- Mon, 8 Feb, 2010, 11:08 pm -

Update@Sun, 7 Feb, 2010, 2 years ago, at the start of February

बाल विवाह रोकने की नयी पहल

मानव संसाधन विकास विभाग बाल विवाह और चाल्ड ट्रैफिकिंग को रोकने के लिये अपने स्तर से पहल कर रहा है विभाग प्रस्ताव तैयार कर रहा है कि बालिकाओं को स्कूल में दाखिला के वक्त अभिभावकों से इस आशय में बांड भरवाया जाय कि वे बेटियों का विवाह १८ वर्ष से पहले नहीं करे. राज्य में बढ रहे बाल विवाह को देखते हुये सरकार यह पहल करने की योजना बना रही है. योजना सही रूप से चले और अपने मक्सद को पूरा करे इसके लिये सरकार इसके साथ ही एक और योजना चालू करने की बात सोच रही है जिससे कि इस योजना को बल मिले . यह दोनों योजना वित्तीय वर्ष से शुरू की जायेगी.

दूसरी योजना वीर बुधु भगत प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत प्रतिमाह १५० रूपये देने का प्रावधान बनाया गया ह इस राशि का उपयोग छात्रायें १८ वर्ष बाद ही कर पायेंगी. सरकार के इस पहल का सभी ओर से स्वागत किया जा रहा है. यह पहल सचमूच काबीले तारिफ है. गौर करने की बात यह है कि देश में ४५ प्रतिशत से अधिक विवाह १८ वर्ष की आयु के पहले ही हो जाता है. बाल विवाह का अनुपात ग्रामीण क्षेत्रों में तो अधिक है. साथ ही झारखंड इस मामले में सबसे उपर है. आंकडों के अनुसार झारखंड में बाल विवाह का प्रतिशत सबसे अधिक है यहां ६१ प्रतिशत बच्चों की शादी १८ वर्ष से पहले ही हो जाती है. यानी, आधे से कहीं अधिक बच्चे यहा बालिग होने के पहले ही शादी कर दिये जाते हैं. यह बात अलग है कि इस शादी में बच्चों की कितनी रजा मंदी होती है. कई तो ऐसे उम्र में होते हैं जब उन्हें शादी के बारे कुछ पता ही नहीं होता है. ज्यादातर समाजिक दवाब, लडकियों को बोझ समझने कर प्रथा ही बाल विवाह के लिये जिम्मेवार है.

कई अवस्था में यह भी देखा जाता है कि एक दस बारह साल की लडकी की शादी अधेड उम्र के लडके के साथ इसलिये कर दी जाती है कि लडका इसके लिये पैसे देने को तैयार होता है. कारण चाहे जो भी हो यह बात सही है कि अन्य राज्यों की तुलना झारखंड बाल विवाह के मामले में बहुत आगे है. राजस्थान में बाल विवाह का प्रतिशत ५७, आंध्रप्रदेश में ५५, मध्यप्रदेश में ५३, उत्तरप्रदेश ५३,पश्चिम बंगाल में ५३ तथा छत्तीसगढ में ५२ प्रतिशत है. सिर्फं बाल विवाह ही नहीं चाइल्ड ट्रैफिकिंग के क्षेत्र में भी झारखंड का स्थान अव्वल है. घर में काम कराने के बहाने, दैहिक बाजार में उपयोग के बहाने यहां के श्रमिकों को ले जाय जाता है. कभी काम का लालच देकर तो कभी शादी के बहाने इन बच्चों को बहला फुसलाकर ले जाया जाता है. नतीजा बाल ट्रैफिकिंग के आंकडे यहां दिनों दिन बढते जा रहे है. सरकार इसके पहले भी इसे रोकने के लिये कई कदम उठा चुकी हैं पर नतीजा कुछ भी नहीं निकला. अब सरकार की इस नई पहल का सब तरफ से स्वागत तो किया जारहा है पर देखना अब यह है कि इस योजना के सहारे सरकार किस हद तक सफल हो पाती.
मौमिता/ संवाद मंथन

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