कुर्मी को आदिवासी में शामिल करने की अनुशंसा के विरोध में आदिवासी विधायकों के जलाये गये पुतले

Publisher NEWSWING DatePublished Sat, 02/17/2018 - 21:22
कुर्मी को आदिवासी में शामिल करने की अनुशंसा के विरोध में आदिवासी विधायकों की शव यात्रा निकाली गयी

Ranchi : कुर्मियों को आदिवासी जनजाति में शामिल किये जाने की अनुशंसा करने वाले सांसदों और विधायकों के प्रति आदिवासी संगठनो में आक्रोश बढ़ता जा रहा है. एक ओर कुर्मी समाज के नेता आदिवासी सूची में शामिल करने के लिए सरकार और विधायकों पर दबाव बनाने में सफल हो रहे हैं, वहीं आदिवासी समाज के धार्मिक संगठनों के निशाने पर सरकार के साथ साथ विपक्षी दल के नेता रहे हैं. विधायकों और सांसदों द़वारा की गयी अनुशंसा के विरोध में केन्द्रीय सरना समिति के बैनर तले आदिवासी विधायकों की शव यात्रा निकाली गयी. समिति के द्वारा झामुमो नेता हेमंत सोरेन,  ताला मरांडी , दशरथ गगरई,  विकास मुंडा,  शशि भूषण समड, नियल पूर्ति की आदिवासी परंपरा के अनुसार शव यात्रा निकाली गयी. शव यात्रा लाइन टैंक रोड , नगर निगम होते हुए अल्बर्ट एक्का  चौक तक पहुंची जहां इन आदिवासी विधायकों का पुतला दहन किया गया.

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अनुसूचित जाति में कुरमी और तेली समाज को नहीं होने दिया जाएगा शामिल


 शव यात्रा में शामिल समिति के केंद्रीय अध्यक्ष फूलचंद तिर्की ने कहा कि  आदिवासी अनुसूचित जाति का लाभ लेने के लिए कुरमी और तेली समाज आज आदिवासी बनना चाहता हैं. यह आदिवासी समाज के धर्म को समाप्त करने की साजिश है, जिसे आदिवासी समाज किसी भी कीमत पर पूरी नहीं होने देगा. केंद्रीय सरना समिति के कार्यकारी अध्यक्ष बबलू मुंडा ने कहा  कि अनुसूचित जाति में कुरमी और तेली समाज को  शामिल नहीं होने दिया जाएगा . राज्य में इस तरह की कोशिश आरक्षण का लाभ लेने के लिए की जा रही है.  जगलाल पहान ने कहा कि कुर्मी और तेली आदिवासी का लाभ लेने के लिए अनुसूचित जाति में शामिल होना चाहते हैं,  जबकि कुर्मियों की धार्मिक परंपरा आदिवासियों से अलग है. आदिवासी समाज में रूढ़िवादी परंपरा के अनुरूप नियम के तहत पूजा पाठ किया जाता है. वहीं कुर्मी और तेली समाज पुरोहित के  द़वारा  जन्म से लेकर मृत्यु संस्कार तक अनुष्ठान कराते हैं.  उऩ्ंहोंने आरेाप लगाया कि कुर्मी और तेली समाज आदिवासियों का आरक्षण एवं जमीन हथियाना चाहते है. जिसे किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने दिया जायेगा. शव यात्रा कार्यक्रम में केंद्रीय सरना समिति के केंद्रीय अध्यक्ष फूलचंद तिर्की, कार्यकारी अध्यक्ष बबलू मुंडा,  महासचिव संजय तिर्की ,जगलाल पहान, शोभा कच्छप, मेधा उरांव,संजय गाड़ी, रवि उरावं मुख्य रूप से शामिल थे.

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