ग्लोबल वार्मिंग : बढती गर्मी के नियंत्रण में महत्वपूर्ण है आपकी सहभागिता
- पंकज श्रीवास्तव -
धरती की बढती गर्मी को नियंत्रित करने में सभी की सहभागिता महत्वपूर्ण है । ग्लोबल वार्मिंग तथा उसके प्रभाव से हो रहे मौसम-परिवर्तन से हम सब पीडत हैं । विकासशील देशों के साधनहीन, निर्धन लोग एवं दूर दराज के ग्रामीण आदि ग्लोबल वार्मिंग के दुष्प्रभावों को सबसे ज्यादा झेल रहें है । ग्लोबल वार्मिंग की समस्या के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार विकसित देश हैं क्योंकि ग्रीन हाउस गैसों CO2,CH4, CF4 etc. का सर्वाधिक उत्सर्जन विकसित देशों के कल कारखानों तथा परिवहन आदि से ही होता है ।
ग्रीन हाउस गैसों (जी.एच.जी.) की मात्रा वायुमण्डल में बढती जा रही है । ये गैसें धरती से उत्सर्जित होने वाली इन्फ्रारेड किरणों को रोक लेती है। जिससे धरती की गर्मी और बढती जाती है।
धरती को सूरज से प्रति वर्ग मीटर ३४३ वाट सोलर रेडियशन प्राप्त होता है। इस उर्जा से धरती की प्राकृतिक गतिविधियों का संचालन होता है तथा धरती की गर्मी बनी रहती है। इसका अधिकांश भाग वापस अंतरिक्ष में परावर्तित तथा विकिरित हो जाती है। सूर्य से प्राप्त विकिरण की तीन गतियाँ है।
परावर्तन : लगभग ३०% विकिरण (१०३ वाट प्रति वर्ग मी०) परावर्तित होकर वापस अंतरिक्ष में लौट जाती है।
प्राकृतिक गतिविधियों का संचालनः- लगभग २०% सौर उर्जा प्राकृतिक गतिविधियों के संचालन, फोटोसिन्थेशिस एवं अन्य भौतिक, रसायनिक परिवर्तनों में व्यय होती है। सौर उर्जा का यह भाग प्राकृतिक गतिविधियों के लिए आवश्यक है। एवं इसका योगदान ग्लोबल वार्मिग में नहीं है।
इन्फ्ररेड में रूपान्तरणः- प्राप्त सौर विकिरण का लगभग ४९% हिस्सा (१६८ वाट प्र०व०मी०) धरती की सतह पर अवशोषित होकर ताप किरणों (इन्फ्रारेड) मे बदल जाती है। धरती की गर्म सतह से इन्फ्ररेड किरणों का विकिरण होता है। इस विकिरण के कुछ भाग को ग्रीन हाउस गैस सोख कर धरती की ओर वापस लौटा देती है। इससे धरती की गर्मी बढती है और धरती के ठंडा होने की प्रकिया में बाधा आती है सौर विकिरण का यह भाग ग्लोबल वार्मिग का मुख्य कारण है।
जंगलों के उजडने, कंक्रीट की सतह बढने, सडकें, परती खेत, विरान भूखंड, त्यक्त खदानों आदि से सबसे ज्यादा इन्फ्ररेड निकलती है। धरती को ठंडा रखने के लिए जरूरी है कि ग्रीन हाउस गैसों की मात्रा घटे तथा सौर उर्जा का परावर्तन बढे।
