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कांग्रेस अध्यक्ष का सेहरा किस सिर पर बंधेगा चर्चा का विषय, अध्यक्ष के लिए दिल्ली में हो रही दावेदारी

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Ranchi,  12 October : प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए सरगर्मी तेज हो गयी है. किसके सिर पर अध्यक्ष का सेहरा बंधेगा इसको लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है. अध्यक्ष बनने के लिए दिल्ली में दावेदारी की जा रही है. गौरतलब है कि कांग्रेस मुख्यालय में पिछले दिनों कांग्रेस डेलीगेट और जिलाध्यक्ष की बैठक के बाद सर्वसम्मति से लिये गये निर्णय में अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए सोनिया गांधी को अधिकृत किया गया है. अध्यक्ष बनने के लिए प्रदेश के नेताओं के द्वारा दिल्ली दरबार में लॉबिंग शुरू हो गयी है.

कौन-कौन हैं अध्यक्ष पद की रेस में

झारखंड प्रदेश का अध्यक्ष बनने के लिए कई नेता रेस में है. सबसे ज्यादा चर्चा सुबोधकांत सहाय और डॉ अजय की है. वैसे दौड़ में राज्य के पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी, विधायक मनोज यादव और आइपीएस से वीआरएस लेकर नेता बने अरूण उरांव है.

सुबोधकांत सहाय - पूर्व केंद्रीय मंत्री रह चुके है. दो बार से लगातार रांची से लोकसभा सांसद रहे. यूपीए 1 और यूपीए 2 में सुबोधकांत को मंत्री पद से नवाजा गया था. दिल्ली लॉबी में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है. सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल के साथ उनके निजी संबंध है.

डॉ अजय - पूर्व चर्चित आइपीएस अधिकारी रहे डॉ अजय कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता है. हालांकि कांग्रेस में वो नये जरूर है, लेकिन काफी कम दिनों में ही पार्टी में उनकी पैठ हो गयी है. राहुल गांधी के साथ उनके अच्छे संबंध है. कांग्रेस आलाकमान के पास भी उनकी अच्छी पकड़ है.

अरूण उरांव - अरूण उरांव भी आइपीएस अधिकारी रहे चुके है. वीआरएस लेकर राजनीती के मैदान में उतरे थे. बीजेपी की नजदीकियां के बाद कांग्रेस का दामन थाम लिया था. उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि कांग्रेस की रही थी. एकीकृत बिहार के पूर्व मंत्री रहे बंदी उरांव के पुत्र और पूर्व मंत्री कार्तिक उरांव के दामाद थे, जिसका फायदा उनको मिल सकता है. हांलांकि कांग्रेस आलाकमान ने अरूण उरांव को छत्तीसगढ का प्रभारी बनाकर एक बड़ी जिम्मेदारी दे दी है.

केएन त्रिपाठी - हेमंत सोरेन की सरकार में कांग्रेस कोटी से मंत्री रहे केएन त्रिपाठी भी अध्यक्ष पद की दौड में माने जा रहे है. पिछला विधानसभा चुनाव हार चुके है. दिल्ली दरबार में उनका आना जाना हमेशा से रहता है.

मनोज यादव - मनोज यादव पार्टी के विधायक है. कुछ वर्ष पूर्व वे पार्टी विधायक दल के नेता भी रह चुके है. पूर्व में मंत्री पद भी संभाला है. दिल्ली दरबार में उनकी तरफ से भी लॉबिंग हो रही है.

अपनी कुर्सी बचाने में लगे हैं वर्त्तमान प्रदेश अध्यक्ष

अपनी कुर्सी बचाने के लिए वर्त्तमान प्रदेश अध्यक्ष सुखदेव भगत भी जी तोड़ मेहनत कर रहे है. यही वजह है कि राज्य की रघुवर सरकार के खिलाफ जमकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे है. इस बार विधायक बन जाने से दिल्ली दरबार में पकड बन गयी है. सोनिया गांधी, राहुल गांधी से लगातार उनकी मिटिंग होती रही है. वह अपनी कुर्सी बचाने के लिए पूरा जुगाड कर रहे है. प्रदेश नेताओं का एक खेमा केंद्रीय नेतृत्व को यह बताने में जोर दे रहा है कि सुखदेव भगत ही मजबूत है.

नेताओं की मांग इस बार है गैर आदिवासी प्रदेश अध्यक्ष

पार्टी के अंदरखाने में एक खेमा इस बार पर आलाकमान को मनाने की कोशिश में है कि इस बार किसी गैर आदिवासी नेता को प्रदेश की कमान सौंपी जाये. जानकार सूत्रों की माने तो पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इस बार गैर आदिवासी को प्रदेश की कमान देने का मन भी बना लिया है. माना जा रहा है कि जिस किसी का दिल्ली दरबार में अच्छी पैठ होगी, पार्टी का सेहरा उसी के माथे पर बंधेगा. यही वजह है कि पार्टी नेता रांची से लेकर दिल्ली तक एक किये हुए है. जानकारों की माने तो पार्टी का शीर्ष नेतृत्व प्रदेश के प्रभारी आरपीएन सिंह की अनुशंसा के बाद ही किसी को अध्यक्ष पद के लिए नाम की घोषणा करेगा. नेतृत्व यह भी चाहता है कि एक ऐसा व्यक्ति अध्यक्ष पद पर रहे जो पार्टी की गुटबाजी को खत्म कर मजबूत स्थिति में ले आये.

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