ग्रीनहंट विरोधी नागरिक मंच की जांच रिपोर्ट
रांची: झारखंड में उग्रवाद की समस्या पर एक बार फिर सबकी नजर है। एक ओर, नए मुख्य सचिव ए के सिंह के हौसले पर सरकार उग्रवाद प्रभावित पलामू के सुदूर गांवों तक पहुंचने का इतिहास बनाने में लगी है वहीं, गैर-सरकारी संगठन उग्रवाद के लिये सरकारी तंत्र को दोषी करार देने और इस समस्या से निजात के लिये अहिंसक प्रणाली वाली मांग मनवाने पर अड गये हैं। इस क्रम में सरकार की ग्रीन हंट योजना इनके निशाने पर है। पिछले दिनों ऑपरेशन ग्रीनहंट विरोधी नागरिक मंच पलामू के चतरा जिले का दौरा किया था। उस अन्वेषी दल ने अब अपनी जांच रिपोर्ट प्रकाशित की है।
ऑपरेशन ग्रीनहंट विरोधी नागरिक मंच झारखण्ड – का तथ्य अन्वेषी दल का जाच रपट
दिनांक 13 जून 2010 को ऑपरेशन ग्रीनहंट विरोधी नागरिक मंच झारखण्ड की एक तथ्य आंवेशी दल ने झारखण्ड के लातेहार जिला अन्तर्गत बरवाडीह प्रखण्ड के लादी गांव का दौरा किया।
तथ्य आंवेशी दल के सदस्य:-
1. स्टैन स्वामी
2. शशिभूषण पाठक
3. ग्लैडसन डुंगडुंग
4. सुनील मिंज,
5. गोपीनाथ घोष
6. दामोदर तुरी
7. राजीव पाण्डे
8. इलियास अंसारी
9. सुभाष ज्ञाली
10. तिर्थराज बिरूली
11. महादेव उरांव
दिनांक 27 अप्रैल 2010 को लादी गांव में एक घटना घटी थी जिसमें एक खरवार आदिवासी महिला को गोली लगने से मौत हो गई थी एवं एक चरवाहा घायल हो गया था। इसमें स्थानीय पुलिस द्वारा यह कहा गया था कि यह घटना पुलिस एवं माओवादियों के बीच हुए, मुठभेड़ का परिणाम हैं। इसपर तथ्य आंवेषी दल ने निम्नलिखित बिन्दुओं पर जांच किया:-
1. घटना की हकीकत
2. घटना के बाद परिवार की स्थिति
3. घटना पर पुलिस एवं प्रशासन का रवैया
4. पीड़ित परिवार के लिए मुहैया की गई सरकारी सहायता
5. घटना पर किया गया कानूनी कार्रवाई
पीड़ित परिवार का विवरणः
क्र.स. नाम उम्र लिंग व्यवसाय मृतक से संबंध
1. जयराम सिंह 28 वर्श पु0 अस्थायी फोरेस्ट गार्ड मृतक का पति
2. अमृता कुमारी 5 वर्श म0 छात्रा मृतक की पुत्री
3. सुचित कुमार 3 वर्श प0 छात्र मृतक का पुत्र
5. विभा कुमारी 1 वर्श म0 मृतक की पुत्री
6. कमेष्वर सिंह 48 पु0 अस्थायी ट्रेकर गार्ड मृतक का ससुर
7. बजवा देवी 40 म0 खेती मृतक की सास
8. सीताराम सिंह 14 प0 छात्र मृतक का देवर
9. बलेष्वर सिंह 12 प0 छात्र मृतक का देवर
10. सरिता कुमारी 10 म0 छात्रा मृतक की ननद
11. चम्पा कुमारी 8 म0 छात्रा मृतक की ननद
भूमिका:
लदी गांव लातेहार जिला मुख्यालय से 60 किलोमीटर एवं बरवाडीह प्रखण्ड मुख्यालय से 22 किलो मीटर की दूरी पर जंगल के बीच में स्थित है। गांव का डाकघर 2 किलो मीटर की दूरी पर है एवं बैंक 15 किलो मीटर की दूरी पर छिपादोहर में स्थित है। लादी गांव मुख्यताः खेरवार बहुल गांव है। इस गांव में 83 परिवार रहते हैं, जिसमें 58 परिवार खेरवार, 2 परिवार उरांव, 11 परिवार पराहिया, 10 परिवार कोरवा, 1 परिवार लोहरा एवं 1 परिवार साव है। इस गांव की जनसंख्या लगभग 400 के करीब है। गांव की अर्थव्यवस्था कृषि एवं वन पर आधारित है, जो पूर्णतः मानसून पर निर्भर करती है। यहां के खरवार समुदाय की दूसरी महत्वपूर्ण पारंपरिक पेशा पत्थर तोड़ना है, जिससे प्रति परिवार को प्रतिदिन लगभग 60 रूपये तक की अमदनी होती है।