बढती गर्मी से ग्लेशियर पिघल रहे है। पहाडों की और ध्रुव प्रदेशों की बर्फ पिघल कर समुन्द्र के जल स्तर को बढा रही है। मौसम में बदलाव हो रहा है। यदि समय रहते हवा इसे नियंत्रित नही कर सके तो प्रचंड तबाही अवश्यमभावी है। एक अन्तर्राष्ट्रीय सन्धि हुई है जिसे क्योटो प्रोटोकाल के नाम से जानी जाती हैं। क्योटो प्रोटोकाल का लक्ष्य है, वर्ष २०१२ तक जी०एच०जी० का उत्सर्जन १९९० के उत्सर्जन स्तर से नीचे ले जाना। यदि यह संन्धि सफल रहती है तो वायुमंडल में जी०एच०जी० की मात्रा घटेगी और धरती का तापक्रम समान्य हो जायेगा। किन्तु सन्धि असफल रही या अंशिक सफल रही तो धरती की गर्मी में उत्तरोत्तर वृद्वि होगी। ऐसी स्थिति में हमारे पर्यावरण को अपूर्णीय क्षति हो सकती है।
अतः हम सब का कर्त्वय हो जाता है कि हम अपने स्तर से यथासंभव धरती को ठंडा करने का प्रयास करें। हम निम्नांकित कार्य कर सकते है :
वृक्ष लागायें वृक्ष बचायें : वृक्ष रोपना तथा उसे सुरक्षित बचा कर रखना धरती की ठंडक बनाये रखने के लिए बहुत ही कारगर कदम है। वनस्पतियों द्वारा सूर्य से प्राप्त विकिरण का ३०% तक परावर्तित कर दिया जाता है। विकिरण का उपयोग पौधे अनेक उपयोगी कार्यो यथा प्रकाश संशलेशन, रसों का परिचालन आदि क्रियाओ में करते हैं। पौधे कार्बन डाइऑक्स्साइड को सोखकर अन्य रसायनों का निमार्ण करते है। इस प्रकार वायुमंडल से कार्बन (जी०एच०जी०) की मात्रा घटाने में वृक्ष बहुत सहायक है। अपने आस-पास, सडकों के किनारे, आम जमीन पर, खाली पडे जमीन पर पौधे लगावें तथा उसकी सुरक्षा का उपाय भी करें। इसके अलावे अपनी घर की छत पर बगीचा विकसीत करें । रूफ टॉप गार्डन से घर की खुबसुरती भी बढेगी और घर ठंडा भी रहेगा।
उर्जा की खपत कम करें :
फिलामेंट वाले वल्बो में उर्जा की खपत ज्यादा होती है तथा वे गर्मी पैदा करते हैं। इनकी तुलना में कम उर्जा वाले फ्लुरेसेंट वल्ब, लेड आदि का इस्तेमाल करें।
ख. ज्यादा माईलेज देने वाले वाहनों का प्रयोग करें।
ग. घर में तथा कार्यालयों में उर्जा की बचत करें।
३. रिन्यूएब्ल एनर्जी का यथा संभव उपयोग करें। सौर उर्जा, पवन उर्जा, हाइड्रोइलेक्टीसिटि आदि का व्यवहार करें।
४. सूर्य विकिरण को अधिकतम परावर्तित करें।
क. अपने घर के पूरे छत पर सोलर चार्जर लगवायें इससे आप रेडियेशन को परावर्तित तो करेंगे ही साथ ही विद्युत उर्जा भी प्राप्त होगी और घर ठंडा भी रहेगा।
ख. घर, कार्यालय आदि के छतों पर सफेद चमकदार टाइल या पेन्ट अथवा चुना पुताई करवा दें।
ग. अपनें बाग या खेतों की जमीन को खाली न छोडें। खास कर गर्मी के दिनों म तो अवश्य ही खेती/बगवानी करें ताकि भूमि पौधें से ढकी रहे।
घ. टांड भूमि पर फलदार बाग अथवा बांस के बखार लगवायें।
ड. कार, बस या अन्य वाहनों को सफेद चमकीलें रंग से पेन्ट करें कम से कम वाहनों की छत को तो अवश्य ही सफेद चमकदार रखें।
५. लोगों में ग्लोबल वार्मिग के प्रति जागरूकता बढायें।
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