ऐसे समझिए 2018-19 के झारखंड के बजट को

Publisher NEWSWING DatePublished Tue, 01/23/2018 - 18:32

Ranchi : झारखंड सरकार ने वित्तीय वर्ष 2018-19 का बजट सदन में पेश किया. सीएम  रघुवर दास ने इसे न्यू झारखंड का बजट करार दिया है. उन्होंने दावा किया कि इससे राज्य में आर्थिक स्थिति मजबूत होगी जिसका असर राज्य के विकास में प्रतिबिंबित होगा. बजट में ग्रामीण विकास, कृषि और शिक्षा क्षेत्र पर सबसे अधिक फोकस किया गया है. आइये जानते हैं कि ऐसा क्या है इस बजट में जो सीएम इसे न्यू झारखंड का बजट बता रहे हैं.

बजट 2018-19 के हाईलाइट्स

- वित्तीय वर्ष 2018-19 में ‘‘न्यू इण्डिया न्यू झारखण्ड’’ के उद्देश्यों को पूरा किए जाने का संकल्प लिया गया है. इसके तहत हर खेत को पानी, हर हाथ को काम तथा हाथ से हाट तक व्यवस्था लागू करने का लक्ष्य रखा गया है.

- वित्तीय वर्ष 2017-18 के बजट भाषण में की गईं कुल 142 घोषणाओं में 121 पूर्ण हो चुकी हैं तथा शेष 21 के कार्यान्वयन की प्रक्रिया चल रही है.

आगामी वित्तीय वर्ष के लिए विभिन्न माध्यमों से कुल 1,151 सुझाव प्राप्त हुए, जिसमें से 38 मुख्य सुझावों का चयन किया गया है.

योजनाओं में गतिशीलता लाने के उद्देष्य से छोटी-छोटी योजनाओं को अमब्रेला स्कीम में समाहित किया गया है. इससे जहाँ एक ओर बजट शीर्षों की संख्या कम होगी, वहीं दूसरी ओर विभागों को योजना कार्यान्वयन में ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी रहेगी.

आगामी वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए 80,200 करोड़ रुपये का वार्षिक बजट का आकलन है, जिसमें राजस्व व्यय 62,744.44 करोड़ रुपये तथा पूंजीगत व्यय 17,455.56 करोड़ रुपये का है. वित्तीय वर्ष 2017-18 की तुलना में वित्तीय वर्ष 2018-19 में बजट की कुल वृद्धि 5.98 प्रतिशत है.

वित्तीय वर्ष 2018-19 के कुल बजटीय उपबंध में स्थापना आदि व्यय 33,697 करोड़ रुपये एवं स्कीमों के लिये 46,503 करोड़ रुपये रखे जाने का प्रस्ताव है.

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स्कीमों के 46,503 करोड़ रुपये के प्रस्ताव का सेक्टरगत विवरण

Sectorwise Budget
Sectorwise Budget

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- शिक्षा प्रक्षेत्र में सबसे ज्यादा 10,873.74 करोड़ रुपये का उपबंध प्रस्तावित है, जो कुल वार्षिक बजट का 3.29 प्रतिशत है. इसमें उच्च शिक्षा के लिए 1,219.96 करोड़ रुपये शामिल है.

- तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास प्रक्षेत्र में चालू वित्तीय वर्ष में 704.00 करोड़ रुपये के बजटीय प्रावधान को आगामी वित्तीय वर्ष में बढ़ाकर 831.40 करोड़ रुपये किया गया है.

- ग्रामीण प्रक्षेत्र में 11,854.10 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित है, जो कुल वार्षिक बजट का 14.71 प्रतिशत है. विगत वर्ष से ग्रामीण प्रक्षेत्र में कुल बजटीय उपबंध का 13.18 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है.

- कृषि, पशुपालन, सहकारिता, जल संसाधन तथा इससे सीधे जुड़ी मांगों के तहत कृषि एवं संबद्ध कार्यों को समेकित करते हुए आगामी वित्तीय वर्ष में कृषि बजट 5,807.64 करोड़ रूपये का अनुमानित है. वित्तीय वर्ष 2017-18 के 5,375.22 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान की तुलना में आगामी वित्तीय वर्ष के लिए प्रस्तावित ‘‘कृषि बजट’’ में 8.05 प्रतिशत की वृद्धि प्रस्तावित है.

- महिलाओं के विकास, विशेष रूप से सखी मण्डलों को सशक्त और जीवन्त संस्था के रूप में विकसित करने का निर्णय. सखी मण्डलों के माध्यम से राज्य में उपयोग किए जानेवाले अण्डा, सब्जी, दूध, चादर, तौलिया, स्कूली गणवेश, हस्तशिल्प, तसर एवं लाह पर आधारित उत्पादों को स्केल-अप करके उनका स्थानीय बाजार में विपणन सुनिश्चित किया जाएगा.

- वित्तीय वर्ष 2018-19 में 8,194.59 करोड़ रूपये का ‘‘जेन्डर बजट’’ प्रस्तावित है, जो चालू वित्तीय वर्ष 7,684.51 करोड़ रूपये की तुलना में 6.64 प्रतिशत की वृद्धि है.

- ‘‘अनुसूचित जनजाति क्षेत्र तथा अनुसूचित जाति विकास बजट’’ प्रस्तुत किया जाएगा. राज्य में विकास से संबंधित विभिन्न स्कीमों, जिनमें अनुसूचित जनजाति क्षेत्र एवं अनुसूचित जातियों के विकास का वर्गीकरण संभव है, के लिए कुल प्रावधानित राशि 46,503 करोड़ रुपये होती है, जिसमें से अनुसूचित जनजाति क्षेत्र के लिए 20,326.17 करोड़ रुपये (43.71 प्रतिशत) कर्णांकित है. यह चालू वित्तीय वर्ष में 18,026 करोड़ रुपये की तुलना में 2,300.17 करोड़ रुपये अधिक है. इसी तरह अनुसूचित जातियों के विकास के लिए वर्ष 2018-19 में 4,083.89 करोड़ रुपये (8.78 प्रतिशत) व्यय किए जाने का प्रस्ताव हैं.

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इस तरह अनुसूचित जनजाति क्षेत्र एवं अनुसूचित जाति विकास बजट का कुल आकार 24,410.06 करोड़ रुपये होती है, जो स्कीमों के लिए निर्धारित कुल बजटीय का 52.49 प्रतिशत है.

आगामी वित्तीय वर्ष में निम्नलिखित 5 बिन्दुओं पर विशेष फोकस किया जाएगाः-

•           ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों की आय को दोगुणा करना.
•           बेरोजगार एवं स्वरोजगार के अधिक से अधिक अवसर पैदा करना.
•           अनुसूचित जनजाति/जाति एवं अभिवंचित वर्गों का विकास.
•           महिला सशक्तिकरण.
•           पिछड़े जिलों/प्रखण्डों का समेकित विकास.

इसके साथ ही, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण तथा आधारभूत संरचना यथा- पेयजलापूर्ति, नगरीय विकास, गांव को सड़क से जोड़ना तथा प्रत्येक घर में विद्युत आपूर्ति पहुंचाने पर भी केन्द्रित रहेगा.

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