इस गांव में एक प्राथमिक विद्यालय है जहां दो शिक्षक नियुक्त किये गये हैं लेकिन यह विद्यालय अक्सर बन्द रहता है, जिसकी वजह से बच्चों को मध्यान भोजन नियमित रूप से नहीं मिल पाता है। यह गंाव आज भी सड़क, बिजली, पेयजल, स्वस्थ्य एवं बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। इस गांव में 21 परिवार आदिम जनजातियों (पराहिया एवं कोरवा) का है, जिनके लिए विशेष सरकारी योजनाएं हैं, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय ने इन्हें अंत्योदय अन्न योजना से जोड़ने के लिए आदेश दिया है, जिसका झारखण्ड में खुल्ला उल्लंघन हो रहा हे। सरकार के गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों का लादी गांव के लोगों को कोई फायदा नहीं मिला है।
घटना का विवरण:
सन् 2008 में भारत के प्रधानमंत्री डा0 मनमोहन सिंह ने माओवाद की समस्या को देश के आंतरिक सुरक्षा लिए सबसे बड़ा खतरा एवं पूंजी निवेश के लिए चुनौती बताया था। उसी समय से देश के आदिवासी बहुल क्षेत्र जो लगभग 92 हजार वर्ग किलो मीटर को रेड काॅरिडोर (लालगढ़) के रूप में चिन्हित किया गया। इसके बाद माओवादियों को खत्म करने के नाम पर एक विशेष पुलिस आॅपरेशन शुरू किया गया जिसे ‘‘आॅपरेशन ग्रीनहंट’’ का नाम दिया गया। झारखण्ड में भारी विरोध की वजह से यह आॅपरेशन शुरू नहीं किया गया था। लेकिन अंततः 5 मार्च 2010 को सिंहभूम में आॅपरेशन ग्रीनहंट विधिवत रूप से प्रारंभ किया गया।
इसी दौरान लातेहार जिले में भी आॅपरेशन ग्रीनहंट को लागू किया गया, जिसमें 27 अप्रैल 2010 को बरवाडीह प्रखण्ड के लादी गांव के पास पुलिस एवं माओवादियों के बीच हुए मुठभेड़ के बाद पुलिस जवान लादी गांव में घुसे। शांम के लगभग 7ः30 बजे गांव के सभी लोग खाना खाने के बाद सोने की तैयारी कर रहे थे उसी समय गोली चलने की आवाज सुनाई दी। कुछ समय के बाद पुलिस ने ग्राम प्रधान कमेश्वर सिंह के घर को घेर लिया। उसके बाद उनलोगों ने चिला-चिला कर कहा कि घर से बाहर निकलो नहीं तो घर में आग लगा देंगे। इस बात को सुनकर कमेश्वर सिंह का परिवार घबरा कर घर से बाहर निकला। कमेश्वर सिंह एवं उनके पुत्र जयराम सिंह वन विभाग में अस्थायी कार्मचारी हैं जिसकी वजह से वे घर पर नहीं थे। पुलिस की आवाज सुनकर कमेश्वर सिंह का छोटा बेटा विश्राम सिंह (18) दरवाजा खोलकर बाहर निकला। इस पर पुलिस ने उसे पकड़कर पीठ के पीछे दोनों हाथ बांध दिए तथा उसपर बंदूक तान दिया।
