. यह घी का दीपक होना चाहिए. दीपक की संख्या 2 रखें, समय सूर्योदय का होना चाहिए. इससे लक्ष्मी का आगमन और सभी देवताओं की कृपा प्राप्त होती है.

उडद का दीया- इस दीपक की दिशा उत्तर और दक्षिण की होनी चाहिए. दो बाती का दीपक बनाएं. तिल के तेल का दीपक होना चाहिए. दीपक संख्या 3 रखें. समय निशा काल रात्रि 11 बजे के बाद का होना चाहिए. इससे नकारात्मक शक्तियां दूर होती है, अतृप्त आत्माओं को शान्ति मिलती है.

मिट्टी का दीया- इस दीपक की दिशा दक्षिण होनी चाहिए. चार बाती अर्थात चौमुख दीपक होना चाहिए. सरसों के तेल का दीपक होना चाहिए. दीपक संख्या एक रखें. समय देर रात्रि 10 बजे के बाद. इससे पितरों को प्रसन्नता प्राप्त होती है.

आटा और गंगाजल मिला दीया- इस दीपक की दिशा संध्या समय में ईशान कोण में होना चाहिए. घी का दीपक हो और एक बाती लगाएं. दीपक संख्या पांच रखें. समय संध्या गोधूलि का समय 05 से 06 बजे. इससे आरोग्य प्राप्ति होती है, ज्ञान बढ़ता है, गुरु कृपा प्राप्त होती है.

हल्दी आटा मिला हुआ दीया- दिशा ईशान कोण, एक मुखी दीपक, घी गाय का. समय सूर्यास्त से एक घंटे के बाद. दीपक संख्या सात रखें. इससे गुरु का आशीष प्राप्त होता है. संतान का कष्ट समाप्त होता है.

आटा और गुलाब जल मिला दीया- दिशा पूर्व, समय सूर्यास्त के पहले, दीपक गाय के घी का होना चाहिए. दीपक की संख्या सात रखें. इससे लक्ष्मी प्राप्ति और आर्थिक कष्ट दूर होता है. व्यापारिक उन्नति होती है.

गुड़ मिला दीया- दिशा उत्तर का होना चाहिए, दीपक घी का होना चाहिए. एक बाती होना चाहिए. समय मध्य रात्रि 12 बजे, दीपक संख्या 14 रखें. इससे मां शक्ति की कृपा प्राप्त होती है और सिद्धि मिलती है।

इस दिवाली की शुभ चौघड़ियां

दिवाली पर इस बार पूजा समय का अलग-अलग योग बन रहा है. दुकानों में भी पूजा करने के लिए अलग-अलग समय बताए गए हैं, जिसे चौघड़ियां मुहूर्त कहा जाता है.  19 साल बाद इस बार दिवाली पर पूजा के लिए चार योग का संयोग बन रहा है. वैसे तो घरों में पूजा करने के लिए अलग-अलग समय बताया गया है, लेकिन वृष लग्न में शाम 7 बजकर 25 मिनट से लेकर रात्रि 9 बजकर 1 मिनट तक पूजा करने का शुभ समय रहेगा.

शुभ चौघड़िया : प्रात: 6.27 से 7.53 तक।

लाभ चौघड़िया : दोपहर 12.12 से 1.38 तक।

अमृत चौघड़िया : दोपहर 1.38 से 3.04 तक।

शुभ चौघड़िया : शाम 4.30 से 5.57 तक।

अमृत चौघड़िया : शाम 5.57 से रात्रि 7.31 तक।

देर रात सिद्धि के लिए : रात्रि 12.12 से 1.46 तक।

 

 

Top Story
City List: 
Share

Add new comment

loading...