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अवामी को-आपरेटिव बैंक मामले में लालू परिवार की भूमिका की भी जांच करे CBI, ED : सुमो

News Wing

Patna, 21 November : बिहार के उपमुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी ने आज कहा कि सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय को राजद प्रमुख लालू प्रसाद के विश्वासपात्र अनवर अहमद के सहकारी बैंक मामले की जांच करते समय लालू और उनके परिवार की भूमिका की भी जांच करनी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि राजद प्रमुख लालू प्रसाद और उनके परिवार ने 'बेनामी संपत्ति' खरीद में अपने विश्वासपात्र रहे पूर्व एमएलसी अनवर अहमद के आवामी कोआपरेटिव बैंक का पूरा इस्तेमाल किया.

पटना स्थित अपने आवास पर आज आयोजित जनता दरबार के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए सुशील मोदी ने कहा कि सीबीआई एवं प्रवर्तन निदेशालय को अनवर अहमद के कोआपरेटिव बैंक की जांच करते समय लालू प्रसाद की भूमिका की भी जांच करनी चाहिए. यह पूछे जाने पर कि क्या राज्य सरकार भी इस सहकारी बैंक की कार्यप्रणाली की जांच कराएगी सुशील ने कहा कि निश्चित तौर पर ऐसा होगा.

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बैंक ने राजद नेताओं के 500-1000 के नोट को सफेद करने में मदद की

उन्होंने आरोप लगाया कि अनवर अहमद का प्रवेश लालू प्रसाद के रसोई घर तक था और उनके लिए मांसाहारी भोजन खासतौर पर कबाब बनाने के कारण मीडिया ने उनका नाम 'कबाब मंत्री' के तौर पर कर दिया था. सुशील मोदी ने आरोप लगाया कि अनवर अहमद के आवामी कोआपरेटिव बैंक का इस्तेमाल लालू परिवार और राजद से जुडे लोगों के काले धन को सफेद करने, अपने लोगों को कर्जा दिलवाने तथा नोटबंदी के बाद लालू सहित राजद नेताओं के 500 और 1000 के नोट को सफेद करने में इस्तेमाल हुआ.

उन्होंने लालू प्रसाद और उनके परिवार की 'बेनामी संपत्ति' खरीद में आवामी कोआपरेटिव बैंक का पूरा इस्तेमाल किये जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि लालू ने अनवर अहमद को दो बार (एक बार राज्यपाल कोटे से) बिहार विधान परिषद सदस्य बनाया ताकि उनके बैंक का इस्तेमाल काले धन को सफेद करने के किया जा सके. सुशील ने दावा किया कि जमीन खरीद के अनेक मामलों में इस सहकारी बैंक के माध्यम से संदिग्ध राशि का भुगतान दिखाया गया है.

कालेधन को सफेद करने के साक्ष्य मिले हैं

उन्होंने इस बैंक में लालू और राबडी का खाता होने तथा उसके अभी भी क्रियाशील होने का आरोप लगाते हुए कहा कि लालू के खाता में 58 लाख रूपये तथा राबडी के खाते में 15.62 लाख रूपये जमा हैं. सुशील ने आरोप लगाया कि राबडी देवी के 18 फ्लैट जिस अरविन्द यादव के परिवार की जमीन पर बने हैं उस परिवार को दिए गए 12 लाख 86 हजार रुपया और दो लाख 45 हजार रूपये के पांच अलग अलग चेक इसी आवामी कोआपरेटिव बैंक के हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि बैंक के अध्यक्ष अनवर अहमद ने नोटबंदी के बाद 60 मजदूरों के नाम बैंक खाते खोलकर प्रत्येक में 2.30 लाख जमा कराया. सुशील ने आरोप लगाया कि 2.30 लाख जमा करवाया गया तथा 24 हजार हर सप्ताह निकाला गया ताकि आयकर विभाग की निगाह से बचा जा सके.

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उन्होंने आरोप लगाया कि जिन मजदूरों के नाम से खाता खोलकर पैसा जमा कराया गया उन्हें पता भी नहीं कि उनके नाम से खाते खोले जा रहे हैं. सुशील ने आरोप लगाया कि अहमद के ट्रस्ट में छापेमारी के दौरान 10 लाख के नए 2000 और 500 के नोट बरामद किए थे. उन्होंने आरोप लगाया कि इन खातों में 11 करोड से ज्यादा की रकम जमा करने के तुरंत बाद निकाल ली गई थी. सुशील ने आरोप लगाया कि अहमद ने अपने परिवार के 4 ट्रस्ट का इस्तेमाल नोटबंदी के बाद 500 और 2000 के नोट जमा करने के लिए इस्तेमाल किया. उन्होंने आरोप लगाया कि इन सभी ट्रस्ट का खाता भी इसी आवामी कोआपरेटिव बैंक में था जहां दिखलाया गया कि चन्दा के रुप में यह राशि उन्हें दान स्वरुप मिली है. सुशील ने आरोप लगाया कि नोटबंदी के समय छापेमारी के दौरान इस सहकारी बैंक के 70 बेनामी खातों से 10—12 करोड रुपये के कालेधन को सफेद करने के साक्ष्य मिले हैं.

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