सरकार कायर, हर दिन बदलती है राष्ट्रवाद की परिभाषा, RSS और भक्त राष्ट्रवाद पर रुख स्पष्ट करें : शिवसेना

Publisher NEWSWING DatePublished Thu, 01/11/2018 - 17:26

Munbai : राष्ट्रगान पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लेकर अपने सहयोगी दल भाजपा पर शिवसेना ने निशाना साधा है. आज भक्तों’ और आरएसएस से राष्ट्रवाद पर अपना रूख स्पष्ट करने का अनुरोध किया. उच्चतम न्यायालय ने आदेश दिया था कि सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान बजाना वैकल्पिक है. शिवसेना के मुखपत्र सामना में प्रकाशित एक संपादकीय में व्यंग्यपूर्ण रूप से उच्चतम न्यायालय के आदेश को ‘‘ऐतिहासिक या क्रांतिकारी’’ बताया गया है. कहा गया कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने कहा था कि सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान बजाना महत्वपूर्ण नहीं’ है जिसके बाद यह आदेश आया है.

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सरकार कायर, हर दिन बदलती है राष्ट्रवाद की परिभाषा

संपादकीय में कहा गया है, ‘‘केंद्र ने कहा कि थिएटरों में राष्ट्रगान बजाना महत्वपूर्ण नहीं है जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपने ही फैसले पर यू-टर्न ले लिया. आरएसएस और अन्य राष्ट्रवादी संगठनों का इस पर क्या रूख है.’’ अखबार में कहा गया है, ‘‘उच्चतम न्यायालय का फैसला उन लोगों के लिए झटका है जिन्होंने मोदी सरकार में यह रुख अपनाया था कि वंदे मातरम् गाने वाले लोग राष्ट्रवादी हैं और जो नहीं गाते हैं वे देशद्रोही हैं.’’ राष्ट्रगान पर सरकार के रूख को कायरतापूर्ण बताते हुए इसमें कहा गया है कि राष्ट्रवाद की परिभाषा हर दिन बदल रही है.

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गोवा में बीफ पर प्रतिबंध क्यों नहीं, पीएम की फोटो लग सकती है मदरसों में तो फिर राष्ट्रगान क्यों नहीं

शिवसेना ने कहा कि अभी तक यह कहा जाता है कि जो लोग गायों की रक्षा करते हैं वे राष्ट्रवादी है. जो बीफ खाते हैं वे देशद्रोही हैं. लेकिन भाजपा शासित गोवा के मुख्यमंत्री ने कल कहा कि राज्य में बीफ पर कोई प्रतिबंध नहीं है. उसने कहा कि उत्तर प्रदेश में मदरसों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीरें लगाना अनिवार्य बना दिया गया है. लेकिन अभी तक राष्ट्रगान के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है. संपादकीय में कहा गया है, ‘‘यह ऐसा है कि जो लोग वंदे मातरम् कहते हुए फांसी के फंदे पर झूल गए वे बेवकूफ थे. भाजपा भक्तों को इस पर क्या कहना है.’’

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