16 दिन रिम्स के मेडिसिन वार्ड में इलाज कराया, यूरोलॉजी विभाग ने भर्ती करने से इंकार किया, आखिर में जिंदगी की जंग हार गया राजेन्द्र राम (देखें वीडियो)

Publisher NEWSWING DatePublished Sun, 02/11/2018 - 13:20

Saurabh Shukla

Ranchi : वो अपने पैरों पर चल कर राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में इलाज के लिए आया था. बस उसकी एक ही इच्छा थी कि वह जल्द ठीक हो जाये ताकि अपने परिवार की गाड़ी खींच सके. लेकिन उसे क्या पता था कि वो अपने पैरों पर नहीं बल्कि कंधो पर निकल कर बाहर जाएगा. गोमिया आईइएल कॉलोनी निवासी 60 वर्षीय राजेंद्र राम का पेशाब के रास्ते खून निकल कर बर्बाद हो रहा था. इनका इलाज मेडिसिन वार्ड में डॉ उमेश प्रसाद के यूनिट में चल रहा था. 16 दिन से मरीज के स्वास्थ्य में सुधार न होता देख पत्नी आरती देवी ने डॉक्टरों से गुहार लगाया कि इन्हें यूरोलॉजी में भर्ती किया जाये. मेडिसिन डिपार्टमेंट से यूरोलॉजी के डॉक्टर अरशद जमाल के पास रेफेर किया लेकिन उन्होंने मरीज को भर्ती लेने से मना कर दिया. आखिरकार 11 फ़रवरी को तड़के तीन बजे उसकी मौत हो गयी.

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स्वास्थ्य मंत्री से लगायी गुहार, बदले में मिली मौत

रुंधे गले और नम आंखों से मृतक राजेंद्र राम की पत्नी और पुत्र पंकज ने कहा कि आठ फ़रवरी को स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चनद्रवंशी रिम्स आये थे. उन्हें भी पिता की हालत से अवगत कराया था. गुहार लगाया कि हुजूर एक बार आप कह देंगे तो सब ठीक हो जाएगा. उन्होंने रिम्स निदेशक को बेहतर इलाज के लिए कहा लेकिन गरीब आदमी की सुनता कौन है. स्वास्थ्य मंत्री की बातों को दरकिनार कर डॉक्टरों ने वही किया जो उनके मन में आया. आज घर का एक मात्र कमाने वाला सदस्य इस दुनिया से चला गया. सरकार गरीबों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने की बात करती है, लेकिन ऐसा होता तो गरीब राजेंद्र राम आज जिन्दा होता.

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रिम्स निदेशक ने  दिया था मरीज के हरसंभव इलाज का भरोसा

रिम्स निदेशक डॉ आरके श्रीवास्तव ने कहा था कि प्रबंधन राजेंद्र राम के इलाज का हरसंभव प्रयास करेगी. उन्होंने कहा था जिनके देखरेख में मरीज का इलाज चल रहा है उनसे भी बेहतर इलाज के लिए कहेंगे. लेकिन ये केवल आश्वासन मात्र ही था. यदि निदेशक की बातों का पालन रिम्स के डॉक्टरों ने किया होता तो आज राजेंद्र राम जिन्दा होते.

निति आयोग की रिपोर्ट में झारखण्ड में स्वास्थ्य सुविधा को बेहतर होने का दवा किया गया. वार्षिक स्तर पर प्रगति के मामले में झारखण्ड को सबसे आगे बताया गया. लेकिन जब लोगों की मौत झारखंड के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में तड़प कर हो जाए तो आप समझ सकते हैं कि राज्य के अन्य अस्पतालों की क्या हालत होगी.

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