हेबर के इज ऑफ डूइंग बिजनेस से संबंधित पैसे के भुगतान कराने के एवज में सीएस ने अपने बेटे के बिजनेस में निवेश का डाला था दबाव !

Publisher NEWSWING DatePublished Sat, 01/20/2018 - 10:17

हेबर के ट्वीट के बारे में मंत्री सरयू राय को थी जानकारी, सीएम को लिखा था लेटर, पांच महीने पहले का है मामला

Ranchi: इंडसन बैंक के पूर्व हेड कॉर्पोरेट हेबर के ट्वीट से राजबाला वर्मा एक और नयी परेशानी में फंसी नजर आ रही हैं. हेबर ने सीएम राजबाला वर्मा पर आरोप लगाते हुए कहा था कि उनके फंसे पैसे निकालने के एवज में सीएस डील कर रही हैं और अपने बेटे के बिजनेस में निवेश करने का उनपर दबाव डाल रही हैं. क्या कोई इसमें उनकी मदद कर सकता है.

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क्या है ट्वीट में

हेबर ने अपने एक ट्वीट में लिखा था कि मुख्य सचिव अपने बेटे के बिजनेस में निवेश के लिए उनपर दबाव डाल रही थीं. दरअसल अद्वैत हेबर का इज ऑफ डूइंग बिजनेस से संबंधित पैसे का भुगतान अटका पड़ था और उनका पेमेंट कराने के एवज में सीएस चाहती थीं कि हेबर उनके बेटे के बिजनेस में निवेश करें. यह मामला करीब पांच महीने पहले का है. एक हिंदी दैनिक अखबार में छपी रिपोर्ट के अनुसार इस संबंध में मंत्री सरयू राज ने मुख्यमंत्री रघुवर दास को 25 अगस्त 2017 को ही लेटर लिखा था. जिसमें उनहोंने सीएम से हेबर के इस टवीट को गंभीरता से लेने का आग्रह किया था. सरयू राय ने हेबर के पद और एक्सपीरियेंस का हवाला देते हुए सीएम को लिखे पत्र में कहा था कि हेबर के इस ट्वीट को गंभीरता से लेने की जरूरत है क्योंकि उनके द्वारा किया गया ऐसा ट्वीट कोई आम अथवा सामान्य बात नहीं है. उल्लेखनीय है कि हेबर इंडसन बैंक के हेड कॉरपोरेट, एबीएन आम्रो के पूर्व हेड सहित कई संस्थानों में काम कर चुके हैं.  

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सीएस को लेकर गहमागहमी का दौर जारी

राज्य में सीएस को लेकर गहमागहमी का दौर जारी है. विपक्ष जहां सीएस को हटाने की मांग पर अड़ा है वहीं मंत्री सरयू राय और सीएम रघुवर दास के बीच भी सीएस को लेकर मतभेद नजर आ रहे हैं. सीएम जहां राजबाला वर्मा के बचाव में खड़े नजर आते हैं, वहीं सरयू राय सीएस के खिलाफ नये-नये उदाहरण सामने ला रहे हैं कि सीएस को लेकर सरकार क्यों सख्त न हो.

बैठक में मौजूद विधायकों ने सरयू और रघुवर के बीच हुए तनाव की पुष्टी की

बुधवार की रात एनडीए विधायकों की एक मीटिंग हो रही थी. इसमें भी कुछ ऐसा ही नजारा था. जिसमें चारा घोटाले में राजबाला का नाम आने के बाद उन पर फैसला किया जाना था. टेलीग्राफ के अनुसार उस बैठक में मौजूद तीन विधयाकों ने सरयू और रघुवर के बीच हुए तनावपूर्ण बहस की पुष्टि की है. रघुवर दास ने राजबाला का बचाव करते हुए माना था कि सीएस अच्छा काम कर रही हैं. इसलिए उन्हें हटाने की कोई जरुरत नहीं. इस पर सरयू राय गरम हो गए और सीएस के खिलाफ कई गड़बड़ियों का उदाहरण देने लगे. राय ने कहा कि राजबाला जब रोड कंस्ट्रक्शन डिपार्टमेंट में सचिव थीं तो रांची-रामगढ़ (वाया पतरातु) सड़क में उन्होंने 300 करोड़ के बजाये 400 करोड़ रुपये खर्च किये थे. उस प्रोजेक्ट के एक्स्ट्रा 100 करोड़ के खर्च को कैबिनेट में एप्रूव किया था. उस वक्त भी मैंने इसका विरोध किया था. विकास आयुक्त अमित खरे को मामले को देखने की जिम्मेदारी सौंपी गयी थी, मगर उन्होंने यह कहते हुए मना कर दिया था कि वह अपने ही बॉस के खिलाफ जांच करने में असमर्थ हैं.

सरयू राय ने सीएस के खिलाफ दिए कई उदाहरण

इसके अलावे सरयू राय ने सीएस के खिलाफ कई और उदाहरण भी दिये. उन्होंने कहा कि राशन और आधार कार्ड को लिंक करने और राशन रोकने का निर्णय और आदेश राजबाला वर्मा ने ही दिया था. खाद्य आपूर्ती मंत्री ने मुख्यमंत्री से यह भी कहा कि साहेबगंज-गोविंदपुर हाईवे का निर्माण अब तक सुनिश्चित नहीं किया जा सका है, जबकि प्रधानमंत्री मोदी ने खुद उस प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया था. यह सीएस कार्य असक्षमता को दिखाता है. द टेलीग्राफ ने उक्त रिपोर्ट में लिखा है कि मुख्यमंत्री से जब इस बारे में पूछा गया तो वे बस मुस्कुरा के आगे चल दिये. सरयू राय ने भी दोनों नेताओं के बीच हुए बहस के बारे में कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया. हालांकि उस मीटिंग में मौजूद तीन विधायकों ने सरयू राय और रघुवर दास के बीच हुए तनावपूर्ण बहस की पुष्टि की.

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