97 प्रतिशत लाभुक चाहते हैं डीबीटी सिस्‍टम वापस ले सरकार : सर्वे

Publisher NEWSWING DatePublished Sun, 02/25/2018 - 12:25

Subhash Shekhar

Ranchi : अक्‍टूबर 2017 में झारखंड सरकार ने रांची जिले के नगड़ी प्रखंड में पीडीएस को डायरेक्‍ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) से जोड़ा और वहां एक नया प्रयोग शुरू हुआ. सरकार के इस नये सिस्‍टम ये लोग पिछले चार महीने में त्रस्‍त हो गये हैं. इसकी वजह से लोगों को अब तक आधा राशन भी नहीं मिल पाया है. एक सर्वे के मुताबिक यहां के 97 प्रतिशत लोग चाहते हैं कि डीबीटी सिस्‍टम सरकार वापस ले. नगड़ी में डीबीटी के तहत राशन उठाने वाले लाभुकों के बीच एक आम सर्वे किया गया. सर्वे में लोगों से पूछताछ की गयी. लोगों ने बताया कि डीबीडी व्‍यवस्‍था से उन्‍हें अक्‍सर मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. जनवरी 2018 के आखिर में एक एजेंसी ने नगड़ी में डीबीटी के तहत राशन उठाव करने वाले लाभुकों के बीच जाकर यह सर्वेक्षण किया है. सर्वे में 13 गांवों को चुना गया और वहां के लोगों से एजेंसी के वॉलिंटियर्स ने रायशुमारी की.

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मात्र 3.4 प्रतिशत लोगों के पास ही है बैंक अकाउंट

सर्वे में यह बात सामने आयी कि यहां औसतन 3.4 प्रतिशत परिवारों के पास ही बैंक अकाउंट है. इनमें से 70 प्रतिशत लाभुक परिवारों ने यह भी बताया कि बैंक अकाउंट में पैसा ट्रांसफर हुआ या नहीं यह पता करने में ही कई दिन लग जाते हैं. गांव से बैंक की औसतन दूरी 4.5 किलोमीटर है. अकाउंट में बाकी का पैसा पता करने के लिए बैंक जाने के अलावे कई लोगों को स्‍थानीय प्रज्ञा केंद्र के पास भी पैसा लेने के लिए जाना पड़ता है. राशन दुकान जाने से पहले प्रज्ञा केंद्र की औसत दूरी 4.3 किलोमीटर है.

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चावल लेने में लगे 15 घंटे

अक्‍टूबर 2017 से जनवरी 2018 तक चार बार डीबीटी की राशि मिलनी थी, पर लाभुकों को औसतन केवल 2.1 बार ही राशि मिल पायी है. लाभुकों को राशन भी चार बार मिल जानी चाहिये थी. पर उन्‍हें 2.5 बार ही राशन मिला है. सर्वे के दौरान डीबीटी के लाभुकों ने बताया कि जन वितरण प्रणाली का चावल खरीदने गये तो उन्‍हें बैंक, प्रज्ञा केंद्र और राशन दुकान जाने और वहां कतार में खड़े होने में औसतन 12 घंटे लगे. करीब 28 प्रतिशत लाभुकों ने बताया कि चावल लेने में 15 घंटे से अधिक का समय लगा.

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नगड़ी के लोग डीबीटी सिस्‍टम से हैं काफी नाराज

सर्वे के दौरान 97 प्रतिशत लोगों ने यह कहा कि डीबीटी के बिना पीडीएस की पुरानी सिस्‍टम ही सही थी और मांग की कि डीबीटी योजना वापस की जाय. साथ ही एक रुपये प्रति किलो चावल की व्‍यवस्‍था पुन: चालू की जाय. नगड़ी के लोग डीबीटी सिस्‍टम से काफी नाराज हैं और डीबीडी के खिलाफ कई बार विरोध प्रदर्शन भी कर चुके हैं. डीबीडीट सिस्‍टम के तहत लाभुकों को पहले अपनी राशन की सब्सिडी नकद के रूप में बैंक से लेनी पड़ती है और उसके बाद रशन दुकान से 32 रुपये प्रति किलो की दर से चावल खरीदना पड़ता है. पहले वे सीधा राशन दुकान से 1 रुपया प्रति किलो की दर से चावल खरीद पाते थे.

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