उसके बाद पुलिस के जवान ने विश्राम सिंह के भाभी जसिंता देवी से कहा कि घर के अन्दर और कौन है? इसपर उन्होंने एक चरवाहा पुरन सिंह (62) के अन्दर सोने की बात कही। पुलिस ने उसे उठाकर बाहर लाने को कहा। जब जसिंता देवी चरवाहा को लेकर बाहर आ रहीं थी तो पुलिस ने उसके उपर गोली चला दी। गोली उसके सीने पर लगी और वह वहीं ढ़ेर हो गई। पुलिस ने फिर गोली चलायी जो पुरन सिंह के हाथ में लगा, जिससे वह घायल हो गया। लाश देखकर परिवार के सदस्य रोने-चिलाने लगे तो पुलिस ने कहा कि चुप रहो नहीं तो सबको गोली मार देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि तुम लोग माओंवादियों को खाना खिलाते हो। घटना के बाद पुलिस तुरंत लाश, घायल पूरन सिंह समेत पूरे परिवार को उठाकर ले गई तथा परिवार वालों को धमकी देते हुए कहा कि लोगों को यही बताना है कि जसिंता देवी मुठभेड़ में मारी गई एवं रैली वगेैरह नहीं करना।
गांव वालों को यह पता नहीं था कि लाश कहां लेे गया। इसलिए गांव वालों ने 28 अपै्रल 2010 को महुआटांड-डलटेनगंज मुख्य सड़क को जाम कर दिया। इसके बाद सदर अस्पाताल, लतेहार में लाश का पोस्टमाॅर्टम होने के बाद पुलिस ने विश्राम सिंह से सादा कागज पर हस्ताक्षर करवाने के बाद लाश को अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया। विश्राम सिंह 4000 रूपये पर भाड़ा में लेकर गाड़ी से लाश को गांव लाया। उसके बाद बरवाडीह के सी0ओ0 द्वारा परिवारिक लाभ योजना के तहत परिवार को 10 हजार रूपये दिया गया। 30 अप्रैल 2010 को मृतक के परिजन एवं गांव वाले जसिंता देवी के हत्या के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाने के लिए बरवाडीह थाना गये लेकिन वहां के थाना प्रभारी रतनलाल साहा ने मुकदमा दर्ज नहीं किया सिर्फ डायरी में सूचना दर्ज किया एवं उन्हें डरा-धमका कर वहां से वापस भेजा।
गांव वालों के विरोध के बाद प्रशासन ने मुआवजा के रूप में 3 लाख रूपये देने का अश्वासन दिया। पुलिस ने इसके लिए एक स्थानीय पत्रकार मनोज विश्वकर्मा (हिन्दुस्तान) को मध्यस्त के कार्य में लगाया। 14 मई 2010 को मनोज विश्वकर्मा मृतक के पति जयराम सिंह को लेकर बरवाडीह थाना गया। थाना प्रभारी विरेन्द्र राम ने जयराम सिंह को एक सादा कागज पर हस्ताक्षर कर 90 हजार रूपये का चेक लेने को कहा। जब जयराम सिंह ने सादा कागज पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया तो थाना प्रभारी ने उसे खाली हाथ गांव वापस भेज दिया।
जसिंता देवी की निर्मम हत्या के बाद उसके पति जयराम सिंह का अपने परिवार के लिए आजीविका के संसाधन जुटाने के अलावा उसे एक मां की भूमिका निभानी पड़ रही है। उसके तीन छोटे-छोटे बच्चे अमृता कुमारी (5), सुचित कुमार (3) एवं विभा कुमारी (1) है, जिनका बचपन छिन चुका है अब उनके भविश्य पर ही प्रष्न चिन्ह लग गया है।
प्राप्त तथ्य:
