रविवार को धरती पर उल्कापात की तरह गिरेगा आठ हजार किलो वजनी चीन का हेवनली पैलेस

Publisher NEWSWING DatePublished Sat, 03/31/2018 - 16:22

New Delhi :  रविवार एक अप्रैल को अंतरिक्ष में भटक रहा आठ हजार किलो वजनी चीन का स्पेस स्टेशन तियांगोंग-1 , जिसे  हेवनली पैलेस कहा गया है,  धरती पर गिरेगा.  हालांकि अंतरिक्ष विज्ञानियों का कहना है कि यह किसी के ऊपर नहीं गिरने वाला. किसी को कोई नुकसान भी नहीं होगा.  इस संबंध में चीन के उच्चाधिकारियों का मानना है कि स्पेस लैब का वापस धरती पर आना शानदार शो की तरह होगा.  चायना मैंड स्पेस इंजीनियरिंग ऑफिस के अनुसार, स्पेस क्राफ्ट उस तरह धरती पर नहीं गिरते, जैसा फिल्मों में दिखाया जाता है और फिर बड़ा नुकसान होता है. कहा कि स्पेस क्राफ्ट धरती पर उल्कापात की तरह गिरते हैं. यह एक खूबसूरत नजारा होता है. 

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धरती पर गिरते समय स्पेस लैब के अधिकतर हिस्से जल जायेंगे 
 बता दें कि चीन के इस पहले स्पेस लैब को 2011 में लॉन्च किया गया था.  उसका नामकरण स्वर्ग में राजमहल यानी हेवनली पैलेस किया गया था.  तियांगोंग-1 ने 16 मार्च से डेटा भेजना बंद कर दिया और डेड हो गया. चीन ने उस पर से नियंत्रण खो दिया. वैज्ञानिकों के अनुसार, धरती पर गिरते समय स्पेस लैब के ज्यादातर हिस्से जल जायेंगे.  इस कारण ना तो कोई विमानन गतिविधि प्रभावित होगी और न ही किसी को चोट लगेगी.  तियांगोंग-1  मानवरहित था. इसे लगभग 216.2 किलोमीटर की औसत ऊंचाई पर अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित किया गया था.  तियांगोंग-1 ने शेनझोउ-8, शेनझोउ-9 और शेनझोउ-10 अंतरिक्षयान के साथ सफलतापूर्वक काम किया और कई सफल प्रयोग किये. 

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पहले भी धरती पर गिर चुके हें स्पेस स्टेशन

चीन के तियांगोंग-1  यानी हेवनली पैलेस के धरती पर गिरने को लेकर हो हंगामा है,  लेकिन ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है. पूर्व में भी कई स्पेस  लैब धरती पर गिरे हैं.  अमेरिका का पहला स्पेस स्टेशन स्काईलैब ऐसा ही अंतरिक्ष केंद्र था,  जो अपनी कक्षा से बाहर आकर धरती पर गिरा था और हड़कंप मच गया था. इसे नासा ने 1973 में लॉन्च किया था. उस समय खबर आयी थी कि यह भारत में गिरेगा, जिससे भारत में हडकंप मच गया था. इसके अलावा सैल्यूट 7  स्पेस स्टेशन को लेकर बताया गया था कि यह 1994 तक अपनी कक्षा में रहेगा, लेकिन 1991 में ही यह धरती पर गिरा. दुनिया के पहले स्थायी अंतरिक्ष स्टेशन मीर  को 1986 में अंतरिक्ष में स्थापित किया गया था, लेकिन 2001 में यह नष्ट हो गया.

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