सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर फर्जी मुठभेड़ मामलों में SIT को लगाई फटकार, कहा- 'CBI गंभीर नहीं'

Publisher NEWSWING DatePublished Tue, 01/16/2018 - 18:55

New Delhi : सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर में कथित फर्जी हत्याओं और फेक एनकाउंटर्स के मामलों में प्राथमिकी दर्ज नहीं करने पर मंगलवार को केन्द्रीय जांच ब्यूरो के विशेष जांच दल को कड़ी फटकार लगाई. आरोप है कि सेना, असम राइफल्स ओर पुलिस ने सशस्त्र घुसपैठ से प्रभावित राज्य में इस तरह की वारदात कीं. न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल और न्यायमूर्ति उदय यू ललित की पीठ ने विशेष जांच दल को इन मामलों में 30 और प्राथमिकी 30 जनवरी तक दर्ज करने का निर्देश दिया. इससे पहले, विशेष जांच दल ने पीठ को सूचित किया था कि उसने अभी तक 12 प्राथमिकी दर्ज की हैं.

आदेश के बावजूद अभी तक सारी प्राथमिकी दर्ज क्यों नहीं की गयीं : कोर्ट

पीठ ने जांच दल को निर्देश दिया कि जिन 12 मामलों में अब तक प्राथमिकी दर्ज की गयी है, उनकी जांच का काम इस साल 28 फरवरी तक पूरा करके न्यायालय में अंतिम रिपोर्ट दाखिल की जाये. विशेष जांच दल की प्रथम स्थिति रिपोर्ट के अवलोकन के बाद पीठ ने उससे अनेक तीखे सवाल पूछे. पीठ ने जानना चाहा कि पिछले साल 14 जुलाई के आदेश के बावजूद अभी तक सारी प्राथमिकी दर्ज क्यों नहीं की गयीं.

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नाराज कोर्ट ने मामले की सुनवाई 12 मार्च के लिये स्थगित कर दी

न्यायालय ने निर्देश दिया कि विशेष जांच दल द्वारा उसके समक्ष अब दाखिल की जाने वाली सारी स्थिति रिपोर्ट को सीबीआई के निदेशक की स्वीकृति

Man
Manipur Protest against fake encounters

होनी चाहिए. शीर्ष अदालत ने जांच ब्यूरो के निदेशक से कहा कि वह जांच की प्रगति की निगरानी करें. न्यायालय ने इसके साथ ही इस मामले की सुनवाई 12 मार्च के लिये स्थगित कर दी. न्यायालय ने इससे पहले कहा था कि ऐसा लगता है कि मणिपुर में कथित फर्जी मुठभेड़ों से संबंधित मामलों की जांच को विशेष जांच दल गंभीरता से नहीं ले रहा है.

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राज्य में कानून का उल्लंघन कर 1528 हत्याओं का आरोप

न्यायालय ने पिछले साल 12 जुलाई को इन मामलों की जांच के लिये विशेष जांच दल गठित किया था. इसमें सीबीआई के पांच अधिकारियों को शामिल किया गया था. न्यायालय ने मणिपुर मे 'कानून का उल्लंघन कर की गयी हत्याओं' (न्यायेतर) के मामलों में प्राथमिकी दर्ज करने और इनकी जांच का आदेश दिया था. न्यायालय ने इस राज्य में 1528 न्यायेतर हत्याओं की जांच के लिये दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान पिछले साल जुलाई में 81 प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था. इन मामलों में, 32 मामले जांच आयोग, 32 मामले न्यायिक आयोग और उच्च न्यायालयों की जांच, 11 मामलों में मानवाधिकार आयोग मुआवजा दे चुका है और छह मामलों में शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति संतोष हेगडे की अध्यक्षता वाले आयोग ने जांच की थी, शामिल हैं.

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