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राजधानी में फिर सज गयी चिकन-मटन की दुकानें, अवैध बूचड़खानों में खुलेआम काटे जा रहे मुर्गा और खस्सी

Saurav Shukla, Md. Asghar Khan

Ranchi, 11 October: राजधानी रांची में इनदिनों फिर से चिकन-मटन की दुकानें सज गई है. इनमें अधिकांश दुकानें बिना लाइसेंस के चल रही है. अब न ही उनकी दुकान को बंद कराने के लिए गृह विभाग का कोई नया फरमान आ रहा है और न ही निगम की तरफ से कोई सक्रीयता दिखाई जा रही है. इसी साल के अप्रैल माह में सरकार ने तमाम बूचड़खानों को बंद करने का आदेश जारी किया था. छह महीने तक शांत रहने के बाद अब अब धीरे-धीरे बिना लाइसेंस वाले सभी मीट-मुर्गा दुकानदार अपनी दुकानें खोलने लगे हैं. कई जगहों पर चोरी-छिपे तो कई जगहों पर धडल्ले से बकरे और मुर्गे काटे जा रहे हैं.

अप्रैल में 2500 दुकानों पर लग गये थे ताले

सरकार के आदेश के बाद झारखंड में मीट-मुर्गा की दुकानें बंद हो गई. इसके कारण हजारों मटन- चिकेन विक्रताओं के उपर आर्थिक संकट छा गया था. हजारों घरों का चूल्हा जलना बंद हो गया. राजधानी रांची में 2500 से अधिक मीट-मुर्गा की दुकानों पर ताले लटक गए, जिससे बेरोजगारी भी बढ़ी. अब मीट-मुर्गा के शौकीनों को मुर्गे और खस्सी के मीट के लिए दुगने पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं.

लाइसेंस की प्रक्रिया में है कई पेंच

मुर्गा और खस्सी दुकान की लाइसेंस लेने की प्रक्रिया काफी जटिल है. विक्रेताओं की मानें तो इन्हें नगर निगम के स्वास्थ विभाग, खाद्य सुरक्षा विभाग और प्रज्ञा केंद्र से लाइसेंस निर्गत होते हैं. जबकि कई दुकानें रजिस्ट्रेशन से चलती है.

शहर में कितने लाइसेंसी दुकान, यह संबंधित विभागों को भी पता नहीं

रांची में मुर्गा और खस्सी के कितने लाइसेंसधारी दुकानदार हैं, इसका सही आकंड़े का पता न ही रांची नगर निगम को है और न खाद्य सुरक्षा विभाग के पास है, जबकि झारखंड मुर्गा-खस्सी विक्रेता संघ के अनुसार 150 से अधिक लोगों के पास लाइसेंस है. रांची नगर निगम कहना है कि उन्होंने 28 दुकानों के लिए एनओसी निर्गत किया है. वहीं खाद्य सुरक्षा विभाग के मुताबिक शहर में अरगोड़ा एसके चिकन शॉप और बजरा में महेश चिकन शॉप के नाम से लाइसेंस निर्गत है.

क्या है लाइसेंस देने के नियम

खाद्य सुरक्षा विभाग के मानें तो प्रति वर्ष 12 लाख के अंदर व्यवसाय करने वाले दुकानदारों को राजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है. जिसमें दो बड़े जानवर (भैंसा), 10 छोटे जानवर (खस्सी) और 50 मुर्गा काटकर बेच सकते हैं, वहीं 12 लाख से उपर का व्यवसाय करने वाले दुकानदारों को लाइसेंस निर्गत करवाना पड़ता है, जिसमें 3 बड़े जानवर (भैंसा)10 से अधिक छोटे जानवर (खस्सी) और 50 से उपर मुर्गा का मीट बेच सकते हैं.

क्या हैं दुकान के मानक

पशु वध से पहले पशु का जांच किया जाना अनिवार्य है. 

दुकानों में डीप फ्रीजर कि व्यवस्था होनी चाहिए. 

जहां पशु वध किया जा रहा है वहां अन्य जानवरों को ना रखा जाए.

दुकाने पूरी तरह से धुल-गंदगी मुक्त हो. 

वेस्ट मेटेरियल को डीकंपोज़ करने कि बेहतर व्यवस्था हो.

दुकान बंद होने से आर्थिक स्थिति खराब: राजेश

कोकर स्थित डिस्टलरी पुल के पास करीब 25 की संख्या में मुर्गा दुकान का संचालन वर्तमान समय किया जा रहा है. मुर्गा विक्रेता राजेश की मानें तो सरकार के एक आदेश से हजारों लोगों के ऊपर आर्थिक संकट मंडराने लगा. पिछले कई वर्षों से फुटपाथ पर दुकान चला रहा है, लेकिन सरकार का आदेश है कि जिसके पास अपनी दुकान है उन्हें ही लाइसेंस दिया जाएगा. ऐसे में छोटे दुकानदार कहां जाएं ये सरकार बताये.

आज भी डर कर दुकान खोलते हैं: इमाम 

कर्बला चौक पर मुर्गा दुकान चला रहे इमाम ने कहा कि सरकार के आदेश के बाद से भय के माहौल में दुकान चला रहे हैं. दूसरा कोई व्यवसाय नहीं है. वर्तमान सरकार से बहुत उम्मीद थी लेकिन अब निराशा हाथ लगी है. 

डर-डर कर चला रहे हैं दुकान

सरकार के आदेश के बाद हजारों की संख्या में विक्रेता कई महीनों से अपनी दुकान बंद किये थे. लेकिन भूख के आगे सरकार के आदेश को अनदेखा कर भय के माहौल में दुकान चलाने को मजबूर हैं. कम पूंजी में व्यवसाय करने वाले दुकानदार सरकार के मानक को पूरा कर पाने में सक्षम नहीं हैं. फैसला निगम,खाद्य सुरक्षा विभाग और मुर्गा-खस्सी विक्रेता संघ को करना है की ऐसी हालत से कैसे निपटा जाए. 

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