फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट की रिपोर्ट :  नोटबंदी के बाद बैंकों में जमा हुए भारी मात्रा में जाली नोट

Publisher NEWSWING DatePublished Sat, 04/21/2018 - 17:47

 NewDelhi : फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (एफआईयू) की रिपोर्ट के अनुसार आठ नवंबर 2016 को हुई नोटबंदी के बाद देश के बैंकों को सबसे अधिक मात्रा में जाली नोट मिले हैं. साथ ही संदिग्ध लेनदेन में भी 480% से भी अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गयी. रिपोर्ट के अनुसार नोटबंदी के बाद मिलीं कुछ एसटीआर का संभावित संबंध टेरर फंडिंग से है.  देश में नोटबंदी के बाद बैंकों में जमा हुई संदिग्ध राशि पर वित्त मंत्रालय के तहत काम करने वाली एजेंसी की पहली रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है.  बता दें कि एजेंसी का काम देश में होने वाले संदिग्ध बैंकिंग लेनदेनों पर नजर रखना है.  रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी, निजी क्षेत्र के अलावा सहकारी बैंकों तथा अन्य वित्तीय संस्थानों में 2016-17 में  लगभग 4.73 लाख से भी अधिक संदिग्ध लेनदेन के बारे में जानकारी मिली.  यह 2015-16 के मुकाबले चार गुना अधिक है.  जानकारी दी गयी है कि एसटीआर के मामले सबसे अधिक बैंकों की श्रेणी में सामने आये;  2015-16 के मुकाबले इसमें 489% की बढ़ोतरी हुई.  वहीं, वित्तीय इकाइयों के मामले में यह बढ़ोतरी 270% की रही. 

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नोटबंदी के बाद जाली मुद्रा लेनदेन 79% बढ़ा   

 वर्ष 2015-16 में कुल 1.05 लाख एसटीआर बनायी गयी थीं;  इसमें से 61,361 एसटीआर बैंकों द्वारा एफआईयू को भेजी गयी थीं.  नोटबंदी के बाद इनकी संख्या बढ़कर 3,61,215 तक पहुंच गयी. वहीं, अन्य वित्तीय इकाइयों के संबंध में एसटीआर का आंकड़ा 40,033 था. नोटबंदी के बाद यह बढ़कर 94,837 पर पहुंच गया. जाली मुद्रा लेनदेन 79% बढ़ा.  2016-17 में आंकड़ा 7.33 लाख पर पहुंचा. जाली मुद्रा के लेनदेन के मामलों की बात करें तो 2016-17 के दौरान इनकी संख्या में पिछले साल के मुकाबले 79% का इजाफा हुआ.  2015-16 में जाली मुद्रा रिपोर्ट (सीसीआर) की संख्या 4.10 लाख थी.  2016-17 में यह 3.22 लाख की बढ़ोतरी के साथ 7.33 लाख पर पहुंच गयी. सीसीआर 2008-09 से निकाली जानी शुरू की गयी थी. उसके बाद से यह इसका सबसे बड़ा आंकड़ा है. 

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जाली नोट मिलते ही बैंकों को एफआईयू को सीसीआर देनी होती है

नोटबंदी के बाद एसटीआर और सीटीआर की संख्या बढ़ने को देखते हुए एफआईयू ने 2016-17 में अपनी कोशिशों में बढ़ोतरी की. इस दौरान उसने 56,000 एसटीआर को विभिन्न जांच एजेंसियों के साथ साझा किया.   इनमें आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), सीबीआई और राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) शामिल हैं.  इससे पिछले वर्ष में एफआईयू ने 53,000 एसटीआर इन जांच एजेंसियों के साथ साझा की गयी थी. जाली नोट मिलते ही बैंकों को एफआईयू को सीसीआर देनी होती है. सीसीआर यानी जाली मुद्रा रिपोर्ट, लेनदेन आधारित रिपोर्ट होती है. यह जाली नोट का पता चलने पर बनती है.

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