1 - मृतक के घर का मुवायना करने से स्पष्ट है कि उसके घर में घुसने के लिए एक ही तरफ से दरवाजा है। घर के दिवाल में लगे दो गोलियों के निशान हैं जो प्रवेश द्वार की ओर से चलायी गई है। मुठभेढ़ की स्थिति में घर के अंदर से दरवाजो की तरह गोली चलायी गई होती। जसिंता देवी के मारे जाने के बाद पुलिस घर के अंदर घुसी एवं छानबिन किया। ऐसी स्थिति में अगर घर के अंदर माओवादी होते तो उन्हें पुलिस पकड़ लेती लेकिन घर में दूसरा दरवाजा नहीं होने की वजह से उनको भागने की कोई संभावना नहीं बनती है। घटना स्थल का मुवायना करने, मृतक के परिजन, चरवाहा एवं ग्रामीणों की बातों से यह स्पष्ट होता है कि जसिंता देवी मुठभेड़ में नहीं बल्कि पुलिस द्वारा गोली मारकर हत्या की गई।
2 - पुलिस इस घटना को मुठभेड़ का स्वरूप देने का प्रयास कर रही है इसलिए जसिंता देवी की हत्या पर पीड़ित परिवार की ओर से दिया गया आवेदन पर मुकदमा दर्ज नहीं किया एवं मृतक के परिजनों को लगातार धमकी दी जा रही है।
3 - इस घटना पर प्रशासन की ओर से 3 लाख रूपये देने की बात कही गई है लेकिन जब मृतक के पति जयराम सिंह मुआवजा लेने गये तो उन्हें सादा कागज पर हस्ताक्षर कर 90 हजार रूपये लेने को कहा गया, जिसका स्पष्ट अर्थ यह है कि बरवाडीह पुलिस मुआवजा राशि को हड़पना चाहती है।
4 - इस घटना के बाद लादी गांव के सभी ग्रामीण दहशत में हैं क्योंकि घटना के बाद पुलिस किसी भी समय गांव में आती है एवं किसी को भी प्रताड़ित करती है। साथ ही साथ जब गांव वाले बाजार जाते हैं तो वहां भी उन्हें पुलिस द्वारा प्रताड़ित किया जाता है।
5 - कमेश्वर सिंह का चरवाहा पूरन सिंह उर्फ बालेश्वर सिंह इस गोली काण्ड में विकलंाग हो गया है वह अभी भी लातेहार सदर अस्पाताल में इलाज करवा रहा है, जहां वह सशस्त्र बल की निगरानी में रखा गया है। लातेहार के सिविल सर्जन अरूण तिग्गा को यह जानकारी ही नहीं था कि पूरन सिंह किस तरह का मरीज है।
सिफारिश:
1 - इस घटना की एक उच्च स्तरीय न्यायिक जांच होना चाहिए।
2ण् इस हत्या में शामिल पुलिस कर्मियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर कड़ी से कड़ी सजा दिया जाये।
3 - इस हत्या पर मुकदमा दर्ज नहीं करने वाले थाना प्रभारी पर कानूनी कार्रवाई किया जाना चाहिए।
4 - मुआवजा की राशि हड़पने का प्रयास करने वाले पुलिस पदाधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई किया जाये।
5 - इस मामले को रफादफा करने वाले डी0एस0पी0, घटना के समय तत्कालीन थाना प्रभारी रतनलाल साहा एवं वर्तमान थाना प्रभारी बिरेन्द्र राम को बर्खस्त कर उनपर कानूनी कार्रवाई किया जाये।
6 - मृतक के परिजनों को 10 लाख रूपये मुआवजा, सरकारी नौकरी एवं उनके बच्चों को निशुल्क शिक्षा एवं घायल चरवाहा पूरन सिंह को 5 लाख रूपये मुआवजा दिया जाये।
7 - मृतक के परिवार को सुरक्षा मुहैया कराया जाये।
8 - गांव में बुनियादी सुविधा मुहैया कराया जाये।
9 - ग्रामीणों पर किये जा रहे पुलिस प्रताड़ना त्वरित रोका जाना चाहिए।
10ण् यह एक घटना नहीं है, इस तरह की घटनाएं झारखण्ड में लगातार घट रही हैं इसलिए अगर इन घटनाओं को रोकना है तो माओवादियों को खत्म करने के नाम पर चल रहे आॅपरेशन ग्रीनहंट को तुरंत बंद किया जाए।
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