आदिवासियों के विकास की योजनाओं को लागू कराने में विश्वास, समर्पण और निगरानी की कमी

Publisher NEWSWING DatePublished Wed, 01/03/2018 - 18:37

शैक्षिक योजनाओं में खामियों को लेकर संसदीय समिति ने जनजातीय कार्य मंत्रालय की खिंचाई की

New Delhi : संसद की एक समिति ने देश में जनजातीय वर्गों में साक्षरता दर के कम होने पर चिंता जाहिर की है. कहा है कि जनजातीय कार्य मंत्रालय की ओर से चलाई जा रही योजनाओं में विश्वास और समर्पण कमी है. समिति ने कहा कि अगर मंत्रालय अनुसूचित जनजातियों के विद्यार्थियों के प्रति न्याय करना चाहता है तो उसे इन योजनाओं के क्रियान्वयन को उम्मीद के मुताबिक प्रतिबद्धता दिखानी होगी.

कई वजहों से शैक्षणिक स्थिति बेहद दुखद

लोकसभा में पेश सामाजिक न्याय और अधिकारिता संबंधी स्थायी समिति ने जनजातियों के लिए शैक्षिक योजनाएंविषय पर अपनी रिपोर्ट में जनजातीय समूहों की शैक्षिक स्थिति का उल्लेख किया है. भाजपा के रमेश वैस इस समिति के अध्यक्ष हैं. समिति ने कहा कि देश में जनजातियों के लिए बहुत सारी शैक्षिक योजनाएं हैं, लेकिन जनजातियों में साक्षरता दर बहुत कम है. यह गंभीर चिंता का विषय है. गरीबी और खराब आर्थिक स्थिति, घर से विद्यालय की दूरी, जागरूकता का अभाव तथा अशिक्षित बुजुर्गों में औपचारिक शिक्षा की उपयोगिता एवं इसके मूल्य की समझ आदिवासियों में कम साक्षरता के प्रमुख कारण हैं.

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जनजातीय साक्षरता दर 59 फीसदी, राष्ट्रीय औसत से 14 फीसदी कम

रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रालय द्वारा क्रियान्वित की जा रही योजनाओं में विश्वास, समर्पण और पर्यवेक्षण की कमी है. मंत्रालय से आह्वान किया जाता है कि यदि एसटी छात्रों के प्रति न्याय करना हो तो वह इन योजनाओं के क्रियान्वयन में अपेक्षित प्रतिबद्धता दिखाये. वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार अनुसूचित जनजाति में साक्षरता दर 59 फीसदी है, जबकि राष्ट्रीय स्तर की कुल साक्षरता दर 73 फीसदी है.

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