मेदांता अस्पताल ने गरीब मरीज को पैसों के खातिर बनाया बंधक

Publisher NEWSWING DatePublished Thu, 02/08/2018 - 19:16

Ranchi : राजधानी के एक निजी अस्पताल (मेदांता) ने गरीब बीपीएल धारी मरीज को इलाज का बिल न चुकाने के नाम पर बंधक बना लिया है. सुत्रों की माने तो लगभग एक माह से अस्पताल प्रबंधन ने मरीज को बंधक बनाकर रखा है. मरीज के परिजन मुख्यमंत्री असाध्य रोग योजना के तहत दो लाख उन्तीस हजार पांच सौ पच्चीस रूपये का भुगतान करने के बाद जमीन बेचकर डेढ़ लाख रूपये नगद का भी भुगतान किया हैं. मरीज के परिजन ने लगभग चार लाख रूपये का भुगतान किया. इसके बाद भी अस्पताल प्रबंधन मरीज को मुक्त करने के लिए 10 लाख की मांग कर रहा है. मरीज के परिजन इतनी मोटी रकम दे पाने में असमर्थ हैं. परिजनों ने मरीज की रिहाई को लेकर मुख्यमंत्री रघुवर दास को एक पत्र  लिखा है. शाम तक परिजनों से संपर्क करने पर पता चला कि मामले को लेकर प्रबंधक से बातचीत चल रही है.

क्या है मामला

लातेहार जिले के चोपे गांव के रहने वाले मोहम्मद अय्यूब अली उर्फ़ अय्यूब मियां को लगभग दो माह इरबा स्थित मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था. परिजनों के अनुसार उस समय डॉक्टर ने इलाज का खर्च डेढ़ लाख रूपये बताया था. परिजन जमीन बेचकर डेढ़ लाख रूपये जमा कर दिया. इसके बाद अस्पताल प्रबंधन को बताया गया कि मरीज बीपीएल धारी है. तब प्रबंधन ने कहा कि सरकारी प्रावधान के तहत बीपीएल की राशि आ जाने के बाद डेढ़ लाख रूपये वापस कर दिया जाएगा. इलाज के बाद दो लाख उन्तीस हजार पांच सौ पच्चीस रूपये का बीपी सन्ट के ऑपरेशन का बिल दिया गया. परिजन मुख्यमंत्री असाध्य रोग योजना के तहत लातेहार के सिविल सर्जन के पत्रांक संख्या 1909,  के माध्यम से अस्पताल को राशि उपलब्ध करा दिया. लेकिन अस्पताल प्रबंधन जमा डेढ़ लाख रूपये वापस करने के बदले और नौ लाख पचासी हजार तिरेसठ रूपये की मांग कर रहा है.

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अस्पताल पर लापरवाही का भी आरोप

परिजनों ने बताया कि दिसंबर  में बीपी संट का ऑपरेशन किया गया. ऑपरेशन के बाद जेनरल वार्ड में मरीज को शिफ्ट कर दिया गया. कुछ दिन बाद ही अस्पताल की लापरवाही के कारण मरीज को जनवरी में आईसीयू में रखा गया. मरीज को दिसंबर में रिलिज करना था जबकि प्रबंधन ने ऐसा नही किया. मुख्यमंत्री को भी दिए आवेदन में परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सों पर इलाज में लापरवाही बरतने का भी आरोप लगाया है. परिजनों का कहना है मरीज का अत्यधिक रक्तस्राव इलाज में लापरवाही के कारण हुआ था. जिस कारण कई यूनिट ब्लड चढ़ाना पड़ा. डोनर की व्यवस्था करने पर भी मेदांता के ब्लड बैंक में परिजनों से पन्द्रह हजार रूपये लिया गया  था.

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