दुमकाः कुरमी को एसटी में शामिल करने के लिए सीएम को हस्ताक्षर पत्र सौंपने का विरोध, ग्रामीणों ने नेताओं का पुतला फूंका (देखें वीडियो)

Publisher NEWSWING DatePublished Tue, 02/13/2018 - 16:23

Dumka: कुरमी समुदाय को आदिवासी जनजाति में शामिल करने हेतु 42 विधायकों और दो सांसदों द्वारा संयुक्त रूप से हस्ताक्षर पत्र मुख्यमंत्री को सौपने जाने का विरोध किया गया. विरोध में दिसोम मारंग बुरु संताली अरीचली आर लेगचार आखड़ा और ग्रामीणों ने दुमका प्रखण्ड के हिजला गांव में मुख्यमंत्री रघुवर दास सहित कई नेताओं का पुतला दहन किया.

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इन नेताओं का पुतला दहन किया गया

जिन नेताओं का पुतला दहन किया गया उनमें प्रतिपक्ष नेता व पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, सांसद विधुतवरण महतो, सांसद रामटहल चौधरी, विधायक चंपई सोरेन, ताला मरांडी, योगेश्वर माहतो, योगेन्द्र प्रसाद, जय प्रकाश भाई पटेल, कुणाल षाडगी, साधुचरण माहतो, नागेन्द्र माहतो, इरफान अंसारी, जीतू चरण राम, अमित कुमार, विकास मुंडा, निर्भय साह्बादी, जय प्रकाश बर्मा, दशरथ गगराई, अनन्त ओझा, नारायण दत्त, रवीन्द्र माहतो, चन्द्र प्रकाश चौधरी, नर्मला देवी, शशि भूषण समड, बिरंची नारायण, प्रकाश राम, प्रदीप यादव, कुशवाहा शिवपूजन मेहता, पीसी मंडल, राज सिन्हा, आलोक चौरसिया, गणेश गंझू, राज कुमार यादव सहित अन्य कई विधायकों के नाम शामिल हैं. दुमका विधायक सह कल्याण मंत्री लुईस मरांडी का भी पुतला जलाया गया, क्योंकि वह आदिवासी मंत्री होकर भी इसका विरोध नहीं कर रही हैं.

आदिवासियों के आरक्षण, रोजगार और अस्तित्व को खत्म करना चाहते हैं नेता

आखड़ा और ग्रामीणों ने कहा कि ये सभी नेता आदिवासियों के आरक्षण, रोजगार और अस्तित्व को खत्म करना चाहते हैं. झारखण्ड की समरसता को बिगाड़ना चाहते हैं. लेकिन ऐसा हरगिज नहीं होने दिया जाएगा. अगर इसे वापस नहीं लिया जाता है और सत्ता और विपक्षी पार्टियों की आदिवासी विरोधी नीति बनी रहती है, तो आखड़ा और ग्रामीणों ने यह निर्णय लिया कि आगामी चुनाव में इन सभी नेताओं और पार्टियों का राजनितिक और सामाजिक बहिष्कार किया जायेगा. निर्दलीय नेताओं को वोट देकर विजयी बनाया जायेगा.

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ये थे मौजूद

इस मौके पर चंदू दा, मेरी सोरेन, श्वेता बास्की, पुतुल हांसदा, फुलमुनी मरांडी, दिलीप सोरेन, बुद्दीलाल मरांडी, जियालाल हेम्ब्रोम, जय गणेश हांसदा, अजित हांसदा, सुनिराम हेम्ब्रोम, भुनेश्वर हांसदा, प्रिन्स मरांडी, सोम हांसदा, कादरु हांसदा, लखीराम टुडू, पोलुस हांसदा, अरविन्द टुडू, राजेन्द्र हेम्ब्रोम, रामेश्वर हांसदा, सेवाधन हांसदा, मुन्ना बास्की, संतोष हेम्ब्रोम, देवी सोरेन, अभिषेक हांसदा, जुनाथुस हांसदा, सुनीराम हांसदा, मिस्त्री मरांडी, सुराई हांसदा के साथ काफी संख्या में ग्रामीण उपस्थति थे.

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