मकर संक्रांतिः जानिये क्या है मान्यताएं और क्यों मनाया जाता है यह पर्व

Submitted by NEWSWING on Sat, 01/13/2018 - 21:21

Ranchi: सूर्य का किसी राशि विशेष पर भ्रमण करना संक्रांति कहलाता है. सूर्य हर माह में राशि का परिवर्तन करता है. इसलिए कुल मिलाकर वर्ष में बारह संक्रांतियां होती हैं, परन्तु दो संक्रांतियां सर्वाधिक महत्वपूर्ण होती हैं-मकर संक्रांति और कर्क संक्रांति. सूर्य जब मकर राशि में जाता है तब मकर संक्रांति होती है. मकर संक्रांति से अग्नि तत्त्व  की शुरुआत होती है और कर्क संक्रांति से जल तत्त्व की. इस समय सूर्य उत्तरायण होता है. अतः इस समय किये गए जप और दान का फल अनंत गुना होता है. पंडित रामदेव से जानिये मकर संक्रांति के महत्व, मान्याएं और पूजन-दान का विधि.

मकर संक्रांति में पुत्र शिन से मिलने आते हैं सूर्य

सूर्य और शनि का सम्बन्ध इस पर्व से होने के कारण यह काफी महत्वपूर्ण है. कहते हैं इसी त्यौहार पर सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने के लिए आते हैं. आम तौर पर शुक्र का उदय भी लगभग इसी समय होता है इसलिए यहां से शुभ कार्यों की शुरुआत होती है. अगर कुंडली में सूर्य या शनि की स्थिति ख़राब हो तो इस पर्व पर विशेष तरह की पूजा से उसको ठीक कर सकते हैं. जहां पर परिवार में रोग कलह तथा अशांति हो वहां पर रसोई घर में ग्रहों के विशेष नवान्न से पूजा करके लाभ लिया जा सकता है.

मकर संक्रांति में कैसे करें पूजन और दान:-

- पहली होरा में स्नान करें ,सूर्य को अर्घ्य दें.

- श्रीमदभागवद के एक अध्याय का पाठ करें,या गीता का पाठ करें.

- नए अन्न,कम्बल और घी का दान करें.

- भोजन में नए अन्न की खिचड़ी बनायें.

- भोजन भगवान को समर्पित करके प्रसाद रूप से ग्रहण करें.

- लाल फूल और अक्षत डाल कर सूर्य को अर्घ्य दें.

- सूर्य के बीज मंत्र का जाप करें.

- मंत्र होगा - "ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः"

- लाल वस्त्र, ताम्बे के बर्तन तथा गेंहू का दान करें.

- संध्या काल में अन्न का सेवन न करें.

- तिल और अक्षत डाल कर सूर्य को अर्घ्य दें.

- शनि देव के मंत्र का जाप करें.

- मंत्र होगा - "ॐ प्रां प्री प्रौं सः शनैश्चराय नमः"

- घी, काला कम्बल और लोहे का दान करें

।गुरु कृपा केवलं।

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

City List of Jharkhand
loading...
Loading...