बेबाक पत्रकार प्रभाष जोशी खामोश हो गए !
दिल्ली/रांची: भारतीय पत्रकारिता में 50 साल निष्कलंक उपस्थिति दर्ज करानेवाले विख्यात पत्रकार प्रभाष जोशी अब नहीं रहे। गुरूवार, 05 नवंबर 2009, की रात दिल का दौरा पडने से उनका निधन हो गया। उनका क्रिकेट प्रेम जग जाहिर है। 73 वर्षीय जोशी उस वख्त भी टीवी पर क्रिकेट मैच देख रहे थे। सीने में दर्द की शिकायत के बाद उन्हें एक निजी अस्पताल में पहुंचाया गया जहां करीब साढे ग्यारह बजे उन्होंने अंतिम सांसें लीं। उनके परिवार में पत्नी, दो पुत्र और पुत्री हैं।
15 जुलाई 1936
में जन्मे प्रभाष जी ने अपनी पत्रकारिता नयी दुनिया अखबार से शुरू की थी। वह जनसत्ता के संस्थापक संपादक थे। हाल के दिनां में, अपने स्तंभ के जरिये विषाक्त होती भारतीय पत्रकारिता के खिलाफ उन्होंने एक जबरदस्त अभियान छेडा था। इसकी परवाह किये बिना कि पत्रकारिता का दोहन करनेवाले इस उम्र में भी उनकी ऐसी की तैसी करने से नहीं चूकेंगे। आज, जोशी जी नहीं रहे। क्या वह अभियान भी खामोश हो जाएगा? नहीं, ऐसा हरगिज नहीं होना चाहिए। जाते जाते उन्होंने जो राहें खोलीं उसपर कदम जारी रहने चाहिए।
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अब 'कागद कोरे' पढ नहीं पाऊंगा ! |
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