झारखंड के 90 ICSE स्कूलों में से 75 को माइनोरिटी का दर्जा, यहां नहीं पढ़ पायेंगे गरीबों के बच्चे 

Publisher NEWSWING DatePublished Thu, 01/04/2018 - 20:12

Kumar Gaurav, Ranchi: आईसीएसई बोर्ड के स्कूलों का नाम सुनकर ये साफ हो जाता है कि स्कूल फीस काफी ज्यादा होगी. गरीबों के बच्चों के लिए वहां पढ़ाई करना महज एक सपना है, जिसे पूरा करना शायद ही संभव हो. सरकार ने आरटीई लाकर इस सपने को पूरा कराने का एक प्रयास जरुर किया. जिसके तहत हर स्कूलों को अपने यहां 25 प्रतिशत गरीब और अभिवंचित बच्चों को नामांकित करना था. पर एक कहावत है शिक्षा व्यवसाय का एक ऐसा जरिया है, जहां पैसे पूरे लिए जाते हैं और गारंटी देने की भी कोई जरुरत नहीं है. शिक्षा एक व्यवसाय हो चुका है और इन व्यवसायियों ने आरटीई से बचने के भी उपाय निकाल लिए हैं. जिसके तहत अब उन्हें किसी को भी फ्री में शिक्षा देने की जरुरत नहीं पडेगी. राज्य सरकार और शिक्षा विभाग दोनों की आंखों में धूल झोंककर शहर के बहुत सारे स्कूलों ने अपनी माइनोरिटी का दर्जा प्राप्त कर अपनी आय का 25 प्रतिशत हिस्सा बचा लिया है. इन स्कूलों में अभिभावकों से मोटी फीस वसूली जा रही है.

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89 में से सिर्फ 57 स्कूलों को डीएसई की नोटिस
सिर्फ रांची में ही 89 सीबीएसई और आईसीएसई के स्कूल हैं. पर डीएसई द्वारा जारी नोटिस में सिर्फ 57 स्कूलों के नाम दर्ज हैं, जिन्हें आरटीई अधिनियम 2009 के अंतर्गत कक्षा प्रवेश में 25 प्रतिशत  नामांकन दर्ज करने हैं. प्रवेश कक्षा में पड़ोस के स्कूलों के सीमा क्षेत्र 6 किमी के अंतर्गत आने पर नामांकन दर्ज करने हैं. ये लाभ उन लोगों को मिलना है जिनकी आय 72 हजार से कम है.

कुल 906 सीटें आरक्षित, अधिकतर रह जाते हैं खाली
रांची जिला में कुल 906 सीटें इस अधिनियम के तहत आरक्षित रखें गए हैं. पिछले कुछ सालों के आंकड़ों पर गौर करें तो इन स्कूलों में अधिकतर सीटें खाली रह जाती है. इस मामले की जानकारी प्राप्त करने पर पता चला कि इन सीटों पर नामांकन दर्ज कराने के लिए जो कागजात जमा करने होते हैं उनमें 72 हजार रुपये अधिकतम का आय जमा करना है. पर आय प्रमाण पत्र बनाने वाले 92 हजार से कम का आय प्रमाण पत्र बनाने को तैयार ही नहीं होते, जिससे बच्चों का नामांकन नहीं हो पाता और सीटें खाली रह जाती है.

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क्या कहते हैं अधिकारी
जिला शिक्षा अधीक्षक शिवेन्द्र कुमार इस संदर्भ में कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट का ये गाइडलान है कि जो भी संस्थान माइनोरिटी द्वारा स्थापित किये जाते हैं माइनोरिटी कहलाते हैं. माइनोरिटी कमिशन से मान्यता प्राप्त करते हैं. भाषा और धर्म के आधार पर इन्हें दर्जा मिलता है. संविधान की धारा 29 ई के तहत दर्जा मिलता है. ऑक्सफोर्ड स्कूल का नाम इस लिस्ट नहीं हैं. इस सवाल पर वे कहते हैं कि होना चाहिए अगर नहीं है, तो इसकी जानकारी नहीं है.

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