मृत बेटे के संरक्षित शुक्राणुओं का इस्तेमाल कर पुणे की राजश्री पाटिल बनी दादी

Publisher NEWSWING DatePublished Thu, 02/15/2018 - 16:22

Pune: राजश्री पाटिल आज दो जुड़वां बच्चों की दादी बन खुशी से फुली नहीं समा रहीं. पुणे में रहने वाली राजश्री पाटिल की जिंदगी में दो साल पहले उस वक्त अप्रत्याशित मोड़ आया था, जब जर्मनी में उनके बेटे प्रथमेश पाटिल की कैंसर से मौत हो गई थी. लेकिन अब उनकी खुशी का ठिकाना नहीं है. प्रथमेश के संरक्षित शुक्राणुओं का इस्तेमाल कर राजश्री सरोगेसी (किराये की कोख) विधियों के जरिए पैदा हुए जुड़वां बच्चों की दादी बन गई हैं.

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डॉक्टरों ने प्रथमेश के शुक्राणुओं का एक दाता के अंडाणुओं से मेल कराया

पुणे के सह्याद्रि अस्पताल के डॉक्टरों ने इन-विट्रो प्रजनन (आईवीएफ) प्रक्रिया का पालन किया और भ्रूण के निर्माण के लिए प्रथमेश के शुक्राणुओं का एक दाता के अंडाणुओं से मेल कराया. जर्मनी में प्रथमेश की मौत से बहुत पहले ही उसके शुक्राणु निकाल कर संरक्षित कर लिए गए थे. बहरहाल, प्रथमेश के शुक्राणुओं से दाता के अंडाणुओं के मेल के बाद भ्रूण एक सरोगेट मां के गर्भ में अंतरित कर दिया गया, जिसने जुड़वां बच्चों - एक लड़का और एक लड़की - को जन्म दिया.

सितंबर 2016 में प्रथमेश ने दम तोड़ दिया

राजश्री ने बताया कि 2010 में उनका बेटा मास्टर्स डिग्री हासिल करने के लिए जर्मनी गया था, जहां उसे ब्रेन ट्यूमर हो गया. उन्होंने कहा, यह खबर हमारे परिवार के लिए सदमा थी. जर्मनी में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि प्रथमेश की कीमोथेरेपी और विकिरण प्रक्रिया शुरू की जाए. उन्होंने उससे अपने शुक्राणु संरक्षित करने को भी कहा ताकि इलाज के बाद उसके शरीर पर किसी नकारात्मक प्रभाव को रोका जा सके.’’ बहरहाल, पुणे के एक स्कूल में अध्यापन कार्य करने वाली राजश्री ने बताया कि उसे बेहोशी और ऐंठन हुई और आंखों की रोशनी भी चली गई. उन्होंने कहा, ‘‘उसे चौथे चरण का कैंसर होने की बात पता चलने पर मेरी पहली कोशिश थी कि प्रथमेश को जर्मनी से भारत लाया जाए.’’ परिवार 2013 में प्रथमेश को भारत लेकर आया और उसे मुंबई के एक अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन सेहत में थोड़ा-बहुत सुधार होने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी और सितंबर 2016 में उसने दम तोड़ दिया.

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राजश्री को अपना बेटा वापस पाने की चाह थी

प्रथमेश की मौत के बाद राजश्री को अपना बेटा वापस पाने की चाह थी. लिहाजा, उन्होंने जर्मनी में उस शुक्राणु कोष से संपर्क किया, जहां प्रथमेश के शुक्राणुओं को संरक्षित रखा गया था. औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उसके शुक्राणु भारत लाए गए. राजश्री ने अपने बेटे के शुक्राणुओं की मदद से आईवीएफ प्रक्रिया पूरी करने के लिए सह्याद्रि अस्पताल से संपर्क किया. अस्पताल में आईवीएफ की प्रमुख सुप्रिया पुराणिक ने बताया कि उन्हें खुशी है कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी लोगों के चेहरों पर मुस्कान ला रही है.

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