झारखंड फिल्म नीति आयोग के सदस्य बुलू घोष नहीं रहे, शोक में डूबा झारखंडी कला जगत

Publisher NEWSWING DatePublished Tue, 01/23/2018 - 16:20

Ranchi: झारखंड फिल्‍म नीति आयोग के सदस्‍य बुलू घोष का रांची के थड़पखना स्थित आवास में निधन हो गया. बुलू करीब 55 साल के थे. उन्‍होंने अपनी पूरी जिंदगी झारखंड की लोक संस्‍कृति और संगीत को बढ़ावा देने में गुजार दिया.

बुलू घोष कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे. बताया जाता है कि वह घर में अचानक गिर पड़े. उसके बाद उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया. जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

इसे भी पढ़ें ः झारखंड बजट-2018 : जानें कहां से होगा पैसों का प्रबंध और कहां होगा खर्च, 14 फीसदी राशि ऋण लेगी सरकार

उनका अंतिम संस्कार कल किया जायेगा. उनके परिवार में एक बेटा और एक बेटी है. बेटा बंगलौर में रहता है और बेटी दिल्ली में. कल बेटा के रांची पहुंचने के बाद उनका अंतिम संस्कार किया जायेगातब तक उनका शव केसी रॉय मेमोरियल अस्पताल में ही रखा जायेगा.

बुलू के आकस्मिक निधन से झारखंड के सिनेमा जगत में शोक की लहर है. झारखंड के संगीत जगत में उनका बहुत सम्मान था. बुलू अपनी पत्नी मिताली घोष के साथ मिलकर ही संगीत की शिक्षा देते थे.

जानकारी के मुताबिकबुलू बचपन में माता-पिता के साथ दक्षिण भारत में रहा करते थे. लेकिनकिसी कारणवश बुलू घोष की मां को दक्षिण भारत का माहौल पसंद नहीं आया. इस कारण बुलू घोष तीन वर्ष की उम्र में अपने माता-पिता और भाई के साथ झारखंड चले आए थे.

इसे भी पढ़ें ः रिम्स की सुरक्षा में चूक, अस्पताल से भगा कैदी (देखें वीडियो)

बुलू घोष का कॅरियर

मात्र 17 साल की उम्र में बुलु घोष ने संगीत के क्षेत्र में कदम रखा था. 1972 में पढ़ाई के साथ-साथ वह संगीत के क्षेत्र में भी सक्रिय रहे. उन्होंने अपने भाई के साथ मिलकर बुलु-पापा बैंड की स्थापना की थीजो रांची में अपनी तरह का पहला बैंड था. वे पहले दुर्गापूजा के अवसर पर परफार्मेंस देते थे. उन्होंने 1983 से म्यूजिक कैसेट की रिकार्डिंग और बिक्री का व्यवसाय शुरू किया. 1985 में उनके भाई पापा का निधन हो गयाजिससे उनके बैंड को झटका लगा. 1997 से उन्होंने नागपुरी फिल्मों का रुख किया और कई एलबमों का निर्माण भी किया. 

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.