परंपरानुसार जस्टिस चेलेमेश्वर ने अंतिम दिन सीजेआई दीपक मिश्रा के साथ पीठ साझा की

Publisher NEWSWING DatePublished Fri, 05/18/2018 - 20:49

NewDelhi : शुक्रवार 18 मई को जस्टिस चेलेमेश्वर का सुप्रीम कोर्ट में आखिरी कार्य दिवस रहा. हालांकि वे 22 जून को रिटायर हो रहे हैं.  बता दें कि 19 मई से सुप्रीम कोर्ट गर्मी की छुट्टियों में बंद हो रहा है. छुट्टियों के बाद दो जुलाई को कोर्ट खुलेगा. यानी जस्टिस चेलेमेश्वर कोर्ट खुलने से पहले ही रिटायर हो जायेंगे. चेलेमेश्वर सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठता में दूसरे नंबर पर थे.  परंपरा के अनुसार अंतिम दिन जस्टिस चेलेमेश्वर सीजेआई दीपक मिश्रा और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के साथ बैठे और पीठ साझा की. परंपरा है कि सेवानिवृत्त होने वाले जज अपने कार्यदिवस के अंतिम दिन मुख्य न्यायाधीश के कोर्ट में बैठते हैं.  प्रधान न्यायाधीश मिश्रान्यायमूर्ति चेलमेश्वर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ वाली पीठ शुक्रवार को करीब 15 मिनट बैठी.  पीठ के पास 11 मामले सूचीबद्ध थे, जिनमें से 10 वैवाहिक विवादों से संबंधित स्थानानंतरण याचिकाएं थींबता दें कि मामलों की सुनवाई के क्रम में कोर्ट वकीलों से अटा पड़ा था.  हालांकि बार एसोसिएशन के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष मौजूद नहीं थे. जान लें कि एसोसिएशन न्यायमूर्ति चेलमेश्वर के लिए विदाई समारोह आयोजित करना चाहती थी,  लेकिन उन्होंने निजी कारणों से इस आग्रह को ठुकरा दिया था.

इसे भी पढ़ेंः राहुल को डर कि भाजपा कर्नाटक की सत्ता के लिए धन-बल का इस्तेमाल कर सकती है

तारीफ पर जज चेलमेश्वर ने हाथ जोड़ लिये और कहामेरी प्रतिक्रिया बस यही है.

जस्टिस चेलेमेश्वर के रिटायर होने पर वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि आने वाली पीढ़ी लोकतंत्र और देश के लिए आपके अमूल्य योगदान को हमेशा याद रखेगी. इसी क्रम में  वरिष्ठ वकील राजीव दत्ता ने भी जस्टिस चेलेमेश्वर के अमूल्य योगदान के लिए उनकी  सराहना  की.  वकील गोपाल शंकरनारायणन ने अपने फेयरवेल स्पीच में जस्टिस चेलेमेश्वर को धन्यवाद दिया और कहा कि जूनियर सदस्यों को आपसे काफी कुछ सीखने को मिला है.  अपनी तारीफ पर न्यायमूर्ति चेलमेश्वर ने अपने हाथ जोड़ लिये और कहा, मेरी प्रतिक्रिया बस यही है. याद करें कि जस्टिस चेलेमेश्वर उन चार जजों में शामिल थे,  जिन्होंने कुछ दिन पूर्व सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई दीपक मिश्रा के खिलाफ मोर्चा खोला थामार्च में उन्होंने सीजेआई को पत्र लिखकर कहा था कि न्यायिक प्रक्रिया में सरकार का हस्तक्षेप बढ़ रहा है. साथ ही चारों जजों ने सीजेआई के द्वारा रोस्टर बनाने, कॉलेजियम सिस़्टम सहित कई मुद्दों पर अपनी राय रखी थी. इन जजों ने कॉलेजियम की बैठकों का बहिष्कार करने तथा सुप्रीम कोर्ट के कामों में पारदर्शिता और विश्वसनीयता का सवाल उठाया था

 न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

na