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रद्द किये 11.5 लाख राशन कार्ड, बनाये एक महीने में केवल 3500, कितनी संतोषियों की मौत के बाद जागेगी संवेदना

धीरज कुमार



झारखंड में लगातार हुईं भूख से मौत के बाद भी राज्य सरकार ने कोई सबक नहीं ली है. पिछले एक महीने में पूरे राज्य में मात्र लगभग 3500 राशन कार्ड ही बने हैं. राज्य सरकार के दुर्भाग्यपूर्ण आदेश के चलते पूरे झारखंड में लगभग 11.50 लाख राशन कार्ड रद्द कर दिये गये. खाद्य आपूर्ति मंत्री  सरयू राय ने मुख्य सचिव के आदेश को ऐसे निरस्त किया था मानो पीड़ित गरीबों का राशन कार्ड तुरंत बन जायेगा. मुख्य सचिव राजबाला वर्मा ने आदेश दिया था कि आधार नहीं तो राशन कार्ड रद्द. सरकार ने इस बिना पर करीब साढ़े 11 लाख गरीबों को " फर्जी" बतलाकर राशन कार्ड रद्द कर दिये थे. इस कारण राशन नहीं मिलने से राज्य के विभिन्न इलाकों में भुखमरी की स्थिति पैदा हुई. कई गरीबों की भूख से मौतें हुईं.

इसके बाद विभागीय मंत्री सरयू राय ने कड़क तेवर दिखाते हुए कहा था कि गरीबों का राशन कार्ड तुरंत बनाने के आदेश दिए थे. मगर यह सब झारखंड सरकार का मात्र दिखावा भर है. सवाल है कि क्या जिस बड़े पैमाने पर एक झटके में आधार नहीं होने की वजह से लाखों परिवार का राशन कार्ड रद्द कर दिया गया, क्या सरकार उन परिवारों को फिर से राशन कार्ड दे पाएगी?  इसके लिए सरकार के पास क्या कार्य योजना है या फिर आने वाले दिनों में और भी भूख से मौते होंगी?

सरकार की वेबसाईट पर यह जानकारी

रघुवर दास भूख से मौत को “साजिश” बताते हैं और सरयू राय “सनसनी”. लेकिन दोनों स्वीकार करते हैं कि पीडीएस के क्रियान्वयन में गड़बडिया हैं एवं उन्हें ठीक करने की जरुरत है. लेकिन ये सिर्फ बयानबाजी करते हैं. झारखंड में भूख से हुई लगातार मौतों के बाद भी सरकार ने कोई सबक नहीं ली है. आंकड़े कुछ और बयां करते हैं. सरकार की खुद की वेबसाईट के अनुसार पिछले एक महीने में मात्र लगभग 3500 लोगों का राशन कार्ड बना है. 16 अक्टूबर 2017 को कुल कार्ड धारियों की संख्या 56,31,929 थी. एक महीने बाद यानी 15 नवम्बर 2017 तक कुल कार्ड धारियों की संख्या 56,35,508 है. यानी कि लगातार भूख से मौतों के बाद भी एक महीने में पूरे राज्य में मात्र 3579 राशन कार्ड बने हैं.

इस हिसाब से एक साल में मात्र लगभग 40 हजार परिवारों का ही राशन कार्ड बन पाएगा और लाखों परिवार जिनका राशन कार्ड रद्द हुआ है उनका राशन कार्ड फिर से बनवाने में एक दशक से ज्यादा लग जायेंगे और हर साल कई और भूख से मौतें होंगी.

आंकड़ों से भी भयानक जमीनी सच्चाई

सिर्फ आंकड़े ही नहीं हम सब के जमीनी अनुभव भी कहते हैं कि झारखंड में राशन कार्ड बनवाने में महीनों लग जाते हैं. और अगर कोई परिवार सिमडेगा के संतोषी कुमारी या धनबाद के बैजनाथ रविदास जैसा हो तो राशन कार्ड बनवाने की शर्त है भूख से मौत. आज भी राशन कार्ड बनवाने के लिए आधार अनिवार्य है. आधार नंबर सहित, परिवार के तमाम अन्य जानकारियों को ऑपरेटर द्वारा ऑनलाईन लॉग इन प्रक्रिया में डालना पड़ता है. जिसके लिए सर्वर का सही ढंग से काम करना एवं ऑनलाईन पोर्टल खुला रहना अनिवार्य है. कहीं-कहीं तो राशन कार्ड के लिए आवेदन देने वाले को आवेदन के साथ मोबाईल लाने के लिए भी कहा जाता है. क्योंकि मोबाईल में ओटीपी आता है. इन तमाम डिजिटल जटिलताओं के बीच संतोषी कुमारी एवं बैजनाथ रविदास जिनके परिवार के लिए पीडीएस का राशन जीवन रेखा है,  राशन के अभाव में भूख से दम तोड़ देते हैं.

कितनी मौतों का और इन्तजार

राशन कार्ड रद्द होने के बाद संतोषी कुमारी के परिवार ने नए राशन कार्ड का आवेदन बच्ची की मौत के लगभग एक महीने पहले ही दे दिया था. लेकिन आवेदन देने के लगभग एक महीने तक ऑनलाईन पोर्टल बंद रहा. इस बीच संतोषी की मौत हो गयी. धनबाद में भूख से मौत के शिकार हुए रिक्शाचालक बैजनाथ रविदास के परिवार ने भी मौत के लगभग 6 महीने पहले आवेदन दिया था. लेकिन इन दोनों परिवारों को राशन कार्ड की कीमत भूख से जान देकर चुकानी पड़ी. संतोषी कुमारी एवं बैजनाथ रविदास दोनों के परिवारों को राशन कार्ड उनकी मौत के बाद दिया गया. संतोषी कुमारी एवं बैजनाथ रविदास की मौत से सरकार और प्रशासन ने कोई भी सबक नहीं ली है. आज भी राशन कार्ड मुहैया कराने की वही व्यस्था है जिसके कारण इनकी जानें गयीं. डिजिटल इंडिया की भेंट चढ़ने को संतोषी कुमारी एवं बैजनाथ रविदास जैसे कई और परिवार कतार में हैं.

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