बीजिंग 15 समीक्षा और मूल्यांकन
|| वासवी किड़ो, नई दिल्ली से ||
आज से ठीक 15 बरस पहले चीन की राजधानी बीजिंग में हुए विश्व महिला सम्मेलन में किए गए वायदों की समीक्षा और मूल्यांकन करने को देश भर की महिलाओं का जमावड़ा दिल्ली के बहाई भवन में हुआ. इसमें महिलाओं ने उपलब्धियों का विश्लेषण और कामयाबी पर एक निगाह डालने का काम किया गया. नावो की उपाध्यक्ष पाम राजपूत ने समीक्षा बैठक की शुरूआत करते हुए कहा कि बींिजग में जमीनी स्तर से लेकर विभिन्न समुदायों की महिलाओं की व्यापक भागीदारी ने सम्मेलन को सम्पूर्ण रूपप से वृहत् और खूबसूरत बना दिया था. लेकिन अब देखना है कि औरतों के खिलाफ हिंसा और हर तरह के भेदभाव को समाप्त करने के लिए जो वचन सरकार ने दिए थे उसका किस हद तक पालन किया गया.
एशियाई देशों की बीजिंग समीक्षा की बैठक में भारत का कोई प्रतिनिधि शामिल ही नहीं था.उन्होंने कांन्फरेंस आॅफ कमिटमेंट की याद दिलाई जो तब माधव राव सिंधिया ने किए थे. उसमें बराबरी की अवधारणा को अंगीकृत किया गया था. 12 संकट के क्षेत्र जिससे महिलाएं प्रभावित और प्रताड़ित रही हैं, को चिन्हित करने का काम किया गया.
इन 12 मसलों को क्या इन 15 सालों में पूरा किया जा सका. इसपर सरकार का ध्यान आकृष्ट करने की जरूरत है.उन्होंने कहा कि घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम 2005 तो बना लेकिन सीडाॅ के प्रावधान पूरी तरह से लागू नहीं किए जा रहे हैं. बींिजग प्लेटफार्म फाॅर एक्शन के मद्देनजर सरकार ने रिपोर्ट तैयार नहीं किया है.
राष्ट्ीय महिला आयोग की अध्यक्ष गिरिजा व्यास ने कहा है कि अब भी समाज में महिलाओं के खिलाफ ंिहसा जारी है और इसे रोकने के लिए पूर्व में किए गए उपायों का लागू किया जाना बाकी है. उन्होंने बींिजग के घोषणापत्र को लागू करने के लिए एक केंद्रीय कोषांग बनाकर विभिन्न राज्यों से उसे जोड़ने के सुझाव के तहत इसे सक्रिय बनाने की बात कही.की बात कही ताकि बींिजग के घोषणाओं प्लेटफार्म फार एक्शन की ठीक तरह से निगरानी किया जा सके.
उन्होंने कहा कि महिलाओं के मुद्दों पर अब अलग तरीके से आंदोलन की जरूरत है और घेरलू हिंसा को हर हाल में समाप्त किया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को भी उन्होंने कहा कि महिलाओं ने बहुत कुछ पाया है और उन्हें यह सारी बातें दिखनी चाहिए. ने केवल कानून बना देने से नहीें होगा.उन्होंने कहा कि नावो ने एशियाई देशों के बीच भारत को जोड़े रखने का काम किया है.उन्होंने कहा कि राष्ट्ीय महिला आयोग बीजिंग के वायदे की निगरानी का काम देखेगा.उन्होंने कहा कि अब तो पंचायतों में 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है तो पंचायत चुनाव में इसका लाभ मिलेगा.उन्होंने कहा कि औरतों की आजीविका, खाद्य सुरक्षा और हिंसा के सवाल सबसे पहले समाप्त किए जाने चाहिए.औरतों के मानवाधिकार की रक्षा के लिए बुनियादी पहल की जानी चाहिए.देश में औरतों को नए सिरे से आंदोलन करने की जरूरत है.निर्णय प्रक्रिया में औरतों की भागीदारी अब भी हाशिए का एजंेडा है.अब तक 34 कानून और 8 विधेयक आयोग ने बनाया है.यौन प्रताड़ना विधेयक और घरेलू कामगारों के अरब देश ले जाने पर रोक विधेयक भी बनाया है. सेक्शन 125 की समीक्षा की गई है और 498 ए 497 आई पी. सी. की भी समीक्षा की गई है. बलात्कार की शिकार महिलाओं के पुनर्वास और तेजाब फेंकने के बाबत अलग प्रावधान किए जाने की सिफारिश की गई है.
विधि आयोग की सदस्य कीर्ति सिंह ने कहा कि कानून में अब भी सुधार की जरूरत है.80 हजार औरतें एक साल में बर्बर व्यवहार की शिकार होती हैं. 20 प्रतिशत को ही सजा हो पाती है.मौखिक सेक्स पोरनोग्राफी आदि के लिए कानून में प्रावधान नहीं है. 1869 का ब्रिटिश कानून अब भी है. इसलिए छेड़छाड़ को परिभाषित करने की बात कही जा रही है.1993 से ही यह विधेयक पड़ा हुआ है.बलात्कार कानून में बच्चों के साथ यौन शोषण की बात 1993 से ही संशोधन करने की बात कही जा रही है.यह सब काम बाकी है.
मोहिनी गिरि आयोग की पूर्व अध्यक्षा ने कहा कि आगामी 8 मार्च को 50 प्रतिशत आरक्षण, शांति और हिंसा मुक्त वातावरण का संकल्प के लिए आहवान किया. नावो की राष्ट्ीय अध्यक्ष डा. रूथ मनोरमा ने कहा कि राष्ट्ीय महिला नीति बनाने में ही सरकार को छह साल लगे और 2001 को महिला सशक्तिकरण वर्ष घोषित किया गया लेकिन इसके प्रावधानों को अब तक लागू नहीं किया जा रहा है. सभी राज्यों में अब तक महिला नीति नहीं बनाई जा सकी है.महिलाओं के मानवाधिकार की रक्षा के लिए अब तक आयुक्त नियुक्त नहीं किए जा रहे हैं.भारत सरकार बीजिंग के कार्यक्रमों में हस्ताक्षर करने के बाद भी कोई मेकानिज्म और मशीनरी नहीं तैयार कर रही है. राष्ट्ीय परामर्श में विभिन्न राज्यों की सैकड़ों महिलाएं शामिल हैं.
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