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12 साल में 2.44 करोड़ लोगों ने किया आरटीआई का इस्तेमाल

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Ranchi,  12 October : 12 अक्तूबर को आरटीआई यानि सूचना का अधिकार दिवस मनाया जाता है. आज के ही दिन Transparency International India ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर यह घोषणा की है कि 2005 से लेकर अब-तक यानि 12 सालों में 2.44 लोगों ने RTI (Right To Information)  का इस्तेमाल किया है. सूचना का अधिकार जम्मू कश्मीर में 2009 में लागू किया गया था. बताते चलें कि सूचना का अधिकार इस्तेमाल करने में देश भर के राज्यों में महाराष्ट्र सबसे आगे है. अब तक देश के सूचना आयोगों के समक्ष अब तक 13,48,457 (इसमें तमिल नाडू शामिल नहीं है) द्वितीय अपील और शिकायत दर्ज किए गए हैं.

अधिकारियों की सोच में परिवर्तन की रफ्तार धीमी है

12 अक्टूबर, 2005 से सूचना का अधिकार अधिनियम केंद्र सरकार, सभी राज्य सरकारों (जम्मू कश्मीर 2009में), स्थानीय शहरी निकायों, पंचायती-राज संस्थानों में लागू है. कानून बनने के बाद यह माना जा रहा था कि इससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और सरकार के विभिन्न विभागों और क्रियाकलापों में पारदर्शिता आएगी. सूचना का अधिकार अधिनियम आने के 12 वर्षों के बाद भी गोपनीयता की कार्यसंस्कृति की वजह से अधिकारियों की सोच में परिवर्तन की रफ़्तार काफी धीमी है.

केंद्र से ज्यादा मांगी गयी सूचनाएं

देश में 12 अक्तूबर को आरटीआई दिवस मनाया जाता है. भ्रष्टाचार एवं पारदर्शिता पर काम करने वाली संस्था ‘‘ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया’’ की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार कानून के तहत सूचना का अधिकार मिलने के बारह वर्षों (2005-2016) में उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर देश के मात्र 2.44 करोड़ लोगों ने इस अधिकार का इस्तेमाल किया है. सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत केन्द्रीय स्तर पर सबसे ज्यादा जानकारियां मांगी गयी हैं. जबकि, राज्य स्तर पर आरटीआई दाखिल करने वालों में महाराष्ट्र के लोग सबसे आगे हैं. साल 2005 से 2015 तक की अविध के दौरान केन्द्रीय स्तर के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों से संबंधित जानकारियां कुल 57,43,471 आवेदन मिले. महाराष्ट  में आरटीआई के कुल54,95,788 आवेदन मिले. कर्नाटक में 2278082. आन्ध्र प्रदेश में 6,99,258 लोगों ने राज्य के विभिन्न विभागों से सूचना मांगने के लिए अपने इस अधिकार का प्रयोग किया.

टॉप फाइव में बिहार भी, नॉर्थ ईस्ट सबसे पीछे

सूचना के अधिकार का प्रयोग करने में कुल आवेदनों की संख्या के आधार पर पाँच अग्रणी राज्यों में महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडू एवं बिहार है. संख्या के आधार पर सबसे कम प्रयोग करने वाले राज्यों में मणीपुर, सिक्किम, मिजोरम, मेघालय तथा नागालैंड का स्थान है. सूचना के अधिकार अधिनियम धारा19(3) एवं धारा 18 के तहत द्वितीय अपील एवं शिकायतों की कुल संख्या में महाराष्ट्र राज्य सूचना आयोग ने केंद्रीय सूचना आयोग को भी पीछे छोड़ दिया है.

क्या कहा निदेशक रामनाथ झा ने

‘ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया’ के कार्यकारी निदेशक रामनाथ झा ने कहा, ‘‘सूचना का अधिकार निश्चित तौर पर भ्रष्टाचार के उन्मूलन का कारगर हथियार है, लेकिन अभी तक की आम धारणा में लोग इसके अभ्यस्त नहीं हुए हैं. हालांकि कानून बनने के बाद से केन्द्र अथवा किसी राज्य सरकार ने इसकी जागरूकता के लिये कुछ विशेष प्रयास नहीं किया है.

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