माओवादी पांव फैलाते जा रहे हैं, विकास भारती को अल्टीमेटम
रांची: माओवादी झारखंड में पांव फैलाते ही जा रहे हैं. पिछले दिनों जमशेदपुर के दलमा हिल में घुसपैठ दर्ज करायी तो अब स्थानीय आदिवासी युवा संगठनों को चुनौती दे रहे हैं. यही नहीं, उन्होंने तो यहां के सबसे बडे स्वयं सेवी संगठन विकास भारती को झारखंड छोड देने की चेतावनी तक डे डाली है.
हफ्ता भर पहले उग्रवादी संगठन ने जमशेदपुर शहर के निकट दलमा हिल के रेस्ट हाउस पर हमला किया और कर्मचारियों को खदेड दिया. तोड-फोड भी की. पुलिस अभी जांच शुरू ही कर पायी थी कि खबर आयी है कि विशुनपुर में उग्रवादियों ने आदिवासी छात्र संगठन के अध्यक्ष चमरा लिंडा को बंधक बना कर उसकी क्लास ली. चमरा लिंडा आदिवासी मुद्दों पर उभर रहे सबसे जुझारू आदिवासी संगठन के नेता है. चमरा का आतंक गैर आदिवासी झारखंडियों को कई बार झेलना पडा है. कई अवसर पर पुलिस की भी नहीं चली. उसी चमरा को माओवादियों ने उस वक्त बंधक बना लिया जब वह जनसंपर्क अभियान के तहत नक्सल प्रभावित कटिया पहुच गया. चमरा को बाजाप्ता डेढ घंटे तक जन-अदालत लगाकर जवाब तलब किया गया. माओवादियों के उस जन-अदालत में आसपास के गांवों के सैकडो ग्रामीण मौजूद थे. माओवादियों ने उसे चेतावनी देकर घंटे भर बाद छोड दिया.
इसी क्रम में, माओवादियों ने विशुनपुर में पिछले तीन दशकों से स्थापित विकास भारती को भी बोरिया-बिस्तर समेटने को कहा है. यह चेतावनी विकास भारती के मुख्य कर्ता धर्ता अशोक भगत को दी गई है. यूं तो भगत दावा करते रहे हैं कि उनका संगठन आदिवासी हितों के लिये काम करता है, लेकिन माओवादी संगठन ने उनके दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए उन्हें झारखंड छोड देने की चेतावनी दे दी है. अब देखना यह है कि माओवादियों के इस नई रणनीति को स्थानीय स्तर पर कितना सहयोग मिलता है. अगर ऐसा हुआ तो पुलिस के लिये मुसीबतें बढती जाएंगी. वैसे भी झारखंड के 18 जिले नक्सलवाद प्रभावित हैं. कई इलाकों में तो पुलिस थाने तो दूर पुलिसवाले घुसने से भी परहेज करते हैं.
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